हरियाणा में जैविक खाद पर किसानों को मिलेगी 80 प्रतिशत सब्सिडी
05 नवंबर 2026, सिरसा (हरियाणा): हरियाणा में जैविक खाद पर किसानों को मिलेगी 80 प्रतिशत सब्सिडी – हरियाणा के किसानों के लिए रबी सीजन 2026-27 में जैविक खाद यानी वर्मीकम्पोस्ट खरीदना अब सस्ता होगा। राज्य सरकार ने “मेरी फसल-मेरा ब्योरा” पोर्टल पर पंजीकृत किसानों को जैविक खाद की खरीद पर 80 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की घोषणा की है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा के मुताबिक यह फैसला राज्य के बजट में किए गए ऐलान के बाद कृषि विभाग ने अमल में लाया है। सिरसा में उप कृषि निदेशक डॉ. विनोद फोगट ने बताया कि किसानों को इसका लाभ लेने के लिए सबसे पहले पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा।
हरियाणा में बड़ी संख्या में किसान धान-गेहूं की सघन खेती के कारण मिट्टी में जीवांश कार्बन घटने और रासायनिक खाद पर बढ़ती निर्भरता की शिकायत लंबे समय से करते रहे हैं। वर्मीकम्पोस्ट जैसी जैविक खाद मिट्टी की संरचना सुधारने और पानी रोकने की क्षमता बढ़ाने में मदद करती है, इसलिए कृषि विभाग इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर ज़ोर दे रहा है।
आवेदन से बिल अपलोड तक की समय-सीमा तय
योजना का फायदा लेने के लिए किसानों को 31 दिसंबर तक “मेरी फसल-मेरा ब्योरा” पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके बाद अधिकृत व लाइसेंसधारी डीलरों से जैविक खाद की खरीद 15 जनवरी 2027 तक करनी होगी।
खरीद के बिल पोर्टल पर अपलोड करने की अंतिम तारीख 30 जनवरी 2027 रखी गई है। इसके अलावा बिल की हार्ड कॉपी भी संबंधित खंड कृषि अधिकारी के कार्यालय में जमा करानी होगी, तभी सब्सिडी की राशि किसान के बैंक खाते में सीधे ट्रांसफर की जाएगी।
सब्सिडी असली बिल की राशि के 80 प्रतिशत के बराबर होगी या सरकार द्वारा तय अधिकतम सीमा के बराबर, इन दोनों में जो भी कम होगा वही किसान को मिलेगा। यह सब्सिडी प्रति किसान अधिकतम एक एकड़ क्षेत्र के लिए दी जाएगी।
छोटे विक्रेताओं को लाइसेंस से छूट भी
सरकार ने जैविक खाद बेचने वाले छोटे दुकानदारों के लिए भी राहत का एलान किया है। 5 किलोग्राम तक के छोटे पैकेट में एफओएम (FOM), एलएफओएम (LFOM) और प्रोम (PROM) जैसी जैविक खाद बेचने वाले विक्रेताओं को लाइसेंसिंग के नियमों से छूट दी जाएगी, बशर्ते उनका स्टॉक 10 मीट्रिक टन से अधिक न हो।
उप कृषि निदेशक डॉ. फोगट ने किसानों से रासायनिक खाद पर निर्भरता घटाकर वर्मीकम्पोस्ट जैसी जैविक खाद का ज़्यादा इस्तेमाल करने की अपील की है। उनका कहना है कि इससे मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है और खेती की लागत भी कम होती है।
योजना का दायरा पूरे राज्य के पंजीकृत किसानों तक है, हालांकि इसकी शुरुआती जानकारी सिरसा जिले से सामने आई। कृषि विभाग के मुताबिक आने वाले दिनों में सभी जिलों के कृषि कार्यालयों में भी किसानों को पोर्टल पर पंजीकरण और आवेदन में मदद दी जाएगी।
“मेरी फसल-मेरा ब्योरा” पोर्टल पहले से ही हरियाणा में फसल पंजीकरण, मंडी में उपज बेचने और कई कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए मुख्य माध्यम बन चुका है। कृषि विभाग का कहना है कि जैविक खाद सब्सिडी को भी इसी पोर्टल से जोड़ने का मकसद है कि किसानों को अलग-अलग जगह आवेदन करने की ज़रूरत न पड़े और पूरा रिकॉर्ड एक ही जगह उपलब्ध रहे।
छोटे विक्रेताओं को लाइसेंसिंग से छूट मिलने के पीछे तर्क यह है कि गांव-कस्बों में छोटी दुकानों पर जैविक खाद आसानी से और सही दाम पर मिल सके। अभी तक जैविक खाद बेचने के लिए दुकानदारों को भी वैसी ही लाइसेंसिंग प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था जैसी रासायनिक खाद के लिए होती है, जिससे छोटे विक्रेता अक्सर बाज़ार में उतरने से बचते थे।
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