देश में लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम तेज, 36.18 करोड़ से अधिक मवेशियों का हुआ टीकाकरण
10 सितंबर 2026, नई दिल्ली: देश में लम्पी स्किन डिजीज की रोकथाम तेज, 36.18 करोड़ से अधिक मवेशियों का हुआ टीकाकरण – भारत सरकार के पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने देश में लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) की रोकथाम, निगरानी और नियंत्रण को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर कदम उठाए हैं। विभाग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर बीमारी की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है और समय पर टीकाकरण व अन्य नियंत्रण उपायों को लागू करने के लिए तकनीकी मार्गदर्शन दे रहा है। अब तक देश में 36.18 करोड़ से अधिक मवेशियों को एलएसडी से बचाव के लिए टीका लगाया जा चुका है या दोबारा टीका लगाया गया है।
राज्यों को समय पर टीकाकरण और रोकथाम के निर्देश
हाल ही में हुई समीक्षा बैठकों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को खासकर बछियों और युवा मवेशियों का समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। इसके अलावा बीमारी को फैलने से रोकने के लिए रिंग वैक्सीनेशन, पशुओं की आवाजाही पर नियंत्रण, बीमार पशुओं को अलग रखना, वेक्टर कंट्रोल, कीटाणुशोधन और साफ-सफाई जैसे उपाय अपनाने पर जोर दिया गया। राज्यों से आवारा पशुओं के प्रबंधन, बीमार पशुओं के इलाज और नए लाए गए पशुओं को क्वारंटीन में रखने जैसे कदम उठाने को भी कहा गया है। साथ ही, बीमारी से जुड़े मामलों की आधिकारिक चैनलों के माध्यम से समय पर और पारदर्शी रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है।
उत्तर प्रदेश भेजी गई केंद्रीय विशेषज्ञ टीम
बीमारी की जमीनी स्थिति का आकलन करने और राज्य स्तर पर किए जा रहे उपायों की निगरानी के लिए अगस्त 2026 में एक केंद्रीय विशेषज्ञ दल को उत्तर प्रदेश भेजा गया था। इस दल का उद्देश्य बीमारी से निपटने की तैयारी और प्रतिक्रिया को लेकर तकनीकी मार्गदर्शन देना भी था। इसके अलावा स्थिति की समीक्षा और तैयारियों को मजबूत करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ 27 अगस्त 2026 और 7 सितंबर 2026 को समीक्षा बैठकें भी आयोजित की गईं। विभाग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एलएसडी की स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है।
देश में 3,461 एक्टिव मामले
विभाग के अनुसार, देश में एलएसडी की स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है। संक्रमण की गंभीरता और मृत्यु दर में भी काफी कमी आई है। वर्तमान में 3,461 एक्टिव मामले हैं। ये मामले मुख्य रूप से छोटे और बिना टीका लगाए गए पशुओं तथा अन्य बीमारियों से ग्रस्त जानवरों में पाए जा रहे हैं। विभाग बीमारी की स्थिति की लगातार निगरानी कर रहा है और प्रभावी नियंत्रण व रोकथाम के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी मार्गदर्शन, टीकाकरण सहायता, नैदानिक एवं प्रयोगशाला संबंधी सहायता और वित्तीय मदद उपलब्ध करा रहा है।
क्या है लम्पी स्किन डिजीज?
लम्पी स्किन डिजीज एक विषाणुजनित बीमारी है, जो मवेशियों और भैंसों को प्रभावित करती है। यह कैप्रिपॉक्स वायरस के कारण होती है और मुख्य रूप से आर्थ्रोपोड वैक्टरों के जरिए फैलती है। बीमारी में पशुओं को बुखार और त्वचा पर गांठें हो सकती हैं। आम तौर पर इसकी मृत्यु दर कम होती है। भारत में एलएसडी के मामले पहली बार सितंबर 2019 में पश्चिम बंगाल और ओडिशा में सामने आए थे।
जुलाई से कुछ राज्यों में सामने आए छिटपुट मामले
विभाग के मुताबिक, जुलाई 2026 से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और कुछ अन्य राज्यों में छोटे पशुओं और बछड़ों में एलएसडी के छिटपुट मामले सामने आए हैं। हालांकि, बीमारी की गंभीरता बहुत कम देखी गई है और प्रभावित पशु सामान्य तौर पर एक सप्ताह के भीतर ठीक हो रहे हैं। प्रभावित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में टीकाकरण, उपचार और बीमारी को नियंत्रित करने के अन्य उपाय लगातार जारी हैं। वहीं, गैर-प्रभावित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी बचाव के उपाय किए जा रहे हैं।
जांच और टेस्टिंग की क्षमता बढ़ाई गई
विभाग की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को टीकाकरण, उपचार, जैव सुरक्षा और बीमारी की रोकथाम को लेकर लगातार तकनीकी सलाह और दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं। आईसीएआर-एनआईएचएसएडी, भोपाल से मिली तकनीकी मदद के अलावा क्षेत्रीय रोग निदान प्रयोगशालाओं (आरडीडीएल) और केंद्रीय रोग निदान प्रयोगशाला (सीडीडीएल) जैसी प्रयोगशालाओं के नेटवर्क की मदद से देशभर में एलएसडी की जांच और टेस्टिंग की क्षमता को भी बढ़ाया गया है।
टीकाकरण और प्रशिक्षण के लिए वित्तीय सहायता
एलएसडी की रोकथाम और नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से विभाग ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को टीकाकरण, प्रशिक्षण और जागरूकता बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता भी दी है। इसके साथ ही पशु चिकित्सा प्रयोगशालाओं के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और पशु चिकित्सा कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए भी सहायता उपलब्ध कराई गई है।
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