नवंबर में 13 लाख टन चीनी बिक्री कोटा, मिलों को अतिरिक्त छूट भी
03 नवंबर 2026, नई दिल्ली: नवंबर में 13 लाख टन चीनी बिक्री कोटा, मिलों को अतिरिक्त छूट भी – केंद्र सरकार ने नवंबर महीने के पहले पखवाड़े, यानी 1 से 15 नवंबर तक, घरेलू बाजार में बिक्री के लिए 13 लाख मीट्रिक टन चीनी का कोटा तय किया है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने यह आदेश 30 अक्टूबर को जारी किया।
अगले ही दिन, 31 अक्टूबर को विभाग ने मिलों को एक और राहत दी। अक्टूबर और नवंबर में पेराई शुरू करने वाली मिलें अब तय कोटे से ऊपर भी 15 नवंबर तक बनी चीनी बेच सकेंगी।
यह कोटा देश की 587 चीनी मिलों के लिए है। महाराष्ट्र को सबसे ज्यादा लगभग 4.77 लाख टन मिला है। उत्तर प्रदेश को 4.17 लाख टन और कर्नाटक को 2.63 लाख टन का हिस्सा दिया गया है। बाकी राज्यों में करीब 1.4 लाख टन बांटा गया है।
अक्टूबर में कुल कोटा 30 लाख टन था, जो दो पखवाड़ों (14 और 16 लाख टन) में बंटा था। सितंबर में यह आंकड़ा 26.5 लाख टन था। यानी सरकार हर पखवाड़े बाजार में ज्यादा चीनी भेज रही है।
गन्ना किसानों का आंदोलन तेज
यह कोटा ऐसे समय तय हुआ है जब महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ना किसान सड़कों पर हैं। स्वाभिमानी शेतकरी संगठन ने 27 अक्टूबर से “चवनी आंदोलन” शुरू किया और मिलों तक जाने वाले सैकड़ों ट्रैक्टर-बैलगाड़ी रोक दिए।
किसानों की मांग है कि उन्हें पहली किस्त के रूप में प्रति टन 4,500 रुपये दिए जाएं। संगठन ने चेतावनी दी है कि 3 नवंबर को राष्ट्रीय राजमार्ग भी जाम किए जा सकते हैं।
कर्नाटक में किसान गन्ने का दाम प्रति टन 5,500 रुपये मांग रहे हैं, जबकि तय FRP सिर्फ 3,650 रुपये है। वहां बंद बुलाया गया और मिलों को जाने वाली सड़कें रोकी गईं। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि कटाई में देरी से गन्ने में रस की मात्रा घटती है और आग लगने का खतरा भी बढ़ता है।
उत्तर प्रदेश में मिलें दिवाली के बाद ही पूरी क्षमता से पेराई शुरू करेंगी। इस सीजन की शुरुआत में बचा हुआ स्टॉक करीब 36 लाख टन था, जो पिछले कई वर्षों में सबसे कम माना जा रहा है। महाराष्ट्र में एक्स-मिल भाव करीब 5,200 रुपये प्रति क्विंटल और उत्तर प्रदेश में 5,600-5,700 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं।
समिति और एथनॉल पर रोक
किसानों के असंतोष के बीच केंद्र सरकार ने 14 अक्टूबर को पूर्व नीति आयोग सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद की अध्यक्षता में चार सदस्यीय समिति बनाई थी। इसमें कृषि मंत्रालय के कृषि आयुक्त, खाद्य विभाग में चीनी के संयुक्त सचिव और उपभोक्ता मामलों के विभाग में लीगल मेट्रोलॉजी के संयुक्त सचिव शामिल हैं।
यह समिति गन्ना किसानों को मिलने वाले दाम, चीनी की न्यूनतम बिक्री मूल्य, रिकवरी जांच की पारदर्शिता और मिलों में तौल की सही प्रक्रिया पर सुझाव देगी। समिति किसान संगठनों, मिल संघों और राज्य सरकारों से बात करेगी और जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपेगी। उम्मीद है कि यह दिवाली से पहले अपनी राय दे देगी और 4 नवंबर को महाराष्ट्र का दौरा भी कर सकती है।
इसके साथ ही सरकारी तेल कंपनियों ने नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक की सप्लाई अवधि के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। इस दौरान एथनॉल बनाने में गन्ने के रस, चीनी सिरप और बी-हैवी मोलासेस का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। इसके बजाय मक्का, टूटा चावल, खराब अनाज और एफसीआई के अतिरिक्त चावल से एथनॉल बनाना होगा।
इसका मकसद कम बारिश और देरी से हो रही पेराई के बीच घरेलू चीनी भंडार को सुरक्षित रखना है, ताकि आम उपभोक्ता तक चीनी की सप्लाई बनी रहे। हालांकि गन्ना किसानों की मुख्य मांग, यानी ऊंची कीमत, अभी भी अनसुलझी है और उनका आंदोलन जारी है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture


