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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

समुद्री खाद्य निर्यात पर उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, 83 देशों के राजदूत करेंगे मंथन  

21 जनवरी 2026, नई दिल्ली: समुद्री खाद्य निर्यात पर उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन, 83 देशों के राजदूत करेंगे मंथन – मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अंतर्गत मत्स्य विभाग की ओर से समुद्री खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय बाजार संपर्क को मजबूत करने के उद्देश्य से 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय अंतरराष्ट्रीय गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में 83 देशों के राजदूत और उच्चायुक्त एक साथ भाग लेकर समुद्री खाद्य व्यापार से जुड़े अहम मुद्दों पर मंथन करेंगे।

सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह करेंगे। इस अवसर पर मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय तथा अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री श्री जॉर्ज कुरियन और पंचायती राज मंत्रालय के राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल भी उपस्थित रहेंगे।

भारत की मजबूत स्थिति

भारत आज जलीय कृषि उत्पादों का विश्व का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है और मछली व समुद्री खाद्य पदार्थों के अग्रणी वैश्विक उत्पादकों में शामिल है। बीते वर्षों में यह क्षेत्र पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़कर एक व्यावसायिक, निर्यातोन्मुख और संगठित उद्योग के रूप में विकसित हुआ है, जिसमें मत्स्यपालन, चारा उत्पादन, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स और मूल्यवर्धन जैसी गतिविधियां शामिल हैं। यह क्षेत्र लाखों छोटे, सीमांत और पारंपरिक मछुआरों तथा किसानों को आजीविका का सहारा देता है।

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सरकार की लक्षित योजनाओं और नीतिगत सहयोग के चलते भारत वर्तमान में मछली और मत्स्य उत्पादों का छठा सबसे बड़ा निर्यातक बन चुका है। वर्ष 2024-25 में समुद्री खाद्य निर्यात 16.98 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जिसकी कीमत 62,408 करोड़ रुपये (7.45 बिलियन अमेरिकी डॉलर) रही। यह देश के कुल कृषि निर्यात में लगभग 18 प्रतिशत का योगदान देता है।

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अंतरराष्ट्रीय सहभागिता और व्यापक मंच

इस गोलमेज सम्मेलन में एशिया, अफ्रीका, यूरोप, उत्तरी अमेरिका, ओशेनिया, लैटिन अमेरिका और कैरिबियन क्षेत्र के 83 साझेदार देशों के राजदूत और उच्चायुक्त भाग लेंगे। इसके साथ ही विदेश मंत्रालय, समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (MPEDA), निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC), वाणिज्य विभाग, डीजीएफटी, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय सहित कई केंद्रीय विभागों और संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एफएओ, एएफडी, जीआईजेड, बे ऑफ बंगाल प्रोग्राम (BOBP), एडीबी और आईएफएडी जैसी प्रमुख एजेंसियों की भागीदारी भी सम्मेलन को वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करेगी। यह सम्मेलन समुद्री खाद्य व्यापार, बाजार पहुंच, नियामक सहयोग और द्विपक्षीय व बहुपक्षीय साझेदारियों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और तकनीकी मंच के रूप में कार्य करेगा।

मंथन के प्रमुख विषय

सम्मेलन में दीर्घकालिक और मूल्यवर्धित समुद्री खाद्य व्यापार को बढ़ावा देने के साथ-साथ निवेश, संयुक्त उद्यम, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और क्षमता निर्माण के अवसरों पर चर्चा होगी। साथ ही जलवायु परिवर्तन और बाजार जोखिमों के प्रति समुद्री खाद्य मूल्य श्रृंखलाओं की सामर्थ्य बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

मुख्य विषयों में वैश्विक समुद्री खाद्य व्यापार के रुझान, बाजार विविधीकरण, मानक और प्रमाणन, डिजिटल ट्रेसबिलिटी, नियामक सहयोग, मूल्यवर्धन और प्रसंस्करण, कोल्ड चेन एवं बंदरगाह संपर्क, वित्तपोषण, निजी क्षेत्र की भागीदारी और मत्स्य पालन व जलीय कृषि में डिजिटल एवं तकनीकी परिवर्तन शामिल हैं।

उभरते अवसरों पर फोकस

सम्मेलन में वैश्विक बाजार में तेजी से उभर रहे रुझानों पर भी चर्चा की जाएगी, जिनमें उच्च गुणवत्ता वाले, प्रमाणित और स्थायी स्रोतों से प्राप्त समुद्री खाद्य की बढ़ती मांग, उत्तरी अमेरिका, यूरोप और पूर्वी एशिया में मत्स्य आधारित प्रोटीन की बढ़ती खपत तथा रेडी-टू-कुक, रेडी-टू-ईट और पोषण व औषधीय गुणों वाले प्रीमियम समुद्री उत्पादों की मांग शामिल है। ये रुझान भारत के लिए अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं।

सकारात्मक परिणामों की उम्मीद

सरकार को उम्मीद है कि इस सम्मेलन के परिणामस्वरूप खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी, मत्स्य पालन से जुड़ी मूल्य श्रृंखलाओं में आजीविका के अवसर बढ़ेंगे और स्थिरता, सामर्थ्य तथा समावेशी विकास के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह सम्मेलन भारतीय समुद्री खाद्य निर्यात को वैश्विक स्तर पर नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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