खेतों में नमी कम, रबी की बुआई की रफ्तार हुई सुस्तपिछले साल के मुकाबले आधे से भी कम क्षेत्र में हुई बुआई
मिट्टी में नमी की कमी बनी चिंता का कारण
05 नवंबर 2026, भोपाल: खेतों में नमी कम, रबी की बुआई की रफ्तार हुई सुस्तपिछले साल के मुकाबले आधे से भी कम क्षेत्र में हुई बुआई – देश में रबी फसलों की बुआई की रफ्तार इस बार पिछले वर्ष की तुलना में काफी धीमी बनी हुई है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की 30 अक्टूबर 2026 तक की साप्ताहिक रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में अब तक कुल 37.56 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुआई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 69.02 लाख हेक्टेयर में बुआई पूरी हो चुकी थी। इस तरह पिछले साल की तुलना में इस बार बुआई का क्षेत्र काफी पीछे है। कमजोर मानसून और मिट्टी में नमी की कमी को इसके प्रमुख कारणों में माना जा रहा है।
सरसों की बुआई सबसे आगे
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, तिलहन फसलों की बुआई 20.97 लाख हेक्टेयर में हुई है। इसमें अकेले सरसों और अन्य संबंधित फसलों का क्षेत्र 20.50 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। मूंगफली की बुआई 0.25 लाख हेक्टेयर में हुई है। दलहन फसलों का कुल रकबा 9.45 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा है। इसमें चना 5.90 लाख हेक्टेयर, मसूर 1.10 लाख हेक्टेयर, मटर 1.26 लाख हेक्टेयर और उड़द 0.29 लाख हेक्टेयर में बोई गई है।
मोटे अनाजों की बुआई 3.78 लाख हेक्टेयर में हुई है। इसमें ज्वार का क्षेत्र 2.71 लाख हेक्टेयर, मक्का 0.78 लाख हेक्टेयर और रागी 0.27 लाख हेक्टेयर है। वहीं धान की बुआई 3.16 लाख हेक्टेयर में दर्ज की गई है।
गेहूं की बुआई अभी शुरुआती दौर में
रबी की सबसे प्रमुख फसल गेहूं की बुआई अभी बेहद कम क्षेत्र में हुई है। 30 अक्टूबर तक गेहूं का रकबा केवल 0.19 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है। इसके पहले 23 अक्टूबर तक यह आंकड़ा 0.11 लाख हेक्टेयर था, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 0.27 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया जा चुका था। मंत्रालय के अनुसार, कुछ राज्यों में गेहूं की बुआई अभी शुरू ही हुई है। इसलिए आने वाले सप्ताह में इसमें तेजी आने की संभावना है।
कमजोर मानसून से बढ़ी किसानों की चिंता
इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान सामान्य से 13 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। इसका असर अब रबी फसलों की तैयारी पर दिखाई देने लगा है। बारिश कम होने के कारण खेतों की मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं है। साथ ही जलाशयों और नहरों में भी पानी का स्तर प्रभावित हुआ है।
गेहूं की फसल को बेहतर उत्पादन के लिए समय-समय पर सिंचाई की आवश्यकता होती है। ऐसे में पानी की कमी के कारण किसानों को बुआई में देरी करनी पड़ सकती है। इसका असर कुल बोवनी क्षेत्र और उत्पादन पर भी पड़ने की आशंका है।
गौरतलब है कि वर्ष 2025-26 में देश में लगभग 336 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की खेती हुई थी और उत्पादन 120.7 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था। केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए 121 मिलियन टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब कृषि मंत्रालय और फसल मौसम निगरानी समूह की नजर आगामी सप्ताहों में बुआई की रफ्तार और मौसम की परिस्थितियों पर बनी हुई है। किसानों के लिए समय पर सिंचाई की उपलब्धता और खेतों में नमी बनाए रखना इस रबी मौसम की बड़ी चुनौती होगी।
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