नागालैंड के वैज्ञानिकों ने बनाया हाई-टेक पशु निगरानी सिस्टम, AI से होगी मिथुन के व्यवहार की ट्रैकिंग
10 सितंबर 2026, नई दिल्ली: नागालैंड के वैज्ञानिकों ने बनाया हाई-टेक पशु निगरानी सिस्टम, AI से होगी मिथुन के व्यवहार की ट्रैकिंग – पशुधन अनुसंधान और प्रबंधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को शामिल करने की दिशा में नागालैंड के वैज्ञानिकों ने एक नई तकनीक विकसित की है। आईसीएआर-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र के शोधकर्ताओं ने प्राकृतिक फार्म के माहौल में मिथुन के व्यवहार की रियल-टाइम पहचान और ट्रैकिंग के लिए AI आधारित सिस्टम तैयार किया है। यह तकनीक पशुओं के व्यवहार की लगातार निगरानी कर सकती है और इससे पशु स्वास्थ्य, कल्याण, नस्ल सुधार और प्रजनन प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
इससे जुड़े अध्ययन को हाल ही में इंजीनियरिंग रिसर्च एक्सप्रेस पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन में मिथुन यानी पूर्वोत्तर भारत में पाए जाने वाले एक खास पहाड़ी मवेशी के व्यवहार की स्वचालित पहचान और ट्रैकिंग के लिए AI आधारित, रियल-टाइम और बिना संपर्क वाली प्रणाली विकसित की गई है। मिथुन पूर्वोत्तर भारत के जनजातीय समुदायों के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण है और स्थानीय आजीविका व खाद्य सुरक्षा में भी इसकी भूमिका है।
खाने, बैठने और प्रजनन व्यवहार पर रखेगी नजर
पशुधन प्रबंधन में पशुओं के व्यवहार की निगरानी महत्वपूर्ण मानी जाती है। खाने-पीने, खड़े होने, बैठने और प्रजनन संबंधी व्यवहार में बदलाव से पशु के स्वास्थ्य, आराम, पोषण और शारीरिक स्थिति के बारे में शुरुआती संकेत मिल सकते हैं। अब तक ऐसी निगरानी के लिए मुख्य रूप से मैन्युअल निरीक्षण पर निर्भर रहना पड़ता था। इसमें काफी समय और मेहनत लगती है। खासकर रात के समय लगातार पशुओं की निगरानी करना मुश्किल होता है। इसी चुनौती को देखते हुए वैज्ञानिकों ने AI आधारित सिस्टम विकसित किया है।
12 CCTV कैमरों से हुई दिन-रात निगरानी
इस सिस्टम को तैयार करने के लिए नागालैंड स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र के फार्म के दो शेड में 12 हाई-डेफिनिशन CCTV कैमरे लगाए गए। इनमें इन्फ्रारेड कवरेज की सुविधा थी, जिससे दिन और रात दोनों समय पशुओं पर नजर रखी जा सके। कैमरों से रिकॉर्ड की गई फुटेज के आधार पर शोधकर्ताओं ने 3,000 मैन्युअली वर्गीकृत तस्वीरों का डेटासेट तैयार किया। इसमें मिथुन के चार प्रमुख व्यवहारों को शामिल किया गया—खाना, खड़े रहना, बैठना और माउंटिंग।
YOLOv8n और DeepSORT तकनीक का इस्तेमाल
AI सिस्टम में व्यवहार की पहचान के लिए YOLOv8n मॉडल का उपयोग किया गया है। वहीं, वीडियो के अलग-अलग फ्रेम में प्रत्येक पशु की गतिविधि पर नजर रखने और उसकी पहचान बनाए रखने के लिए DeepSORT तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसकी मदद से सिस्टम किसी पशु के व्यवहार की पहचान करने के साथ-साथ अलग-अलग मिथुन पशुओं को रियल-टाइम में ट्रैक भी कर सकता है।
99.5% mAP सटीकता हासिल
शोध में YOLOv8n मॉडल ने mAP@0.5 पर 99.5 प्रतिशत मीन एवरेज प्रिसीजन और 99.6 प्रतिशत रिकॉल हासिल किया। NVIDIA RTX 3060 GPU पर सिस्टम ने करीब 31 फ्रेम प्रति सेकंड की प्रोसेसिंग स्पीड दर्ज की। इससे इसके रियल-टाइम इस्तेमाल की क्षमता का पता चलता है। सिस्टम को फार्म की अलग-अलग चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी परखा गया। इनमें पशु का कुछ समय के लिए दृश्य से गायब होना, पीछे का अव्यवस्थित माहौल, ऊबड़-खाबड़ और गीली जमीन, छाया, मोशन ब्लर और रात के समय इन्फ्रारेड फुटेज जैसी स्थितियां शामिल थीं।
पशु स्वास्थ्य और प्रजनन प्रबंधन में मिल सकती है मदद
यह तकनीक पशुधन की निगरानी और प्रबंधन को बेहतर बनाने में उपयोगी साबित हो सकती है। खाने, खड़े होने और बैठने के व्यवहार में बदलाव से पशु के स्वास्थ्य, आराम और शारीरिक स्थिति के बारे में जानकारी मिल सकती है। वहीं, माउंटिंग व्यवहार की निगरानी से प्रजनन और एस्ट्रस प्रबंधन में मदद मिल सकती है। लगातार स्वचालित निगरानी के जरिए किसान और पशुधन प्रबंधक पशुओं के व्यवहार से जुड़े जरूरी आंकड़े हासिल कर सकेंगे।
अभी एक ही फार्म पर किया गया परीक्षण
शोधकर्ताओं ने बताया कि फिलहाल इस सिस्टम का परीक्षण केवल एक फार्म पर किया गया है। इसलिए अलग-अलग फार्म, भौगोलिक क्षेत्र, मौसम, पशुओं की संख्या और कैमरों की अलग-अलग व्यवस्था में इसका आगे परीक्षण और सत्यापन जरूरी है। वर्तमान अध्ययन में चार प्रमुख व्यवहारों पर ही ध्यान दिया गया है। अत्यधिक रुकावट या पशु के ज्यादा छिप जाने की स्थिति में AI की पहचान और ट्रैकिंग क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा पशुओं की पहचान को लेकर सटीक ट्रैकिंग का मात्रात्मक मूल्यांकन करने के लिए भी आगे शोध की जरूरत है।
आगे बीमारी और आक्रामकता जैसे व्यवहार भी पहचाने जाएंगे
शोधकर्ताओं की योजना भविष्य में इस AI सिस्टम को और बेहतर बनाने की है। इसके तहत आक्रामकता, शरीर की सफाई और बीमारी के कारण होने वाली सुस्ती या निष्क्रियता जैसे अन्य व्यवहारों की पहचान को भी इसमें शामिल किया जा सकता है। भविष्य के शोध में टेम्पोरल AI मॉडल, फार्म स्तर पर तुरंत डेटा प्रोसेस करने वाले एज डिवाइस और अलग-अलग फार्मों व मौसमों को शामिल करने वाले बड़े डेटासेट विकसित करने पर भी काम किया जा सकता है।
पशुधन प्रबंधन में नई संभावनाएं
यह अध्ययन पशुधन विज्ञान को AI और कंप्यूटर विजन से जोड़कर तकनीक आधारित पशुधन प्रबंधन को बढ़ावा देने की संभावनाएं दिखाता है। इस तरह की तकनीक प्रिसिजन लाइवस्टॉक फार्मिंग को मजबूत कर सकती है और पशुओं के व्यवहार की लगातार डेटा आधारित निगरानी के जरिए किसानों और पशुपालकों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
यह अध्ययन इंजीनियरिंग रिसर्च एक्सप्रेस के वॉल्यूम 8 (2026), आर्टिकल 175213 में प्रकाशित हुआ है। शोध को आईसीएआर-राष्ट्रीय मिथुन अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने एनआईटी नागालैंड, नागालैंड यूनिवर्सिटी और क्राइस्ट (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) के शोधकर्ताओं के सहयोग से पूरा किया है।
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