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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारत-आसियान फेलोशिप: कृषि शिक्षा में नया कदम, छात्रों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच

16 अगस्त 2024, नई दिल्ली: भारत-आसियान फेलोशिप: कृषि शिक्षा में नया कदम, छात्रों को मिलेगा अंतरराष्ट्रीय मंच – केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय कृषि विज्ञान केंद्र, पूसा में आयोजित एक विशेष समारोह में कृषि और सम्बद्ध विज्ञान में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए “आसियान-भारत फेलोशिप” का शुभारंभ किया। इस फेलोशिप के तहत, आसियान देशों के छात्रों को भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त करने का मौका मिलेगा, जिससे दोनों क्षेत्रों के बीच शैक्षणिक और अनुसंधान सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर और श्री भागीरथ चौधरी भी शामिल थे। इस मौके पर श्री चौहान ने कहा, “भारत और आसियान के सदस्य देशों के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग की अपार संभावनाएं हैं, क्योंकि आसियान व भारत कृषि-जलवायु क्षेत्रों के मामले में बहुत समानताएं साझा करते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत कृषि शिक्षा और किसानों के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है।”

उन्होंने यह भी बताया कि भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ और ‘इंडो-पैसिफिक विजन’ के तहत आसियान-भारत फेलोशिप की शुरुआत की गई है, जो कि आसियान सदस्य देशों के छात्रों को भारतीय कृषि विश्वविद्यालयों में शोध-आधारित शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त भाग लेने वाले संस्थानों के भारतीय संकाय सदस्यों की आसियान सदस्य देशों में परिचयात्मक यात्राओं के माध्यम से आसियान क्षमता निर्माण में सहायता प्रदान की जाएगी। इससे कृषि और संबद्ध विज्ञान क्षेत्र के विकास के लिए आसियान में विशेषज्ञ मानव संसाधन के एक पूल के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

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इस फेलोशिप के अंतर्गत 2024-25 शैक्षणिक वर्ष से आसियान के छात्रों को 50 मास्टर डिग्री फेलोशिप (प्रति वर्ष 10) प्रदान की जाएंगी, परियोजना 5 साल के लिए आसियान-भारत कोष के तहत वित्त पोषण के लिए मंजूर की गई है, जिसमें फेलोशिप, प्रवेश शुल्क, रहने का खर्च व आकस्मिकता शामिल है। इस मौके पर आईसीएआर के अधिकारियों और आसियान देशों के उच्चायुक्तों ने भी उपस्थिति दर्ज कराई।

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केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, “कृषि शिक्षा के माध्यम से हम न केवल छात्रों को भविष्य के नवाचारों के लिए तैयार करेंगे, बल्कि भारत और आसियान के बीच कृषि के क्षेत्र में गहरे संबंध भी स्थापित करेंगे।”

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