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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भाकृअप – क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर की पांच नई बायो फोर्टिफाइड एवं जलवायु-अनुकूल गेहूं किस्में लोकार्पित

 इन नई किस्मों का केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने किया लोकार्पण

17 जुलाई 2026, इंदौर : भाकृअप – क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर की पांच नई बायो फोर्टिफाइड एवं जलवायु-अनुकूल गेहूं किस्में लोकार्पित – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI), क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर ने भारतीय  गेहूं  अनुसंधान के इतिहास में एक और स्वर्णिम उपलब्धि दर्ज करते हुए 98  वें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) स्थापना दिवस के अवसर पर विकसित अपनी  पांच  नवीन बायो फोर्टिफाइड एवं जलवायु-अनुकूल गेहूँ किस्मों को राष्ट्र को समर्पित किया। भारत रत्न डॉ. सी. सुब्रमण्यम ऑडिटोरियम, राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (NASC), नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में  केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इन किस्मों का लोकार्पण किया। यह उपलब्धि केवल एक वैज्ञानिक सफलता नहीं, बल्कि देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इंदौर केंद्र द्वारा विकसित ये किस्में उच्च उत्पादकता, बायोफोर्टिफिकेशन, बेहतर गुणवत्ता तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का सामना करने की क्षमता जैसे गुणों से युक्त हैं, जो भविष्य की टिकाऊ कृषि प्रणाली के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगी।

भाकृअप – क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर की पांच नई बायो फोर्टिफाइड एवं जलवायु-अनुकूल गेहूं किस्में लोकार्पित

98  वें आईसीएआर स्थापना दिवस के अवसर पर देशभर के विभिन्न अनुसंधान संस्थानों द्वारा विकसित धान, गेहूँ, जौ, मक्का, बाजरा, सरसों, सोयाबीन, मूंगफली, गन्ना, दलहनी फसलों तथा कपास सहित कुल 38 नई उन्नत फसल किस्मों को राष्ट्र को समर्पित किया गया। इनमें गेहूँ की कुल 11 नई किस्में शामिल थीं, जिनमें से 5 किस्में अकेले भा.कृ.अनु.प. – भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर द्वारा विकसित की गई हैं। यह उपलब्धि न केवल इंदौर केंद्र की वैज्ञानिक उत्कृष्टता, अनुसंधान क्षमता एवं नवाचार का प्रमाण है, बल्कि राष्ट्रीय गेहूँ प्रजनन कार्यक्रम में उसकी अग्रणी भूमिका को भी स्थापित करती है। देश में जारी प्रत्येक दो नई गेहूँ किस्मों में लगभग एक किस्म का ICAR-IARI, क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर से होना इस केंद्र के उत्कृष्ट अनुसंधान, समर्पित वैज्ञानिकों की टीम तथा किसानों की आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित प्रौद्योगिकियों की सफलता को दर्शाता है। यह उपलब्धि भारतीय कृषि अनुसंधान प्रणाली में इंदौर केंद्र के बढ़ते राष्ट्रीय नेतृत्व और देश के किसानों के लिए अधिक उत्पादक, पोषणयुक्त एवं जलवायु-अनुकूल गेहूँ किस्में उपलब्ध कराने की उसकी प्रतिबद्धता का सशक्त प्रमाण है।

राष्ट्र को समर्पित की गई किस्मों में HI 1683 (पूसा बायो फोर्टिफाइड गेहूँ सम्राट), HI 1687  (पूसा बायो फोर्टिफाइड गेहूँ अटल), HI 8849 (पूसा बायो फोर्टिफाइड गेहूँ श्री मंगल), ही 8850 (पूसा बायो फोर्टिफाइड गेहूँ प्रचंड) तथा HI 8851 (पूसा बायो फोर्टिफाइड गेहूँ पोषण शक्ति) शामिल हैं। ये किस्में केवल अधिक उत्पादन देने वाली नहीं हैं, बल्कि बेहतर पोषण गुणवत्ता, उत्कृष्ट प्रसंस्करण क्षमता तथा जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने में भी सक्षम हैं।

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इस गरिमामयी समारोह में श्री भागीरथ चौधरी (केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री), श्री राजीव रंजन सिंह (केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री), श्री रामनाथ ठाकुर (केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री), प्रो. एस. पी. सिंह बघेल (राज्य मंत्री, मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी), प्रो. के. वी. राजू (सदस्य, नीति आयोग), श्री नरेश पाल गंगवार, आईएएस (सचिव, पशुपालन एवं डेयरी विभाग), डॉ. एम. एल. जाट (सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग तथा महानिदेशक, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद), श्री ज्ञानेन्द्र देव त्रिपाठी, आईएएस (सचिव, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं अपर सचिव, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग), डॉ. देवेन्द्र कुमार यादव (उप महानिदेशक, फसल विज्ञान, ICAR), डॉ. सी. श्रीनिवास राव (निदेशक एवं कुलपति, ICAR-IARI, नई दिल्ली) तथा डॉ. सी. विश्वनाथन (संयुक्त निदेशक (अनुसंधान), ICAR- IARI, नई दिल्ली) सहित देशभर से आए अनेक वरिष्ठ वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों एवं गणमान्य अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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जलवायु परिवर्तन की चुनौती का वैज्ञानिक समाधान–  ICAR-IARI, क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर द्वारा विकसित HI 8849, HI 8850 एवं HI 8851 विशेष रूप से जलवायु-अनुकूल (Climate Resilient) ड्यूरम गेहूं किस्में हैं। 

HI 8849 (पूसा बायो फोर्टिफाइड गेहूँ श्री मंगल) सिंचित एवं समय पर बुवाई के लिए मध्यम स्तर तक ताप सहनशील (हीट सेंसिटिविटी इंडेक्स 0.90) किस्म है। इसमें लगभग 10.9 प्रतिशत प्रोटीन, 41.1 पीपीएम आयरन तथा 39.1 पीपीएम जिंक पाया जाता है। इसके अतिरिक्त उच्च टेस्ट वेट (81.0 किग्रा/हेक्टोलीटर), बेहतर दाना कठोरता तथा उत्कृष्ट पास्ता गुणवत्ता इसे ड्यूरम गेहूँ की एक श्रेष्ठ बायो फोर्टिफाइड किस्म बनाती है।

HI 8850 (पूसा बायो फोर्टिफाइड गेहूँ प्रचंड) सिंचित एवं समय पर बुवाई के लिए मध्यम ताप एवं सूखा सहनशील (हीट सेंसिटिविटी इंडेक्स 0.90 तथा ड्रॉट सेंसिटिविटी इंडेक्स 0.98) किस्म है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ड्यूल क्वालिटी किस्म है, जिसका उपयोग उच्च गुणवत्ता वाले पास्ता के साथ-साथ स्वादिष्ट चपाती बनाने में भी किया जा सकता है। इसमें लगभग 11.9 प्रतिशत प्रोटीन, उच्च येलो पिगमेंट, अधिक टेस्ट वेट (84.9 किग्रा/हेक्टोलीटर) तथा उत्कृष्ट पास्ता स्वीकार्यता पाई गई है।

HI 8851 (पूसा बायो फोर्टिफाइड गेहूं पोषण शक्ति) समय पर बुवाई के लिए ताप एवं सूखा सहनशील ड्यूरम गेहूं किस्म (हीट सेंसिटिविटी इंडेक्स 0.97 एवं ड्रॉट सेंसिटिविटी इंडेक्स 0.98) है। यह पाँचों किस्मों में सबसे अधिक आयरन (44.3 पीपीएम) तथा 40.2 पीपीएम जिंक से समृद्ध है, जिससे यह पोषण सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण किस्म बन जाती है।

 रोटी भी पौष्टिक, स्वास्थ्य भी बेहतर ब्रेड गेहूं की श्रेणी में विकसित HI 1683 (पूसा बायो फोर्टिफाइड गेहूं   सम्राट) एक उच्च उत्पादक, सिंचित एवं समय पर बुवाई के लिए अनुशंसित बायो फोर्टिफाइड गेहूं किस्म है। यह औसतन 56.1 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तथा अनुकूल परिस्थितियों में 77.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देने की क्षमता रखती है। इसमें लगभग 11.7% प्रोटीन, 40.4 पीपीएम आयरन तथा 38.3 पीपीएम जिंक की उच्च मात्रा पाई जाती है, जो इसे पोषण की दृष्टि से अत्यंत समृद्ध बनाती है। इसका कम ग्लूटेन इंडेक्स इसे विशेष गुणवत्ता वाली ब्रेड गेहूं किस्मों में स्थान दिलाता है। उच्च उपज, बेहतर पोषण गुणवत्ता एवं उत्कृष्ट प्रसंस्करण गुणों के कारण यह किस्म किसानों, खाद्य उद्योग तथा उपभोक्ताओं सभी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

HI 1687 (पूसा बायो फोर्टिफाइड गेहूं   अटल) प्रायद्वीपीय क्षेत्र के लिए सिंचित एवं पछेती बुवाई हेतु विकसित एक उच्च गुणवत्ता वाली बायोफोर्टिफाइड ब्रेडगेहूं   किस्म है। यह औसतन 46.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तथा अनुकूल परिस्थितियों में 70.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देने की क्षमता रखती है। इसमें लगभग 12.1% प्रोटीन, 43.3 पीपीएम जिंक तथा 42.5 पीपीएम आयरन की उच्च मात्रा पाई जाती है। इसके अतिरिक्त, इसका एसडीएस अवसादन मान 48.6 मि.ली., उत्कृष्ट ब्रेड गुणवत्ता (7.1), बेहतर बिस्किट गुणवत्ता (8.5) तथा अच्छी चपाती गुणवत्ता (7.0) इसे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए भी उपयुक्त बनाती है। अधिक हेक्टोलीटर वज़न, उत्कृष्ट दाना कठोरता तथा उच्च पोषण गुणवत्ता के कारण यह किस्म किसानों, खाद्य उद्योग एवं उपभोक्ताओं सभी के लिए एक आकर्षक और उपयोगी विकल्प है।

किसानों की आय और देश की पोषण सुरक्षा को मिलेगा नया आधार-  विशेषज्ञों का मानना है कि इन पाँचों किस्मों के व्यापक प्रसार से किसानों को अधिक उत्पादन, बेहतर बाजार मूल्य तथा जलवायु जोखिमों से सुरक्षा मिलेगी। वहीं आयरन एवं जिंक से समृद्ध बायो फोर्टिफाइड गेहूं   देश में कुपोषण और सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी जैसी चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह उपलब्धि ‘पोषण सुरक्षा के साथ खाद्य सुरक्षा ‘ के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती प्रदान करेगी।

 ICAR-IARI, क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर पिछले सात दशकों से देश में गेहूं  अनुसंधान का अग्रणी केंद्र रहा है। संस्थान द्वारा विकसित अनेक किस्में आज लाखों हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों द्वारा उगाई जा रही हैं और मध्य भारत को देश के प्रमुख गेहूं   उत्पादक क्षेत्रों में स्थापित करने में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। ICAR-IARI, क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर के अध्यक्ष डॉ. जंग बहादुर सिंह ने इस उपलब्धि पर सभी वैज्ञानिकों, तकनीकी अधिकारियों, कर्मचारियों एवं सहयोगी संस्थानों को बधाई देते हुए कहा कि संस्थान भविष्य में भी किसानों के लिए उच्च उत्पादक, पोषणयुक्त एवं जलवायु-अनुकूल गेहूं   किस्मों के विकास हेतु निरंतर कार्य करता रहेगा। यह उपलब्धि केवल ICAR-IARI, क्षेत्रीय केंद्र, इंदौर की ही नहीं, बल्कि भारतीय कृषि अनुसंधान प्रणाली और देश के करोड़ों किसानों के लिए गर्व का विषय है। पाँच नई किस्मों का एक साथ राष्ट्र को समर्पण भारतीय गेहूँ अनुसंधान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो विकसित भारत के निर्माण, किसानों की समृद्धि तथा पोषण-सुरक्षित भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी।

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