250% फसल तीव्रता का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा उत्तर प्रदेश, वर्ल्ड बैंक समर्थित UP AGREES परियोजना से कृषि क्षेत्र को नई दिशा
स्मार्ट खेती, आधुनिक तकनीक और निर्यात आधारित रणनीति पर योगी सरकार का फोकस
18 मई 2026, नई दिल्ली: 250% फसल तीव्रता का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा उत्तर प्रदेश, वर्ल्ड बैंक समर्थित UP AGREES परियोजना से कृषि क्षेत्र को नई दिशा – उत्तर प्रदेश में योगी सरकार कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। सरकार का लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि खेती को अधिक लाभकारी, तकनीक आधारित और बाजार से जुड़ा बनाना है। इसी सोच के तहत स्मार्ट खेती, आधुनिक तकनीक, फसल विविधीकरण और निर्यात आधारित कृषि मॉडल पर विशेष जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2047 तक उत्तर प्रदेश को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने वाला कृषि केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा है।
राज्य सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए कई बड़े लक्ष्य तय किए हैं। इनमें खाद्यान्न, दलहन और तिलहन की उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ फसल तीव्रता को 250 प्रतिशत से अधिक तक ले जाना शामिल है। सरकार चाहती है कि किसान एक ही जमीन से साल में अधिक फसलें लेकर अपनी आय बढ़ा सकें। इसके साथ ही फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को 4 प्रतिशत से नीचे लाने और देश के कुल कृषि निर्यात में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी को 15 प्रतिशत से अधिक तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।
सरकार जैविक खेती को भी तेजी से बढ़ावा दे रही है। कृषि उत्पादकता बढ़ाने, कृषि निर्यात को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और खेती को टिकाऊ बनाने के लिए ड्रोन तकनीक, डिजिटल कृषि सेवाएं, स्मार्ट फार्मिंग और कृषि आधारित स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीक और बाजार आधारित खेती ही भविष्य में किसानों की आय बढ़ाने का सबसे बड़ा माध्यम बनेगी।
कृषि उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश वर्तमान में खाद्यान्न, गेहूं, आलू, गन्ना, सब्जियों और शहद उत्पादन में देश में पहले स्थान पर है। राज्य का कृषि क्षेत्र लगातार मजबूत हुआ है और कृषि सकल मूल्य वर्धन (GVA) के मामले में उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर पहुंच चुका है।
राज्य का कृषि GVA करीब 4.66 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो राज्य के कुल GSVA का लगभग 15.7 प्रतिशत है। इससे साफ है कि राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है।
वर्ष 2017 से 2025 के बीच गेहूं उत्पादन में 16 प्रतिशत, खाद्यान्न उत्पादन में 17 प्रतिशत, तिलहन उत्पादन में 34 प्रतिशत और दलहन उत्पादन में 26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार का कहना है कि इन उपलब्धियों के पीछे सिंचाई विस्तार, नई तकनीकों का उपयोग और किसानों तक योजनाओं की बेहतर पहुंच महत्वपूर्ण कारण रहे हैं।
बाजार और निर्यात से जोड़ने पर जोर
योगी सरकार खेती को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती। अब फोकस किसानों को बेहतर बाजार और निर्यात के अवसर उपलब्ध कराने पर भी है। इसी का असर है कि राज्य से कृषि निर्यात में तेजी आई है। वित्त वर्ष 2024-25 में कृषि निर्यात लगभग 7,139 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्षों की तुलना में 2.13 गुना अधिक है।
सरकार कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करने पर काम कर रही है ताकि उत्तर प्रदेश वैश्विक कृषि बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सके।
सिंचाई और फसल विविधीकरण से बढ़ रही किसानों की आय
राज्य सरकार ने सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और फसल विविधीकरण को भी प्राथमिकता दी है। माइक्रो-इरिगेशन तकनीकों के उपयोग से किसानों को कम पानी में अधिक उत्पादन मिल रहा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल सिंचित क्षेत्र में 33 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। वहीं तिलहन फसलों के रकबे में 141 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा दलहन उत्पादन में 17 प्रतिशत और खाद्यान्न उत्पादन में 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरकार का मानना है कि इससे खेती अधिक लाभकारी बनी है और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिली है।
वर्ल्ड बैंक समर्थित UP AGREES परियोजना से पिछड़े क्षेत्रों को नई उम्मीद
वर्ल्ड बैंक समर्थित UP AGREES परियोजना राज्य की कृषि विकास रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। करीब 325 मिलियन डॉलर की इस परियोजना के तहत पूर्वांचल और बुंदेलखंड के 28 जिलों में कृषि और मत्स्य क्षेत्र को मजबूत करने का काम किया जा रहा है।
परियोजना का मुख्य उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, आधुनिक कृषि तकनीकों को गांवों तक पहुंचाना और कृषि उत्पादन में 30 प्रतिशत से अधिक वृद्धि सुनिश्चित करना है। खास तौर पर पिछड़े और संसाधन सीमित क्षेत्रों के किसानों को इससे लाभ मिलने की उम्मीद है।
सरकार का मानना है कि यदि इसी गति से तकनीक, सिंचाई, बाजार और निर्यात पर काम जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश देश ही नहीं बल्कि वैश्विक कृषि मानचित्र पर भी अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
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