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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

सूखा, चक्रवात और बेमौसम बारिश से निपटने के लिए केंद्र ने मांगी ठोस रणनीति

04 नवंबर 2026, नई दिल्ली: सूखा, चक्रवात और बेमौसम बारिश से निपटने के लिए केंद्र ने मांगी ठोस रणनीति – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर सूखा, चक्रवात और बेमौसम बारिश से निपटने के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करने का निर्देश दिया। बैठक में खरीफ फसलों की कटाई और आगामी रबी सीजन की बुवाई की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई।

बैठक में कृषि सचिव अतीश चंद्र समेत मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। चौहान ने अधिकारियों से कहा कि किसानों के हित में एक ठोस रणनीति तैयार की जाए और उनकी परेशानियों को पूरी संवेदनशीलता के साथ समझा जाए, ताकि राहत कार्यों में किसी तरह की प्रक्रियागत देरी न हो।

खरीफ कटाई लगभग पूरी, रबी बुवाई पर ज़ोर

समीक्षा में बताया गया कि देशभर में खरीफ फसलों की कटाई जारी है और मूंग तथा सोयाबीन की कटाई लगभग पूरी होने वाली है। मंत्री ने निर्देश दिया कि कटाई के तुरंत बाद खेतों में बची नमी का उपयोग करते हुए रबी बुवाई में तेज़ी लाई जाए।

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सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में किसानों को चना, सरसों, मसूर और मोटे अनाज जैसी कम पानी व कम लागत वाली फसलों के लिए प्रोत्साहित करने को कहा गया है। इसके साथ ही वैज्ञानिकों द्वारा विकसित जलवायु-अनुकूल और गर्मी-सहनशील बीज किसानों तक पहुंचाने का निर्देश भी दिया गया।

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समीक्षा के दौरान बताया गया कि यूरिया, डीएपी, एमओपी और एनपीके खादों के साथ प्रमाणित बीजों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। राज्यों के साथ समन्वय करते हुए जिला स्तर तक आपूर्ति सुचारू रखी जा रही है। मंडियों में धान, गेहूं, मक्का, चना, मसूर, अरहर, सोयाबीन और सरसों के भाव एमएसपी से काफी ऊपर बताए गए हैं।

सूखा-प्रभावित राज्यों और बीमा दावों पर निर्देश

बैठक में कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के सूखा-प्रभावित किसानों के साथ-साथ अतिरिक्त बारिश और बाढ़ से प्रभावित किसानों के लिए राहत कार्य तेज़ करने पर भी चर्चा हुई। मंत्री ने अधिकारियों को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष के तहत नुकसान का आकलन प्राथमिकता से पूरा करने और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के दावों का निपटारा जल्द से जल्द करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को समय पर वित्तीय सहायता मिल सके।

चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हर किसान के साथ मज़बूती से खड़ी है। उन्होंने यह भी बताया कि वे स्वयं हर सप्ताह स्थिति की समीक्षा करेंगे और ज़रूरत पड़ने पर राज्य सरकारों तथा मुख्यमंत्रियों से सीधे बात करेंगे, ताकि सूखा, चक्रवात और अनियमित बारिश जैसी मौसमी चुनौतियों से किसानों को कम से कम नुकसान हो।

मंत्रालय के अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि आकस्मिक कार्य योजना के तहत आने वाले दिनों में संभावित चक्रवाती बारिश से मिलने वाली मिट्टी की नमी का रबी बुवाई में पूरा उपयोग किया जाए, ताकि मौसम की अनिश्चितता का असर बुवाई के रकबे पर कम से कम पड़े। कृषि मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, रबी सीजन में बुवाई की रफ्तार और समय पर बीज-खाद की उपलब्धता दोनों पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है, जिससे किसी भी राज्य में आपूर्ति की कमी न रहे।

कृषि क्षेत्र के जानकारों के मुताबिक मूंग और सोयाबीन की कटाई का यह अंतिम दौर इस साल सामान्य से थोड़ी देरी से चल रहा है, क्योंकि कई हिस्सों में अक्टूबर के आखिर में हुई बेमौसम बारिश ने कटाई के काम को कुछ दिन रोक दिया था। ऐसे में मंत्रालय का मानना है कि रबी की बुवाई समय पर शुरू कराना इस साल की सबसे बड़ी प्राथमिकता है, क्योंकि देरी से चना, सरसों और गेहूं जैसी मुख्य फसलों की उत्पादकता पर असर पड़ सकता है।

बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि फसल बीमा दावों के निपटारे में देरी किसानों के लिए सबसे बड़ी शिकायत रही है, इसलिए राज्यों से समन्वय करते हुए दावा निपटान की प्रक्रिया को और तेज़ बनाने पर काम किया जाएगा। मंत्रालय के अधिकारियों को आगामी हफ्तों में हर राज्य से कटाई और बुवाई की साप्ताहिक रिपोर्ट भेजने का भी निर्देश दिया गया है, जिससे केंद्र स्तर पर स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा सके।

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