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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य किसान का अधिकार

किसान गर्जना रैली में किसान संघ ने रखीं मांगें

23 दिसम्बर 2022, नई दिल्ली: लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य किसान का अधिकार – दिल्ली के रामलीला मैदान में किसान गर्जना रैली का महाआयोजन ऐतिहासिक हो गया। देशभर के राज्यों से आए किसानों ने भारतीय किसान संघ के तत्वावधान में केंद्र सरकार को ये जाहिर कर दिया कि धरती से अन्न उगाने वाले किसान जब अपने हक की खातिर गर्जना करते हैं तो सत्ता के सिंहासन भी डोल जाते हैं। ये बात दिल्ली के रामलीला मैदान में साक्षात भी हो गई। भारतीय किसान संघ के नेतृत्व में किसान गर्जना रैली का आयोजन रामलीला मैदान में किया गया। कंपकपाती ठंड में देशभर से लाखों किसानों ने अपने अधिकारों के लिए गर्जना करते हुए सरकार को सीधे चुनौती दे डाली है।

इस अवसर पर मंच पर अखिल भारतीय संगठन मंत्री श्री दिनेश कुलकर्णी, महामंत्री श्री मोहनी मोहन मिश्र जी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री भैयाराम जी मौर्य, रामभरोसे बासोतिया, पेरुमल जी श्रीमती कपिला मुठे, राष्ट्रीय मंत्री साईं रेड्डी, भानू थापा, श्रीमती वीणा सतीश, प्रमोद चौधरी, अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख राघवेन्द्र सिंह पटेल सहित अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सभी सदस्य उपस्थित रहे।

जहर नहीं जैविक चाहिए

आयोजन में भारतीय किसान संघ के अखिल भारतीय राष्ट्रीय महामंत्री श्री मोहनी मोहन जी ने ओजपूर्ण संबोधन में केंद्र सरकार को ललकारते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी के किसान अधिकारों को लेकर किए गए सभी भाषण कोरे साबित हुए हैं। किसानों की आय में बढ़ोत्तरी होगी, लेकिन ऐसा हो ना सका। सरकार का वाणिज्य विभाग किसानों से दुश्मनी पर उतारू है, किसानों को उनकी लागत का लाभकारी मूल्य उनका अधिकार है, भीख नहीं।

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पानी भी पिला सकते हैं किसान

श्री मोहनी मोहन जी ने कहा कि कोविड के संकट के दौरान भारत के किसानों ने पूरे देश को हर हाल में अनाज मुहैया कराया। किसानों ने जान जोखिम में डालकर खेतों में अन्न पैदा किया और देश ही नहीं बल्कि दुनियाभर में खाद्यान्न की पूर्ति करके भारत का मान बढ़ाया। श्री मोहनी जी ने कहा कि जब देश का किसान सभी को खाना खिला सकता है तो समय आने पर पानी भी पिला सकता है।

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जीएम सरसों जानलेवा साबित होगी

श्री मोहनी मोहन जी ने जीएम सरसों को लागू करने के फैसले को घातक बताया। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं होने दिया जाएगा, जब तक सरकार इस फैसले को वापस नहीं लेती तब तक किसानों का विरोध हर स्तर पर जारी रहेगा। उन्होंने मंच से जहर नहीं जैविक चाहिए का नारा मुखर करते हुए किसानों से जीएम सरसों का विरोध करने का संकल्प सबल बनाने का आह्वान किया।

कंपनियों को सब्सिडी आखिर क्यों

श्री मोहनी मोहन जी ने कहा कि छह लाख करोड़ की सब्सिडी बीज कंपनियों को दी गई, जबकि यह किसानों का हक था। किसान खुद बीज का सृजन कर सकते हैं, लेकिन उन्हें अनदेखा किया जा रहा है, किसानों के साथ बाजारों से लेकर मंडी तक लूट का सिलसिला जारी है। आजादी के 75 वर्षों के बाद भी ऐसे आंदोलनों की जरूरत पड़ रही है, यह दुर्भाग्य की बात है।

अपने-अपने साधनों से पहुँचे किसान

इस आंदोलन मेें किसान ट्रैक्टरों और निजी साधनों से पहुँचे, कई राज्यों से तो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर किसानों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

ये है प्रमुख मांग

1. लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य को लागू करें तथा इसके मिलने को सुनिश्चित करें।
2. सभी प्रकार के कृषि आदानों पर जीएसटी समाप्त हो।
3. किसान सम्मान निधि में पर्याप्त बढ़ोत्तरी की जाए।
4. जीएम फसलों की अनुमति वापस ली जाए।

देशभर में हुए जनजागरण कार्यक्रम

-देशभर से करीब 560 जिलों की हजारों तहसीलों की 60 हजार से भी अधिक ग्राम समितियों में विगत चार माह से जनजागरण करते हुए  दिल्ली के रामलीला मैदान में पहुँचे।
– जनजागरण कार्यक्रम के अंतर्गत करीब 20 हजार पदयात्रा, लगभग 13 हजार साइकिल यात्राएं, 18 हजार नुक्कड़ सभाएं, दक्षिण भारत के तेलंगाना, मध्य भारत के मध्यप्रदेश में बड़ी सभाएँ आयोजित की गई।

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