पंजाब में अरहर पर फली छेदक कीट का हमला, किन्नू के बागों के लिए भी एडवाइजरी जारी
05 नवंबर 2026, चंडीगढ़: पंजाब में अरहर पर फली छेदक कीट का हमला, किन्नू के बागों के लिए भी एडवाइजरी जारी – पंजाब में अरहर की फसल पर फली छेदक कीट का हमला बढ़ने की आशंका है, जिसे लेकर कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सतर्क किया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग, मौसम केंद्र चंडीगढ़ की ओर से जारी बुलेटिन में बल्लोवाल सांकरी क्षेत्र के किसानों के लिए यह सलाह दी गई है। यह बुलेटिन 3 नवंबर को जारी हुआ और आने वाले दिनों के लिए वैध है।
फली छेदक से बचाव के लिए ये कीटनाशक कारगर
बुलेटिन के मुताबिक अरहर की फसल जब फूल और फली बनने की अवस्था में पहुंचती है, तब फली छेदक कीट का खतरा सबसे ज़्यादा रहता है। इससे बचाव के लिए किसान कोरोजन 18.5 एससी की 60 मिलीलीटर, फेम 480 एससी की 40 मिलीलीटर, किंगडोक्सा 14.5 एससी की 200 मिलीलीटर या ट्रेसर 45 एससी की 60 मिलीलीटर मात्रा प्रति एकड़ इस्तेमाल कर सकते हैं।
इन सभी दवाओं को 100 से 125 लीटर पानी में घोलकर हाथ से चलने वाले नैपसैक स्प्रेयर से छिड़काव करने की सलाह दी गई है। बुलेटिन में यह भी कहा गया है कि फली बनने की शुरुआत में या फलियां बनते समय ज़रूरत पड़ने पर छिड़काव दोहराया जा सकता है, ताकि कीट का असर पूरी तरह कम हो सके।
किन्नू के बागों में भी कीट नियंत्रण की सलाह
इसी बुलेटिन में पंजाब के किन्नू उत्पादक किसानों के लिए भी सलाह दी गई है। नींबू वर्गीय फसलों में कीट नियंत्रण और फल की गुणवत्ता सुधारने के लिए कॉन्फिडोर 17.8 एसएल की 200 मिलीलीटर मात्रा प्रति एकड़ 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव करने का सुझाव दिया गया है।
बुलेटिन में मक्का, बाजरा और मूंगफली जैसी फसलों के लिए भी सलाह दी गई है। मक्के में फॉल आर्मीवर्म और तना छेदक कीट के साथ-साथ बैंडेड लीफ व शीथ ब्लाइट रोग से बचाव पर ज़ोर दिया गया है, जबकि मूंगफली के खेतों में समय पर निराई करने की सलाह दी गई है। बाजरे की कटाई का सही समय चुनने को लेकर भी किसानों को जानकारी दी गई है।
पंजाब में अरहर की खेती सीमित क्षेत्र में होती है, लेकिन जो किसान इसे उगाते हैं उनके लिए फली छेदक कीट हर साल एक बड़ी चुनौती बन जाता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर फूल और फली बनने की अवस्था में समय पर कीटनाशक का छिड़काव कर दिया जाए, तो उपज में होने वाले नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
किसानों को सलाह दी गई है कि छिड़काव के दौरान सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल करें और दवा की मात्रा में किसी तरह की कमी-बढ़ोतरी न करें, ताकि नतीजे बेहतर मिल सकें। किन्नू जैसी नकदी फसल के लिए भी समय पर कीट नियंत्रण ज़रूरी है, क्योंकि फल की गुणवत्ता खराब होने पर बाज़ार में किसानों को सही भाव नहीं मिल पाता।
पंजाब का बल्लोवाल सांकरी क्षेत्र होशियारपुर के आसपास का कंडी इलाका है, जहां वर्षा आधारित खेती के साथ-साथ दलहन, मक्का और बागवानी फसलों की भी अच्छी खेती होती है। यहां के किसानों के लिए यह बुलेटिन खासतौर पर उपयोगी है, क्योंकि इसमें एक साथ कई फसलों के लिए मौसम और कीट-रोग दोनों की जानकारी दी गई है।
पंजाब देश में किन्नू उत्पादन के प्रमुख राज्यों में शामिल है, और यहां का किन्नू बाज़ार में अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर-दिसंबर के महीनों में किन्नू के फलों में रंग और मिठास आने की अवस्था होती है, इसलिए इस समय कीट नियंत्रण और उचित देखभाल का सीधा असर उपज की गुणवत्ता और किसानों की आय पर पड़ता है। बुलेटिन में किसानों को यह भी सलाह दी गई है कि वे मौसम के पूर्वानुमान पर नज़र रखते हुए ही छिड़काव का समय तय करें, ताकि बारिश या तेज़ हवा से दवा का असर कम न हो।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


