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राज्य कृषि समाचार (State News)

15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने की सलाह : सकारात्मक पहल

29 अगस्त 2026, भोपाल: 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने की सलाह : सकारात्मक पहल –  एक महीने में चीनी के दाम करीब 16 प्रतिशत बढ़ गए हैं। 20 जुलाई को 48.18 रुपये किलो बिकने वाली चीनी 20 अगस्त को 55.70 रुपये किलो पहुंच गई। लेकिन सरकारी आंकड़ों से इतर बात करें बाजार में शक्कर सत्तर रूपे किलो तक मिल रही है । ऐसे में आम उपभोक्ता के मन में स्वाभाविक सवाल है कि क्या देश में चीनी की कमी हो गई है और आने वाले दिनों में इसके दाम और बढ़ेंगे ? यह आशंका इसलिए भी है कि आने वाले दिनों में चीनी की मांग और बढ़ेगी । सरकार का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है। देश में घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है, लेकिन कुछ स्थानों पर जमाखोरी, सट्टेबाजी, कम उत्पादन और त्योहारी सीजन की बढ़ती मांग ने कीमतों पर दबाव बनाया हुआ है।

हालांकि इसी के मद्देनजर सरकार ने चीनी की आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए एक साथ कई कदम उठाए हैं। चीनी डीलरों के लिए 1 अगस्त से 30 नवंबर तक 400 टन की स्टॉक सीमा लागू कर दी गई है। 1 सितंबर से थोक उपभोक्ता अपनी 15 दिन की जरूरत से अधिक चीनी नहीं रख सकेंगे। चीनी मिलों के स्टॉक की जांच के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमें मैदान में उतर गई हैं। इतना ही नहीं, बाजार में किसी भी संभावित कमी से निपटने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति भी दी है।

सरकार ने इससे आगे बढ़कर राज्यों और चीनी मिलों को 15 अक्टूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने की सलाह दी है। इससे अक्टूबर में चीनी का उत्पादन सामान्य 3-4 लाख टन से बढ़कर 10 लाख टन से अधिक होने की उम्मीद है। यानी सरकार की कोशिश है कि त्योहारों में मांग बढ़ने से पहले बाजार में नई चीनी पहुंच जाए और कीमतों पर दबाव कम हो।

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क्या सचमुच देश में चीनी खत्म होने वाली है?

मौजूदा चीनी मौसम में शुरुआती अनुमान के अनुसार उत्पादन 343 लाख टन के मुकाबले घटकर करीब 306 लाख टन रहने की उम्मीद है। बारिश से जलभराव और रेड रॉट तथा टॉप बोरर जैसी बीमारियों ने गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचाया है। इसके बावजूद देश में घरेलू खपत पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

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भारत में हर साल औसतन 300-340 लाख टन चीनी का उत्पादन होता है, जबकि घरेलू खपत करीब 280-290 लाख टन है। इसलिए मौजूदा स्थिति को देश में चीनी खत्म होने की स्थिति के बजाय अल्पकालिक आपूर्ति और बाजार के दबाव  के रूप में देखा जा रहा है।

फिर अचानक इतनी महंगी क्यों हुई चीनी ?

चीनी के दाम में हुई बढ़ोत्तरी के पीछे केवल एक कारण नहीं है। उत्पादन अनुमान से कम रहने, त्योहारों से पहले मांग बढ़ने, मौसम से फसल प्रभावित होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने के साथ कुछ कारोबारियों द्वारा सट्टेबाजी और जमाखोरी ने भी बाजार को प्रभावित किया है। यही वजह है कि सरकार ने स्टॉक सीमा लगाने और भौतिक सत्यापन जैसे कदम उठाए हैं। इसका सीधा मकसद यह सुनिश्चित करना है कि व्यापारी जरूरत से ज्यादा चीनी रोककर बाजार में कृत्रिम कमी पैदा न कर सकें।

क्या एथेनॉल की वजह से चीनी महंगी हुई?

चीनी की कीमत बढ़ने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि गन्ने से एथेनॉल बनाने के कारण चीनी कम पड़ रही है। सरकार के अनुसार ऐसा नहीं है। एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा 2022-23 के करीब 12 प्रतिशत से घटकर 2025-26 में लगभग 9 प्रतिशत रह गया है। वहीं, देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का, से आता है।

सरकार का कहना है कि एथेनॉल कार्यक्रम ने उलटे चीनी उद्योग और किसानों को आर्थिक मजबूती दी है। अतिरिक्त चीनी को एथेनॉल में बदलने से मिलों पर अतिरिक्त स्टॉक का दबाव कम हुआ और किसानों को भुगतान में भी सुधार हुआ। 20 अगस्त तक 2025-26 सीजन के 97 प्रतिशत गन्ना बकाये का भुगतान किया जा चुका था।

दुनिया में भी चीनी की कमी

भारत अकेला देश नहीं है जहां चीनी के दाम बढ़े हैं। वर्ष 2026-27 में दुनिया में करीब 33 लाख टन चीनी की कमी का अनुमान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी की कीमत 30 जून के 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में कीमत 16 प्रतिशत से अधिक बढ़ी है।

अब उपभोक्ता क्या समझे?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि देश में चीनी की वास्तविक कमी नहीं है। सरकार ने स्टॉक सीमा, जमाखोरी की जांच, शुल्क-मुक्त आयात और अक्टूबर में जल्दी पेराई शुरू करने जैसे कदम उठाए हैं। इन उपायों से त्योहारी सीजन में बाजार में पर्याप्त चीनी पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।

इसलिए उपभोक्ताओं के लिए संदेश साफ है , घबराकर जरूरत से ज्यादा चीनी खरीदने की जरूरत नहीं है। यदि उपभोक्ता सामान्य खरीदारी करते हैं और प्रशासन जमाखोरी पर प्रभावी कार्रवाई करता है तो बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति बनने से रोकी जा सकती है। वहीं, 15 अक्टूबर से शुरू होने वाली पेराई से नई चीनी की आवक बढ़ने पर कीमतों पर भी दबाव कम होने की उम्मीद है।

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