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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

मध्यप्रदेश में यूरिया संकट की आहट

सरकारी यूरिया विपणन नीति पर सवाल

कब तक भरमाएंगे चुनावी
 वादों से किसानों को ?

(विशेष प्रतिनिधि)
भोपाल। अत्याधिक मानसूनी वर्षा  से बिगड़े खरीफ को संवारने के लिए किसान की आस अब रबी पर लगी है। उम्मीद है कि अधिक बारिश का फायदा रबी की भरपूर फसल के रूप में आयेगा। प्रदेश के कृषि विभाग ने भी इस वर्ष 120 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिसमें सर्वाधिक लक्ष्य 65 लाख हेक्टेयर गेहूं का है। रबी फसलों के लक्ष्य के अनुरूप 26 लाख टन से अधिक उर्वरक वितरण का लक्ष्य रखा गया है। जिसमें 15 लाख टन केवल यूरिया है।

कहां है म.प्र. 
की कृषि नीति?

कम्पनियाँ नहीं ला रही पर्याप्त यूरिया

रबी सीजन में यूरिया सर्वाधिक मांग वाली खाद होती है और उसकी उपलब्धता सदैव कम होती है। इस वर्ष भी अक्टूबर माह में 4 लाख 50 हजार टन यूरिया की मांग के विरूद्ध प्रदेश में लगभग 2 लाख 90 हजार टन यूरिया की ही आवक हो पाई है। हालांकि केन्द्र ने नवम्बर माह के लिए भी मध्यप्रदेश को 4 लाख 50 हजार टन यूरिया का आवंटन किया है। आशा है कि इस माह सभी कम्पनियां अपनी निर्धारित मात्रा की आपूर्ति प्रदेश में  कर पायेंगी। शासन को भी इस ओर ध्यान देना होगा। 

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शासन – प्रशासन हर बार यूरिया की सुलभ उपलब्धता के लिए सहकारी क्षेत्र को वरदहस्त प्रदान कर अपने कर्तव्य से इतिश्री कर लेता है। जबकि प्रदेश में उर्वरक वितरण में निजी विकेता भी बराबर की भागीदारी रखते हैं। इस वर्ष भी प्रक्रिया को अपनाते हुए शासन ने हाल ही में निकाले आदेश में सहकारी एवं निजी क्षेत्र के मध्य यूरिया वितरण अनुपात में लगभग 10 प्रतिशत का आंशिक फेरबदल किया है, प्रदेश शासन द्वारा माह सितम्बर 19 में 100 प्रतिशत यूरिया समितियों को आवंटित किया गया। माह अक्टूबर में-जहां पूर्व में 80 प्रतिशत सोसायटी/मार्कफेड और 20 प्रतिशत प्राइवेट था, वहां 70:30 और जहां 50:50 था वहां 60:40 का आदेश किया गया। दिनांक 17.10.19 को जारी आदेश में निजी क्षेत्र के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले यूरिया से एम.पी. स्टेट एग्रो इ. कार्पो. लि. को 37460 टन उपलब्ध करवाने के निर्देश जारी किए हैं। अर्थात् 50 प्रतिशत से भी कम किसानों के लिए 80 प्रतिशत से अधिक यूरिया आवंटित किया गया है जिससे प्रदेश में यूरिया का संकट उत्पन्न हो गया है। 

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उर्वरक उद्योग के सूत्रों के अनुसार राज्य में लगभग 12366 उर्वरक विक्रय केन्द्र हैं, जिसमें से 5078 सहकारी क्षेत्र में एवं 7288 निजी क्षेत्र में कार्यरत हैं। इसमें भी सहकारी क्षेत्र के लगभग आधे विक्रय केन्द्र वित्तीय रूप से सुदृढ़ नहीं हैं। प्रदेश की अधिकांश समितियों द्वारा POS मशीन पर बिकी न किए जाने से वित्तीय वर्ष एवं रबी सीजन के आरंभ में भारी मात्रा में यूरिया MFMS पर स्टॉक में दिख रहा है। इस कारण प्रदेेश सरकार केन्द्र से कम यूरिया मांग ले सकी है जबकि मांग ज्यादा है। इसके अलावा सहकारी विक्रय केन्द्रों में सीमित स्टाक होने के कारण निर्धारित समय में डिजीटली रिकार्ड मेन्टेन नहीं हो पाता जिसके कारण केन्द्र से उचित आवंटन, अनुदान वितरण जैसी कई समस्याएं आती हैं। जबकि निजी क्षेत्र के व्यापारी स्वतंत्र होने के कारण आवश्यकतानुसार अपने संसाधनों का विस्तार करके चौबीस घंटे सेवा की तर्ज पर कार्य करते हैं, जिससे किसानों, कम्पनियों सभी को उनकी सुविधानुसार सेवा मिलती है। यदि शासन सहकारी एवं निजी क्षेत्र को बांटने के बजाय केवल केन्द्र से यूरिया के अधिकाधिक उपलब्धता पर ध्यान दे तो संभवत: मध्यप्रदेश के किसानों को यूरिया की किल्लत नहीं झेलनी पड़ेगी।