Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राज्य कृषि समाचार (State News)

राजस्थान में सरसों पर पेन्टेड बग का खतरा, चने में उकठा रोग से बचाव के लिए बीजोपचार की सलाह

05 नवंबर 2026, जयपुर: राजस्थान में सरसों पर पेन्टेड बग का खतरा, चने में उकठा रोग से बचाव के लिए बीजोपचार की सलाह – राजस्थान में सरसों की बुवाई के बाद अब कीट प्रकोप की आशंका ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग, मौसम केंद्र जयपुर की ग्रामीण कृषि मौसम सेवा योजना के तहत जारी ताज़ा बुलेटिन में सरसों के खेतों में पेन्टेड बग, आरा मक्खी और हीरक तितली जैसे कीटों से बचाव के उपाय बताए गए हैं। यह बुलेटिन 3 नवंबर को जारी हुआ और 7 नवंबर तक के लिए वैध है।

बुलेटिन के अनुसार सरसों के अंकुरण के 7 से 10 दिन के भीतर यह कीट सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं, इसलिए किसानों को इस दौरान खेतों पर खास नज़र रखने की सलाह दी गई है।

इन दवाओं से मिलेगा कीट से बचाव

पेन्टेड बग, आरा मक्खी और हीरक तितली से बचाव के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने तीन विकल्प सुझाए हैं। किसान मैलाथियॉन 5 प्रतिशत चूर्ण की 25 किलोग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर सुबह या शाम के समय भुरक सकते हैं। इसके अलावा मैलाथियॉन 50 ईसी की सवा लीटर यानी 1.25 लीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। डाईमेथोएट 30 ईसी का इस्तेमाल करने वाले किसान 875 मिलीलीटर प्रति हेक्टेयर की दर से घोल बनाकर छिड़काव कर सकते हैं।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

वैज्ञानिकों का कहना है कि शुरुआती अवस्था में ही कीट नियंत्रण कर लेने से सरसों की फसल को होने वाला नुकसान काफी हद तक कम किया जा सकता है। किसानों को सलाह दी गई है कि छिड़काव करते समय मौसम साफ हो और हवा तेज़ न चल रही हो, ताकि दवा का असर अच्छी तरह हो सके।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

चने में उकठा रोग से बचाव के लिए बीजोपचार ज़रूरी

इसी बुलेटिन में चने की फसल को उकठा यानी विल्ट रोग से बचाने के लिए बुवाई से पहले बीजोपचार करने की सलाह दी गई है। इसके लिए कार्बेन्डाजिम 50 डब्ल्यूपी की 1 ग्राम और थायरम 75 डब्ल्यूपी की 2.5 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से इस्तेमाल करने की सिफारिश की गई है।

उकठा रोग चने की फसल में मिट्टी के ज़रिए फैलता है और अगर समय पर नियंत्रण न किया जाए तो पूरी फसल को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। बीजोपचार इस रोग से बचाव का सबसे असरदार और सस्ता तरीका माना जाता है, क्योंकि इसमें बुवाई के बाद अलग से दवा छिड़कने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

बुलेटिन में यह भी बताया गया है कि खरपतवार नियंत्रण के लिए चने में पेन्डीमेथालिन 38.7 सीएस या 30 ईसी की लगभग 1,938 से 2,500 मिलीलीटर मात्रा प्रति हेक्टेयर 500 लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है, जिससे फसल को शुरुआती अवस्था में ही स्वस्थ रखा जा सके। राजस्थान में सरसों और चना रबी सीज़न की दो प्रमुख फसलें हैं, जिन पर लाखों किसानों की आय निर्भर करती है।

बुलेटिन में यह भी सुझाव दिया गया है कि गेहूं की फसल में नग्न कंडुआ और पत्ती कंडुआ जैसे बीजजनित रोगों से बचाव के लिए बुवाई से पहले कार्बोक्सिन या कार्बेन्डाजिम की 2 ग्राम मात्रा प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से बीजोपचार किया जाए। इससे किसान एक साथ कई फसलों में होने वाले नुकसान को शुरुआत में ही रोक सकते हैं।

राजस्थान में सरसों की खेती सबसे ज्यादा जोधपुर, श्रीगंगानगर, बीकानेर, सीकर, जयपुर, भरतपुर, उदयपुर और बांसवाड़ा समेत कई ज़िलों में होती है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय पर सही सलाह और दवा का इस्तेमाल करने से किसान कीट-रोगों से होने वाले नुकसान को काफी हद तक टाल सकते हैं। किसानों को यह भी सुझाव दिया गया है कि वे नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि पर्यवेक्षक से संपर्क कर अपने क्षेत्र के हिसाब से सही सलाह लें, क्योंकि कीट प्रकोप की तीव्रता जगह-जगह अलग हो सकती है। बुलेटिन में आगे पांच से बारह नवंबर तक के विस्तारित मौसम पूर्वानुमान का भी ज़िक्र है, जिसके आधार पर किसान अपने छिड़काव और सिंचाई का समय तय कर सकते हैं।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture