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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

सिक्किम में देसी गाय-बैल की नस्ल के संरक्षण के लिए बनेगा उत्कृष्टता केंद्र, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन ने की घोषणा

04 नवंबर 2026, नई दिल्ली: सिक्किम में देसी गाय-बैल की नस्ल के संरक्षण के लिए बनेगा उत्कृष्टता केंद्र, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन ने की घोषणा – केंद्र सरकार सिक्किम में देसी गाय-बैल की सिरी नस्ल के संरक्षण और विकास के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करेगी। केंद्रीय मत्स्यपालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह ने 2 से 3 नवंबर 2026 तक सिक्किम के दो दिवसीय दौरे के दौरान यह घोषणा की। इस दौरान उन्होंने राज्य में डेयरी विकास, देसी पशु नस्लों के संरक्षण, पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने और किसानों व पशुपालकों की आय के अवसरों को मजबूत करने से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा की।

सिरी नस्ल के संरक्षण के लिए बनेगा उत्कृष्टता केंद्र

केंद्रीय मंत्री ने सिरी मवेशियों के संरक्षण और विकास के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसमें नस्ल सुधार, आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण और वैज्ञानिक प्रजनन पद्धतियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने बेहतर आनुवंशिक गुणों वाले पशुओं की संख्या बढ़ाने और नस्ल सुधार में तेजी लाने के लिए इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) तकनीक लागू करने की कार्ययोजना तैयार करने पर भी जोर दिया।

मंत्री ने ऑनलाइन माध्यम से सिरी मवेशी संरक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की। इस पहल का उद्देश्य सिरी गाय-बैल की देसी नस्ल को संरक्षित करना, उसके मूल्यवान आनुवंशिक संसाधनों को बचाना और वैज्ञानिक प्रजनन पद्धतियों को बढ़ावा देना है। इसके अलावा, केंद्रीय मंत्री ने पाकयोंग जिले के चुचाचेन में सिरी बुल मदर फार्म की आधारशिला भी ऑनलाइन माध्यम से रखी। इस फार्म के जरिए देसी सिरी नस्ल के संरक्षण, आनुवंशिक सुधार और बेहतर गुणवत्ता वाले प्रजनन संसाधनों को विकसित करने में मदद मिलेगी।

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उत्तर सिक्किम में डेयरी सहकारी नेटवर्क का होगा विस्तार

दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने मंगन में उत्तर जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड (NDMU) का ऑनलाइन शुभारंभ किया। श्वेत क्रांति 2.0 के तहत शुरू की गई यह पहल उत्तर सिक्किम में डेयरी सहकारी नेटवर्क को मजबूत करने और संगठित डेयरी गतिविधियों का विस्तार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे अधिक डेयरी किसानों को सहकारी नेटवर्क से जोड़ने और डेयरी क्षेत्र के विकास के लिए संस्थागत सहायता मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय मंत्री ने इस पहल के सफल क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) को व्यापक योजना तैयार करने का सुझाव दिया। इसमें डेयरी प्लांट का आधुनिकीकरण, दुग्ध सहकारी समितियों के नेटवर्क का विस्तार और ‘सिक्किम मिल्क’ नाम से एकीकृत ब्रांड विकसित करना शामिल है। इसका उद्देश्य राज्य में डेयरी क्षेत्र का सतत विकास करना और स्थानीय दुग्ध उत्पादकों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

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सुअर पालन में आधुनिक प्रजनन तकनीक को मिलेगा बढ़ावा

केंद्रीय मंत्री ने सुअरों में तरल वीर्य के उपयोग से कृत्रिम गर्भाधान के लिए वीर्य उत्पादन संबंधी न्यूनतम मानक प्रोटोकॉल और मानक संचालन प्रक्रियाओं की भी शुरुआत की। इन प्रोटोकॉल के माध्यम से सुअरों में वीर्य उत्पादन और कृत्रिम गर्भाधान के लिए एक मानकीकृत व्यवस्था विकसित की जाएगी। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक प्रजनन पद्धतियों को बढ़ावा देना, पशुओं की आनुवंशिक गुणवत्ता में सुधार करना और उत्पादकता बढ़ाना है। इसके अलावा, इन उपायों से जैव-सुरक्षा मजबूत करने और कृत्रिम गर्भाधान तकनीक के इस्तेमाल का विस्तार करने में मदद मिलेगी। इससे पशुओं में प्रजनन क्षमता बेहतर होने, बीमारियों के प्रसार का जोखिम कम होने और किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में सुअर पालन ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इस पहल को विशेष रूप से उपयोगी माना जा रहा है।

किसानों और पशुपालकों की आजीविका बढ़ाने पर जोर

अपने दौरे के दौरान केंद्रीय मंत्री ने टिंगडा सरकारी प्राथमिक विद्यालय का दौरा कर विद्यार्थियों से बातचीत की और उन्हें शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने रामथांग प्राथमिक स्वास्थ्य उप-केंद्र और वेलनेस सेंटर का निरीक्षण कर वहां उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा भी लिया। उन्होंने सिरी गाय-बैल और उनसे बने मूल्यवर्धित उत्पादों की प्रदर्शनी देखी तथा किसानों से बातचीत की। इस दौरान उन्होंने देसी पशु नस्लों के संरक्षण और पशुधन आधारित आजीविका के अवसरों की जानकारी ली। उन्होंने डेयरी एवं पशुपालन उत्पादों और स्थानीय स्तर पर उगाई गई जैविक सब्जियों के स्टॉलों का भी निरीक्षण किया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डेयरी और पशुधन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए देसी नस्लों का संरक्षण, आधुनिक प्रजनन तकनीकों का उपयोग, डेयरी बुनियादी ढांचे का विकास और सहकारी व्यवस्था को बढ़ावा देना जरूरी है। इन प्रयासों से पशुधन की उत्पादकता बढ़ाने के साथ किसानों और पशुपालकों के लिए आजीविका के स्थायी अवसर तैयार किए जा सकेंगे।

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