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राज्य कृषि समाचार (State News)

एक ही खेत में उगा रहे 10 से ज्यादा फसलें, इंटीग्रेटेड फार्मिंग ने बदली पांढुर्ना के किसान की किस्मत; अब सालभर हो रही अच्छी कमाई

17 जुलाई 2026, भोपाल: एक ही खेत में उगा रहे 10 से ज्यादा फसलें, इंटीग्रेटेड फार्मिंग ने बदली पांढुर्ना के किसान की किस्मत; अब सालभर हो रही अच्छी कमाई – खेती में लगातार बढ़ती लागत और मौसम की अनिश्चितता के बीच मध्य प्रदेश के पांढुर्ना जिले के एक प्रगतिशील किसान ने समन्वित (इंटीग्रेटेड) फार्मिंग अपनाकर सफलता की नई मिसाल पेश की है। एक ही खेत में 10 से अधिक फसलों की खेती, बागवानी, पशुपालन और जल संरक्षण को जोड़कर उन्होंने ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिससे उन्हें पूरे साल नियमित आय हो रही है। यही वजह है कि कृषि विभाग भी इस मॉडल को जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायक मान रहा है।

इसी उद्देश्य से कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ के मार्गदर्शन में गुरुवार को उप संचालक कृषि मोरिस नाथ, परियोजना संचालक  धीरज ठाकुर और कृषि विभाग के अधिकारियों ने प्रगतिशील किसान डॉ. सुरेंद्र पन्नासे के कृषि प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने खेत में अपनाई जा रही आधुनिक तकनीकों, फसल विविधीकरण और समन्वित खेती के मॉडल का अवलोकन किया।

एक ही खेत में 10 से ज्यादा फसलों की खेती

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने पाया कि डॉ. सुरेंद्र पन्नासे अपने खेत में संतरा, अमरूद, आम, सीताफल, मौसंबी, चकोतरा और नींबू जैसे फलदार पौधों के साथ मक्का, अरहर, कपास और बरबटी जैसी फसलों की खेती कर रहे हैं। खेती के साथ पशुपालन को भी जोड़ा गया है, जिससे उन्हें दूध के साथ गोबर और गोमूत्र भी प्राप्त हो रहा है। इनका उपयोग जैविक खेती और खेत की उर्वरता बढ़ाने में किया जा रहा है।

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जल संरक्षण से सिंचाई की बेहतर व्यवस्था

डॉ. पन्नासे ने अपने खेत में जल संरक्षण के लिए खेत तालाब का निर्माण भी कराया है। इसी तालाब के पानी से फसलों की सिंचाई की जाती है। इससे पानी की उपलब्धता सुनिश्चित होने के साथ-साथ सूखे जैसी परिस्थितियों में भी खेती प्रभावित नहीं होती। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समन्वित खेती में जल संरक्षण की ऐसी व्यवस्थाएं किसानों की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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पूरे साल मिल रही नियमित आय

समन्वित खेती मॉडल अपनाने से किसान केवल एक फसल पर निर्भर नहीं रहता। अलग-अलग मौसम में विभिन्न फसलें, फल और पशुपालन से आय के कई स्रोत बनते हैं। इससे किसी एक फसल के खराब होने पर भी आर्थिक नुकसान कम होता है और पूरे वर्ष नियमित आमदनी बनी रहती है। यही कारण है कि डॉ. पन्नासे का मॉडल जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है।

किसानों से समन्वित खेती अपनाने की अपील

उप संचालक कृषि मोरिस नाथ ने जिले के किसानों से अपील की कि वे पारंपरिक एकल फसल प्रणाली के बजाय समन्वित (इंटीग्रेटेड) फार्मिंग को अपनाएं। उन्होंने कहा कि फलदार पौधों, खाद्यान्न फसलों, दलहनों, तिलहनों और पशुपालन को एक साथ जोड़कर किसान अपनी आय बढ़ाने के साथ-साथ खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बना सकते हैं।

इस अवसर पर सहायक संचालक कृषि दीपक चौरसिया, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्री विनोद लोखंडे तथा कृषि विस्तार अधिकारी पंकज पराड़कर भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने किसानों को आधुनिक खेती, जल संरक्षण और फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि बदलते मौसम के बीच भी कृषि को अधिक लाभकारी बनाया जा सके।

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