NIPU-2026 से यूरिया उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मिलेगी मदद: FAI
17 जुलाई 2026, नई दिल्ली: NIPU-2026 से यूरिया उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मिलेगी मदद: FAI – फर्टिलाइज़र एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FAI) ने केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति-2026 (NIPU-2026) को मंजूरी दिए जाने का स्वागत करते हुए कहा है कि यह नीति देश में यूरिया उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। एसोसिएशन का मानना है कि नई नीति से घरेलू यूरिया उद्योग में नए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा।
भारत में यूरिया की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में देश की वार्षिक मांग में लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है और आने वाले वर्षों में इसके करीब 4 करोड़ मीट्रिक टन (40 MMT) तक पहुंचने का अनुमान है। इसके मुकाबले घरेलू उत्पादन लगभग 3 करोड़ मीट्रिक टन (30 MMT) है, जबकि कुल आवश्यकता का करीब 26 प्रतिशत यूरिया आयात के माध्यम से पूरा किया जाता है।
इस अंतर को कम करने के लिए सरकार ने NIPU-2026 के तहत 8 से 9 नए गैस आधारित यूरिया संयंत्रों की स्थापना को मंजूरी दी है। इन संयंत्रों से लगभग 1 करोड़ मीट्रिक टन (10 MMT) अतिरिक्त उत्पादन क्षमता विकसित होने की उम्मीद है, जिससे देश की घरेलू आपूर्ति मजबूत होगी।
नई नीति वर्ष 2012 की राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति का स्थान लेगी। इसमें यूरिया संयंत्रों में निवेश को आकर्षक बनाने के लिए कई प्रावधान किए गए हैं। नीति के तहत 12 से 16 प्रतिशत रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) का प्रावधान किया गया है। साथ ही, सब्सिडी निर्धारण में स्थिर और परिवर्ती लागतों को अलग-अलग माना जाएगा तथा चार वर्ष बाद स्थिर लागत को भारतीय रुपये में परिवर्तित करने का प्रावधान किया गया है, जिससे विदेशी मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव का जोखिम कम होगा।
सरकार का अनुमान है कि नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक नए संयंत्र के पूरे परिचालन काल में 250 करोड़ रुपये से अधिक की बचत संभव होगी। इससे सार्वजनिक, निजी और सहकारी क्षेत्रों में नई यूरिया परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता बेहतर होगी।
FAI के सह-अध्यक्ष डॉ. सिबा प्रसाद मोहंती ने कहा, “NIPU-2026 भारत के उर्वरक क्षेत्र की उस प्रमुख चुनौती का समाधान प्रस्तुत करती है, जिसमें बढ़ती मांग के मुकाबले घरेलू उत्पादन क्षमता लंबे समय से स्थिर बनी हुई है। यह नीति निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगी और भारत को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।”
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