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राज्य कृषि समाचार (State News)

झारखंड की विनीता कुमारी: मत्स्य पालन में अकेली महिला थोक कारोबारी, हर महीने कमा रहीं 70 हज़ार रुपये

05 नवंबर 2026,  दुमका (झारखंड): झारखंड की विनीता कुमारी: मत्स्य पालन में अकेली महिला थोक कारोबारी, हर महीने कमा रहीं 70 हज़ार रुपये – झारखंड के दुमका जिले की विनीता कुमारी बीते कई सालों से मत्स्य पालन के कारोबार में हैं। वे अपने परिवार का मछली व्यवसाय संभाल रही हैं और राज्य में अकेली ऐसी महिला मानी जाती हैं जो मत्स्य व्यापार में थोक स्तर पर काम करती हैं। हर महीने औसतन 70 हज़ार रुपये तक की कमाई करने वाली विनीता आज क्षेत्र के 150 से 200 पुरुष कारोबारियों के बीच अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।

विनीता की ज़िंदगी आसान नहीं रही। 1994 में उनके पिता का निधन हो गया था, और इसके बाद परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी। बाद में उनके दोनों भाइयों का भी निधन हो गया, जिससे पूरे परिवार की ज़िम्मेदारी उन पर आ गई। शुरुआत में उन्होंने अपने पति से मत्स्य पालन का काम सीखा।

कोविड में पति को खोने के बाद खुद संभाला कारोबार

कोविड-19 महामारी के दौरान विनीता के पति का निधन हो गया। इसके बाद उन्होंने तालाबों की देखरेख, मछलियों की कटाई और बिक्री-विपणन की पूरी ज़िम्मेदारी खुद संभाल ली। वे बताती हैं कि एक महिला के तौर पर इस क्षेत्र में अकेले शुरुआत करना शुरुआत में आसान नहीं था।

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धीरे-धीरे विनीता ने अपने कारोबार का विस्तार किया। उन्होंने रोहू, कतला और मृगल जैसी देशी मीठे पानी की मछलियों के अलावा दक्षिण भारत से समुद्री मछली मंगाकर बेचना भी शुरू कर दिया। इस विविधीकरण से उनकी आय के स्रोत बढ़े और कारोबार को स्थिरता मिली।

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प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से मिली 4 लाख रुपये की अनुदान सहायता

विनीता के कारोबार को आगे बढ़ाने में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना ने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने इस योजना के तहत 10 लाख रुपये का ऋण लिया, जिसमें से 4 लाख रुपये अनुदान के रूप में मिले। इस प्रक्रिया में जिला मत्स्य पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार ने उनकी मदद की।

विनीता की आय में मौसम के हिसाब से उतार-चढ़ाव आता रहता है। पीक सीज़न में उनकी कमाई कई बार लाखों रुपये तक पहुंच जाती है, जबकि मंदी के दौर में यह 20 हज़ार रुपये तक गिर भी जाती है। इसके बावजूद औसतन वे हर महीने लगभग 70 हज़ार रुपये कमा लेती हैं।

झारखंड में मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य और केंद्र सरकार की कई योजनाएं चल रही हैं, जिनमें तालाब निर्माण, मछली बीज वितरण और मार्केटिंग सहायता शामिल है। दुमका और आसपास के ज़िलों में मीठे पानी की मछली पालन की अच्छी संभावनाएं हैं, लेकिन बाज़ार तक पहुंच और थोक कारोबार में महिलाओं की भागीदारी अब भी बहुत कम है।

विनीता जैसी महिला कारोबारियों की मौजूदगी इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए एक उदाहरण बन रही है। वे अब दूसरी महिलाओं को भी मत्स्य पालन के कारोबार से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करती हैं और कहती हैं कि मुश्किलें आएं तो भी हार नहीं मानना चाहिए। उनका अनुभव बताता है कि सही योजना और मेहनत से महिलाएं भी थोक मत्स्य कारोबार जैसे पुरुष-प्रधान क्षेत्र में अपनी मज़बूत जगह बना सकती हैं।

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत देशभर में मछली पालकों को तालाब निर्माण, मछली बीज, चारा, नाव और शीत भंडारण जैसी सुविधाओं के लिए अनुदान और सस्ती ऋण सुविधा दी जाती है। इसका मकसद मछली उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ इससे जुड़े रोज़गार के मौकों को भी बढ़ाना है। विनीता का अनुभव दिखाता है कि छोटे शहरों और कस्बों में भी इस योजना का सही इस्तेमाल करके कारोबार को बड़े स्तर पर खड़ा किया जा सकता है।

दुमका जैसे ज़िलों में मीठे पानी की मछली पालन की अच्छी परंपरा रही है, लेकिन पकड़ी या पाली गई मछली को बेहतर दाम पर बेचने के लिए बड़े बाज़ारों और थोक नेटवर्क तक पहुंच बनाना किसानों के लिए हमेशा आसान नहीं रहा। विनीता ने समुद्री मछली के कारोबार में हाथ आज़माकर इस चुनौती का एक समाधान खोजा, जिससे उनकी आय का दायरा सिर्फ स्थानीय मीठे पानी की मछली तक सीमित नहीं रहा। जिला मत्स्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विनीता जैसे कारोबारी अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का काम कर रहे हैं, और विभाग की ओर से उन्हें आगे भी तकनीकी व वित्तीय सहायता दी जाती रहेगी।

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