अगले दशक में भारत का मक्का उत्पादन 7.5 करोड़ टन करने का लक्ष्य
03 नवंबर 2026, नई दिल्ली: अगले दशक में भारत का मक्का उत्पादन 7.5 करोड़ टन करने का लक्ष्य – भारत ने अगले दशक में मक्का उत्पादन को बढ़ाकर 7.5 करोड़ टन तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए फसल उत्पादकता में वृद्धि, उन्नत प्रजनन तकनीकों, मजबूत बीज प्रणाली और किसान-केंद्रित अनुसंधान को प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। यह बात 2 नवंबर को हैदराबाद में शुरू हुए प्रथम अंतरराष्ट्रीय मक्का सम्मेलन 2026 में सामने आई।
‘बदलती दुनिया में खाद्य, चारा, पशु आहार, ईंधन और सततता के लिए मक्का क्रांति’ (M4FS) विषय पर आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिक, नीति निर्माता, कृषि संस्थानों और उद्योग जगत के प्रतिनिधि मक्का अनुसंधान, उत्पादन और मूल्य श्रृंखला के विकास की रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने बताया कि भारत का मक्का उत्पादन लगभग 5.5 करोड़ टन तक पहुंच गया है। पिछले एक दशक में उत्पादन के साथ-साथ उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने अगले दस वर्षों में उत्पादन को 7.5 करोड़ टन तक पहुंचाने और उत्पादकता में 1.5 गुना वृद्धि करने का लक्ष्य सामने रखा। इसके लिए तकनीकी नवाचार, बेहतर फसल प्रबंधन और संसाधनों के कुशल उपयोग को महत्वपूर्ण बताया।
डॉ. जाट ने मक्का के पारंपरिक 4F दृष्टिकोण—Food (खाद्य), Feed (पशु आहार), Fodder (चारा) और Fuel (ईंधन)—को विस्तार देते हुए इसमें Farmers (किसानों) को शामिल कर 5F दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि अनुसंधान और विस्तार सेवाओं का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए, जिससे उनकी आय और लाभप्रदता में सुधार हो सके।
उन्होंने फसल की उत्पादकता में अंतर को कम करने के लिए समग्र वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया। विशेष रूप से फसल प्रबंधन से जुड़ी कमियों को दूर करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों और मौसमों के अनुरूप मक्का की खेती के विस्तार की वकालत की, लेकिन साथ ही तिलहन और दलहन जैसी महत्वपूर्ण फसलों के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ने देने की बात कही। उन्होंने किसानों को किफायती और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने, विशेषकर सार्वजनिक क्षेत्र के हाइब्रिड बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए मजबूत बीज प्रणाली विकसित करने पर भी जोर दिया।
उन्नत प्रजनन और बीज प्रणाली को मजबूत करने पर जोर
ICAR के उप महानिदेशक (फसल विज्ञान) डॉ. डी. के. यादव ने मक्का को खाद्य, पोषण और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण फसल बताया। उन्होंने पिछले पांच वर्षों में मक्का अनुसंधान और विस्तार के क्षेत्र में हुई प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि इस अवधि में 329 मक्का हाइब्रिड विकसित किए गए हैं। उन्होंने अखिल भारतीय समन्वित मक्का अनुसंधान परियोजना (AICRP on Maize) को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
डॉ. यादव ने अधिक उत्पादन क्षमता, बेहतर पोषण गुणवत्ता तथा जैविक और अजैविक तनावों के प्रति सहनशीलता विकसित करने के उद्देश्य से प्रजनन कार्यक्रमों को गति देने पर जोर दिया। इसके साथ ही कृषि आदानों के कुशल उपयोग, मशीनीकरण, क्षमता विकास और सार्वजनिक क्षेत्र में हाइब्रिड बीज उत्पादन बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
उन्होंने इथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल के रूप में मक्का की क्षमता का पूरा लाभ उठाने हेतु अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों और उद्योग जगत के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया।
प्रख्यात मक्का वैज्ञानिक एवं CIMMYT से जुड़े विश्व खाद्य पुरस्कार विजेता पद्मश्री डॉ. एस. वासल ने किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप उन्नत किस्में और हाइब्रिड विकसित करने के लिए सरल एवं कम लागत वाली प्रजनन तकनीकों को अपनाने की वकालत की।
अनुसंधान प्राथमिकताओं और मूल्य श्रृंखला के विकास पर जोर
सम्मेलन के मुख्य अतिथि, DARE के पूर्व सचिव एवं ICAR के पूर्व महानिदेशक पद्मभूषण डॉ. आर. एस. परोदा ने कृषि और संबद्ध क्षेत्रों की बदलती जरूरतों के अनुरूप अनुसंधान प्राथमिकताएं निर्धारित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने उन्नत प्रजनन तकनीकों के व्यापक उपयोग, आनुवंशिक संसाधनों के व्यवस्थित संरक्षण एवं उपयोग, मक्का की मजबूत मूल्य श्रृंखला विकसित करने और अफ्लाटॉक्सिन के प्रभावी प्रबंधन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि खाद्य और पशु आहार के रूप में मक्का की सुरक्षा एवं गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है।
इससे पहले, मक्का प्रौद्योगिकीविद संघ (MTAI) के अध्यक्ष डॉ. एच. एस. जाट ने अतिथियों का स्वागत किया और भारत के कृषि परिवर्तन में मक्का की रणनीतिक भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने उभरती चुनौतियों से निपटने और मक्का क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए अनुसंधान संस्थानों, कृषि विश्वविद्यालयों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम के दौरान कई वैज्ञानिक प्रकाशनों का विमोचन किया गया। साथ ही मक्का अनुसंधान एवं विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया।
2 से 4 नवंबर 2026 तक हैदराबाद में आयोजित यह सम्मेलन अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों एवं हाइब्रिड, पोषण गुणवत्ता में सुधार, संसाधनों के कुशल उपयोग, मशीनीकरण और मजबूत बीज प्रणाली जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित है। सम्मेलन में खाद्य, पशु आहार, चारा और ऊर्जा सुरक्षा में मक्का की बढ़ती भूमिका पर भी चर्चा हो रही है।
सम्मेलन का उद्देश्य विभिन्न देशों के विशेषज्ञों और हितधारकों के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर उत्पादकता में सुधार, उपज के अंतर को कम करने, किसानों तक गुणवत्तापूर्ण बीजों की पहुंच बढ़ाने और भारत में टिकाऊ एवं आर्थिक रूप से मजबूत मक्का मूल्य श्रृंखला विकसित करने के लिए एक साझा रोडमैप तैयार करना है।
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