राज्य कृषि समाचार (State News)

एल नीनो के सूखे में CAZRI की मोठ की किस्मों ने दिखाई शानदार सहनशीलता

15 सितंबर 2026, जोधपुर: एल नीनो के सूखे में CAZRI की मोठ की किस्मों ने दिखाई शानदार सहनशीलता – पश्चिमी राजस्थान के शुष्क और गर्म क्षेत्रों में उगाई जाने वाली महत्वपूर्ण दलहन फसल मोठ ने इस वर्ष लंबे सूखे के बावजूद बेहतर प्रदर्शन किया है। ICAR-केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान संस्थान (CAZRI), जोधपुर द्वारा विकसित मोठ की चार नई किस्मों ने खरीफ 2026 में करीब 35 दिनों के लंबे नमी तनाव के दौरान भी अच्छी वृद्धि और फली विकास बनाए रखा।

CAZRI ने पिछले तीन वर्षों में CAZRI Moth-4, CAZRI Moth-5, CAZRI Moth-6 और CAZRI Moth-7 किस्में जारी की हैं। इनका विकास एक दशक से अधिक समय से चल रहे प्रजनन और आनुवंशिक सुधार कार्यक्रम के तहत किया गया है, जिसमें सूखा सहनशीलता, विकासात्मक लचीलापन और अधिक उत्पादन क्षमता पर जोर दिया गया।

पश्चिमी राजस्थान में मोठ की खेती लगभग 10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में होती है, लेकिन 150–250 मिमी की कम और अनिश्चित वर्षा, 20–30 दिनों के सूखे अंतराल तथा मिट्टी में सीमित नमी के कारण इसकी उत्पादकता लगभग 350 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर ही है।

खरीफ 2026 में 3 अगस्त के बाद प्रभावी वर्षा नहीं हुई और 3 अगस्त से 7 सितंबर तक लगभग 35 दिनों का सूखा रहा। इस दौरान संचयी पैन वाष्पीकरण करीब 180 मिमी रहा। सतही मिट्टी की नमी 15–16 प्रतिशत से घटकर 5–6 प्रतिशत रह गई, जबकि 10–40 सेमी गहराई पर नमी लगभग 23 प्रतिशत से घटकर 16 प्रतिशत हुई।

इसके बावजूद CAZRI की किस्मों में हरियाली, अच्छी वृद्धि और लगभग 55 दिन की अवस्था में पर्याप्त फली विकास देखा गया। यह प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नमी की कमी फूल आने, फली बनने और प्रजनन विकास के चरण में रही।

CAZRI के अनुसार समय पर बुवाई, 45 × 10 सेमी पौध दूरी, बुवाई के 20 दिन बाद अंतर-खुरपाई, खरपतवार नियंत्रण और मिट्टी में नमी संरक्षण जैसी कृषि तकनीकों ने भी फसल को उपलब्ध नमी का बेहतर उपयोग करने में मदद की।

इन किस्मों की एक प्रमुख विशेषता विकासात्मक लचीलापन (Developmental Plasticity) है। ये लगभग 30 दिन में फूल देना शुरू कर देती हैं और मिट्टी में उपलब्ध नमी के अनुसार अपनी वृद्धि और पकने की अवधि को समायोजित कर सकती हैं। पश्चिमी राजस्थान जैसे क्षेत्रों में, जहां वर्षा की मात्रा और समय अत्यधिक अनिश्चित है, यह गुण महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

इन चार किस्मों का बीज उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है। CAZRI रिसर्च फार्म में सात हेक्टेयर क्षेत्र में बीज उत्पादन किया जा रहा है, ताकि 2026 के लिए Saathi Portal के माध्यम से मांगी गई 23.32 क्विंटल बीज की आवश्यकता पूरी की जा सके। वर्ष 2025 में इन चारों किस्मों के लिए 63.2 क्विंटल बीज की मांग की गई थी।

CAZRI के अनुसार एक क्विंटल ब्रीडर सीड से लगभग 1,000–1,400 क्विंटल प्रमाणित बीज तैयार किया जा सकता है। इसकी पूरी क्षमता का उपयोग होने पर लगभग 10,000 हेक्टेयर क्षेत्र में खेती को समर्थन मिल सकता है। राजस्थान राज्य बीज निगम, नेशनल सीड्स कॉरपोरेशन और चयनित निजी कंपनियां इन किस्मों के बीज उत्पादन में शामिल हैं।

DARE के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने कहा कि मोठ थार मरुस्थल की विशिष्ट फसल है और CAZRI की जलवायु-सहनीय किस्में क्षेत्र को अधिक समृद्ध बनाने, किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा करने और दलहन में आत्मनिर्भरता हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

उन्होंने कहा कि लंबे समय तक बारिश न होने के बावजूद इन किस्मों का वृद्धि और फली विकास बनाए रखना जलवायु-सहनीय कृषि में आनुवंशिक सुधार की क्षमता को दर्शाता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किस्मों की आनुवंशिक क्षमता का पूरा लाभ लेने के लिए समय पर बुवाई, उचित पौध संख्या, खरपतवार नियंत्रण और नमी संरक्षण जैसी बेहतर कृषि प्रथाओं को अपनाना जरूरी है।

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