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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

कृषि क्षेत्र के डिजिटलीकरण के लिए अमेजॅन, पतंजलि के साथ एमओयू

2 जून 2021, नई दिल्ली । कृषि क्षेत्र के डिजिटलीकरण के लिए अमेजॅन, पतंजलि के साथ एमओयू – कृषि मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि कृषि क्षेत्र को साथ लेकर ही आत्मनिर्भर व डिजिटल भारत का सपना साकार हो सकेगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस संबंध में देश को राह दिखाई है, जिस पर चलते हुए कृषि क्षेत्र के डिजिटलीकरण के लिए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने ठोस कदम आगे बढ़ाए हैं। केंद्रीय मंत्री श्री तोमर ने यह बात कृषि मंत्रालय के साथ चार संस्थानों के समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान कही। ये संस्थान है- (i) पतंजलि ऑर्गेनिक रिसर्च इंस्टीट्यूट (ii) अमेजॅन वेब सर्विसेज (एडब्ल्यूएस) (iii) ईएसआरआई इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एवं (iv) एग्रीबाजार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड। इन संगठनों के साथ एकवर्ष के भीतर आधार के रूप में किसान डेटाबेस का उपयोग करके पायलट परियोजना के लिए एमओयू किया गया है: 

कौन क्या करेगा ?
  1. ईएसआरआई : “नेशनल एग्रीकल्चर जियो हब” की स्थापना,
  2. अमेजॅन वेब सर्विसेज: कृषि मूल्य श्रृंखला में डिजिटल सेवाओं के लिए
  3. एग्रीबाजार : डिजिटल कृषि को बढ़ावा देने के लिए3 राज्यों (उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान) में पायलट परियोजना तथा
  4. पतंजलि: कृषि प्रबंधन और किसान सेवा (हरिद्वार- उत्तराखंड, हमीरपुर- उत्तरप्रदेश एवं मुरैना- मध्य प्रदेश) ।
डिजिटल कृषि के लिए विशेषज्ञों का टास्क फोर्स

कृषि मंत्रालय ने डिजिटल कृषि की रूपरेखा तैयार करने हेतु इस क्षेत्र के विशेषज्ञों व प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों के एक टास्क फोर्स और एक वर्किंग ग्रुप का गठन किया था। कृषि सचिव श्री संजय अग्रवाल की अध्यक्षता तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना तकनीक मंत्रालय, के पूर्व सचिव श्री जे. सत्यनारायण की सह-अध्यक्षता में टास्क फोर्स ने मुक्त डिजिटल तकनीकों को बढ़ावा देते हुए किसानों को कृषि पारिस्थितिकी के केन्द्र में रखने के दृष्टिकोण के साथ इंडिया इकोसिस्टम आर्किटेक्चर (IndEA) डिजीटल इकोसिस्टम आफ एग्रीकल्चर (IDEA) पर परामर्श-पत्र तैयार किया है। कृषि मंत्री श्री तोमर ने कृषि विशेषज्ञों, किसानों, आईटी विशेषज्ञों व जनता की टिप्पणियों के लिए इस दस्तावेज़ का अनावरण भी इस समारोह में किया। 5 करोड़ किसानों का डेटाबेस तैयार

कृषि में डिजिटलीकरण के महत्व को स्वीकार करते हुए विभाग एक संघीय किसान डेटाबेस तैयार कर रहा है व इसके आधार पर विभिन्न सेवाओं का सृजन कर रहा है ताकि कृषि के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया जा सके। इस डेटाबेस को देशभर के किसानों के भूमि रिकॉर्ड से जोड़ा जाएगा और यूनिक किसान आईडी सृजित की जाएगी। अभी तक लगभग 5 करोड़ किसानों के विवरणों का डेटाबेस तैयार हो चुका है।

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किसान कैसे सक्षम बनें ?

इन पायलट परियोजनाओं के माध्यम से विकसित केस बेस्ड यूज द्वारा IDEA और इस पर आधारित समाधानों सहित डेटाबेस से विभिन्न सहायता मिलेगी, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं: किसान इस बारे में सूचित निर्णय प्राप्त करने सक्षम होंगे कि किस फसल को उगाना है, किस किस्म के बीज उपयोग करना है, कब बुआई करनी है और उपज को अधिकतम करने के लिए किन सर्वोत्तम पद्धतियों  को अपनाना है। कृषि आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े लोग सटीक और समयबद्ध सूचना से  अपनी खरीद व लॉजिस्टिक की योजना बना सकते हैं। उचित समय पर, उचित सूचना प्राप्त होने से सटीक और स्मार्ट कृषि संभव हो सकती है। किसान निर्णय कर सकते हैं कि उन्हें अपनी उपज बेचना है या भंडारित करनी है, और आगे कब, कहां तथा किस कीमत पर बेचनी है।

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कार्यक्रम में कृषि राज्य मंत्री श्री परषोत्तम रूपाला , कृषि सचिव श्री संजय अग्रवाल, पतंजलि जैविक अनुसंधान संस्थान के श्री आचार्य बालकृष्ण, ईएसआरआई के एमडी श्री अगेंद्र कुमार, एग्रीबाजार के कार्यकारी निदेशक श्री अमित गोयल, अमेजॅन वेब सर्विसेज के भारत एवं दक्षिण एशिया के लीडर श्री पंकज गुप्ता, एमईआईटीवाई के भूतपूर्व सचिव श्री जे. सत्यनारायण, अपर सचिव (डिजिटल कृषि) श्री विवेक अग्रवाल ने भी विचार व्यक्त किए।