पंजाब में धान की सफेद पीठ फुदका, पत्ती लपेटक और झुलसा रोग से बचाव की सलाह
04 नवंबर 2026, गुरदासपुर, पंजाब: पंजाब में धान की सफेद पीठ फुदका, पत्ती लपेटक और झुलसा रोग से बचाव की सलाह – पंजाब के गुरदासपुर, पठानकोट और होशियारपुर क्षेत्र में धान की खड़ी फसल में सफेद पीठ फुदका, पत्ती लपेटक और झुलसा रोग के प्रकोप को लेकर मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ की कृषि मौसम सलाहकार इकाई ने दवा और मात्रा के साथ ताज़ा सलाह जारी की है। यह सलाह 30 अक्टूबर को जारी बुलेटिन संख्या 87/2026 में दी गई है, जिसका पांच दिन का पूर्वानुमान 3 नवंबर तक और विस्तारित पूर्वानुमान 5 नवंबर तक वैध है।
बुलेटिन के अनुसार, जब खेत में पानी भरा होने के दौरान पौधे के आधार पर प्रति कुंडी कम से कम 5 फुदके दिखें, तभी सफेद पीठ फुदका के लिए छिड़काव करें। इस कीट के हमले से पौधों के समूह में “हॉपरबर्न” की स्थिति बन जाती है, जिसमें पत्तियां पीली पड़कर सूखने लगती हैं और गोल घेरे में पौधे झुलस जाते हैं। सिफारिश के अनुसार प्रति एकड़ 100 लीटर पानी में पेक्सालॉन 10 एससी 94 मिलीलीटर, या चेस 50 डब्ल्यूजी 120 ग्राम, या इकालक्स 25 ईसी (क्विनालफॉस) 800 मिलीलीटर का छिड़काव किया जा सकता है। जैविक खेती करने वाले किसान इकोटिन (एजाडिरेक्टिन 5 प्रतिशत) 80 मिलीलीटर या पीएयू का घरेलू नीम अर्क 4 लीटर प्रति एकड़ के हिसाब से इस्तेमाल कर सकते हैं।
पत्ती लपेटक और झुलसा रोग पर भी सलाह
पत्ती लपेटक कीट के लिए सलाह है कि फूल आने से पहले, जब खेत में पानी भरा हो, तब 20 से 30 मीटर लंबी रस्सी फसल के ऊपर से आगे-पीछे खींचकर कीट को गिराया जा सकता है। अगर पत्ती क्षति 10 प्रतिशत से ज़्यादा हो, तो प्रति एकड़ कोराजेन 60 मिलीलीटर या मोर्टार 170 ग्राम का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
जिन खेतों में धान की बालियां निकलने की अवस्था में झुलसा रोग का असर दिख रहा है, वहां प्रति एकड़ 200 लीटर पानी में अमिस्टार टॉप 325 एससी 200 मिलीलीटर, या इंडोफिल जेड-78 75 डब्ल्यूपी 500 ग्राम का छिड़काव करने की सिफारिश की गई है। बुलेटिन में सभी किसानों से कहा गया है कि छिड़काव से पहले दवा के लेबल पर दिए निर्देश ज़रूर पढ़ें और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह भी लें।
आर्थिक नुकसान स्तर पर नज़र रखना ज़रूरी
कृषि विभाग के अनुसार सफेद पीठ फुदका जैसे कीटों के लिए तय आर्थिक नुकसान स्तर यानी ईटीएल का ध्यान रखना बहुत ज़रूरी है, क्योंकि ज़रूरत से पहले छिड़काव करने से न सिर्फ लागत बढ़ती है, बल्कि खेत में मौजूद मित्र कीटों को भी नुकसान पहुंचता है। इसी वजह से बुलेटिन में साफ कहा गया है कि प्रति कुंडी कम से कम पांच फुदके दिखने पर ही दवा का इस्तेमाल करें।
इसी बुलेटिन में सोयाबीन की फसल में सफेदमक्खी और पीला मोज़ेक वायरस की शुरुआती निगरानी रखने और ज़रूरत पड़ने पर घरेलू नीम अर्क के छिड़काव की सलाह भी दी गई है। इसके अलावा मक्के की फसल में फॉल आर्मीवर्म कीट को लेकर अभी सिर्फ निगरानी बढ़ाने को कहा गया है, क्योंकि फिलहाल किसी रासायनिक छिड़काव की ज़रूरत नहीं बताई गई है।
मौसम विज्ञान केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार आने वाले दिनों में नमी बने रहने की संभावना है, जिससे धान की फसल में फुदका और झुलसा जैसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं। इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से अपने खेत का निरीक्षण करें और लक्षण दिखते ही सही दवा व मात्रा का चुनाव करें।
पंजाब में धान की फसल पकने और कटाई के इस अहम दौर में सफेद पीठ फुदका और झुलसा रोग हर साल किसानों के लिए चिंता का विषय बने रहते हैं, क्योंकि समय पर नियंत्रण न होने पर उपज में भारी गिरावट आ सकती है। कृषि विभाग और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लगातार किसानों को खेत में निगरानी बढ़ाने और सही समय पर सही मात्रा में दवा के इस्तेमाल के लिए जागरूक करते रहते हैं, ताकि कटाई से पहले के इन अंतिम हफ्तों में फसल को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जा सके।
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