‘सिर्फ रिसर्च नहीं, किसानों तक जल्द पहुंचे उसका लाभ’, ICAR की 97वीं बैठक में शिवराज चौहान ने कृषि वैज्ञानिकों को दिया ये मंत्र
19 अगस्त 2026, नई दिल्ली: ‘सिर्फ रिसर्च नहीं, किसानों तक जल्द पहुंचे उसका लाभ’, ICAR की 97वीं बैठक में शिवराज चौहान ने कृषि वैज्ञानिकों को दिया ये मंत्र – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत का सपना कृषि क्षेत्र के विकास के बिना पूरा नहीं हो सकता। भारत को केवल खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि खेत से वैश्विक बाजार तक अपनी मजबूत पहचान बनानी होगी। इसके लिए किसानों की जरूरत, बाजार की मांग और उपभोक्ताओं की अपेक्षाओं के अनुरूप कृषि अनुसंधान को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
शिवराज सिंह चौहान ने यह बात नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर में आयोजित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की 97वीं वार्षिक आम बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। बैठक में कृषि अनुसंधान, किसानों की आय, तकनीक हस्तांतरण और कृषि उत्पादों की निर्यात क्षमता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।
किसानों की जरूरत के हिसाब से हो कृषि अनुसंधान
कृषि मंत्री ने मांग आधारित अनुसंधान प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान का उद्देश्य ऐसा समाधान तैयार करना होना चाहिए, जिससे किसानों को सीधे और मापने योग्य लाभ मिले। कृषि वैज्ञानिकों, नीति निर्माताओं, किसानों, उद्योग और अन्य हितधारकों के बीच संवाद बढ़ाने की जरूरत भी बताई गई। उन्होंने कहा कि केवल अनुसंधान करना पर्याप्त नहीं है। सही समय पर सही समस्या का समाधान तैयार करना और उसका लाभ तेजी से किसानों तक पहुंचाना ही अनुसंधान की सफलता का वास्तविक पैमाना होना चाहिए।
छोटे किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस
शिवराज चौहान ने कृषि क्षेत्र में बदलाव के अगले चरण में किसानों की आय बढ़ाने और छोटे एवं सीमांत किसानों की क्षमता मजबूत करने को प्राथमिकता देने की बात कही। इसके लिए एकीकृत कृषि प्रणाली को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। एकीकृत कृषि प्रणाली में फसल उत्पादन के साथ पशुपालन, मछली पालन, मुर्गी पालन, बागवानी और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को जोड़ा जाता है। इससे किसान एक से अधिक स्रोतों से आय प्राप्त कर सकते हैं और कृषि लागत को भी कम करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही गुणवत्तापूर्ण बीज और रोपण सामग्री की समय पर उपलब्धता, उर्वरकों के संतुलित उपयोग, मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर भी ध्यान देने की बात कही गई।
खेत से वैश्विक बाजार तक मजबूत होगी पहचान
कृषि मंत्री ने भारत की निर्यात क्षमता मजबूत करने के लिए कृषि उत्पादों की गुणवत्ता, पोषण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और शेल्फ लाइफ में सुधार की जरूरत बताई। साथ ही वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पादन और प्रसंस्करण को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने ICAR और उद्योग के बीच साझेदारी मजबूत करने का आह्वान किया, ताकि अनुसंधान से विकसित तकनीकों को प्रयोगशालाओं से निकालकर तेजी से किसानों तक पहुंचाया जा सके।
386 नई फसल किस्में विकसित
बैठक में ICAR की पिछले वर्षों की उपलब्धियों की जानकारी भी दी गई। ICAR के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट के अनुसार, परिषद ने 386 नई फसल किस्में जारी की हैं। इनमें 94 प्रतिशत किस्में जलवायु प्रतिरोधी और 29 प्रतिशत जैव-संवर्धित हैं। ICAR के अनुसार खाद्यान्न उत्पादन में करीब 19 मिलियन टन की वृद्धि हुई है। इसके अलावा बागवानी, दूध और मत्स्य उत्पादन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कृषि अनुसंधान में जीनोमिक्स, जीनोम एडिटिंग, पशुधन स्वास्थ्य, मत्स्य पालन, मृदा स्वास्थ्य और प्राकृतिक खेती जैसे क्षेत्रों में भी काम आगे बढ़ा है।
प्रयोगशाला से खेत तक पहुंचे तकनीक
शिवराज चौहान ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नए विचार और नवाचार केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए। उन्हें व्यावहारिक समाधान में बदलकर जमीनी स्तर पर उनका प्रभाव दिखाई देना चाहिए। उन्होंने वैज्ञानिकों और अन्य हितधारकों से अनुसंधान के उद्देश्यों को स्पष्ट प्राथमिकता देने और परिणाम आधारित व्यवस्था विकसित करने का आह्वान किया। उनका कहना है कि वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीक किसानों की तस्वीर और देश की कृषि अर्थव्यवस्था दोनों को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कृषि में आत्मनिर्भरता पर भी जोर
केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने दलहन, तिलहन, बीज, पशुधन और मूल्यवर्धित प्रसंस्करण में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। साथ ही जलवायु अनुकूल खेती, मृदा स्वास्थ्य और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के लिए किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत करने और उन्हें बेहतर बाजार से जोड़ने की आवश्यकता भी बताई।
बैठक में केंद्र और विभिन्न राज्यों के मंत्री, कृषि वैज्ञानिक और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य हितधारक शामिल हुए। बैठक के दौरान ICAR की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 प्रस्तुत की गई और कृषि अनुसंधान से जुड़े प्रकाशन भी जारी किए गए।
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