राज्य कृषि समाचार (State News)

विदिशा के 70 किसानों ने सीखी आधुनिक खेती की तकनीक, मृदा स्वास्थ्य से कार्बन क्रेडिट तक वैज्ञानिकों ने दिया प्रशिक्षण

21 अगस्त 2026, विदिशा: विदिशा के 70 किसानों ने सीखी आधुनिक खेती की तकनीक, मृदा स्वास्थ्य से कार्बन क्रेडिट तक वैज्ञानिकों ने दिया प्रशिक्षण – मध्यप्रदेश के विदिशा जिले के विकासखंड विदिशा और गंजबासौदा से पहुंचे करीब 70 किसानों को आईसीएआर-भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान, भोपाल में आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में किसानों को मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित पोषक तत्व उपयोग, प्राकृतिक खेती, फसल अवशेष प्रबंधन और कार्बन क्रेडिट से जुड़ी जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य किसानों को खेती की लागत कम करने, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और उत्पादन व आय बढ़ाने के लिए व्यावहारिक तकनीकों से जोड़ना रहा।

मृदा परीक्षण और संतुलित खाद प्रबंधन की जानकारी

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने किसानों को मृदा परीक्षण, पोषक तत्वों की उपलब्धता और एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) के महत्व के बारे में बताया। किसानों को समझाया गया कि खेत की मिट्टी की जांच के बाद उसकी आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरकों का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे अनावश्यक उर्वरक उपयोग और खेती की लागत कम करने के साथ मृदा की उर्वरता व फसल उत्पादन क्षमता को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद मिलेगी।

किसानों को फसल विविधीकरण, खेत समतलीकरण और नरवाई प्रबंधन की जानकारी भी दी गई। विशेषज्ञों ने फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन को मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण के लिए जरूरी बताया और नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान के बारे में समझाया।

लाइव डेमो से समझी आधुनिक तकनीक

प्रशिक्षण के तहत किसानों को संस्थान के विभिन्न लाइव डेमो प्लॉट और फील्ड क्षेत्रों का भ्रमण कराया गया। यहां उन्होंने उन्नत कृषि तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा और वैज्ञानिकों से खेती की आधुनिक पद्धतियों की जानकारी ली। किसानों को वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने के साथ प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले जीवामृत, नीमास्त्र और अग्निअस्त्र तैयार करने व उनके उपयोग का व्यावहारिक प्रदर्शन भी कराया गया। विभिन्न फसलों में रोग प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य सुधार के वैज्ञानिक उपायों की जानकारी दी गई।

कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त आय की संभावनाएं

प्रशिक्षण में कार्बन क्रेडिट और कार्बन आधारित कृषि पद्धतियों पर भी जानकारी दी गई। किसानों को बताया गया कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन, मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने और पर्यावरण अनुकूल कृषि पद्धतियां अपनाने से कार्बन उत्सर्जन कम करने में योगदान दिया जा सकता है।

किसानों को बताया गया कि निर्धारित प्रक्रियाओं और संबंधित कार्बन परियोजनाओं के माध्यम से टिकाऊ कृषि पद्धतियां अपनाने वाले किसानों के लिए भविष्य में कार्बन क्रेडिट से अतिरिक्त आय के अवसर विकसित हो सकते हैं। इस विषय पर विशेष ‘कार्बन पाठशाला’ भी आयोजित की गई।

सोयाबीन की उन्नत खेती का किया अवलोकन

भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान के लाइव डेमो प्लॉट में किसानों ने विभिन्न फसलों और उन्नत किस्मों का अवलोकन किया। उन्होंने सोयाबीन की उन्नत खेती सहित विभिन्न कृषि तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से देखा। वैज्ञानिकों ने कम लागत में बेहतर उत्पादन लेने और मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए संतुलित मात्रा में उर्वरकों के इस्तेमाल की जानकारी दी। किसानों ने वैज्ञानिकों से खेती से जुड़ी अपनी समस्याओं और जिज्ञासाओं पर चर्चा की तथा नई तकनीकों को खेतों में अपनाने के संबंध में मार्गदर्शन लिया।

वैज्ञानिकों ने किसानों को दिया मार्गदर्शन

कार्यक्रम में जनपद सदस्य राम गोड़, दीपक कुशवाहा सहित विदिशा और गंजबासौदा विकासखंड के प्रगतिशील किसान शामिल हुए। किसानों ने संस्थान के वैज्ञानिकों से संवाद कर आधुनिक तकनीकों को समझने में रुचि दिखाई। इस अवसर पर भारतीय मृदा विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. मनोरंजन मोहंती सहित डॉ. संगीता लेंका, डॉ. बी.पी. मीना, डॉ. एन.के. लेंका, डॉ. निशांत सिन्हा, डॉ. वसंधा, डॉ. जे.के. ठाकुर, श्री तपन अधिकारी और डॉ. ज्योति सहित वैज्ञानिक एवं विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने बताया कि लाइव डेमो और फील्ड विजिट से उन्हें आधुनिक कृषि तकनीकों को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिला। मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक उपयोग, प्राकृतिक खेती, फसल अवशेष प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य सुधार जैसी तकनीकों से खेती की लागत कम करने और उत्पादन व आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है। यह प्रशिक्षण किसानों को टिकाऊ, पर्यावरण अनुकूल और लाभकारी खेती की दिशा में आगे बढ़ाने वाली पहल साबित हुआ।

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