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कृषि कंपनी समाचार (Industry News)

भारत में एग्रोकेमिकल्स के लिए 5 साल की रेग्युलेटरी डेटा प्रोटेक्शन के खिलाफ PMFAI ने PMO से की अपील

23 सितंबर 2026, मुंबई: भारत में एग्रोकेमिकल्स के लिए 5 साल की रेग्युलेटरी डेटा प्रोटेक्शन के खिलाफ PMFAI ने PMO से की अपील – पेस्टिसाइड्स मैन्युफैक्चरर्स एंड फॉर्म्युलेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (PMFAI) ने भारत में एग्रोकेमिकल्स के लिए पांच साल की रेग्युलेटरी डेटा प्रोटेक्शन (RDP) या डेटा एक्सक्लूसिविटी (Data Exclusivity) की मांग के खिलाफ प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से हस्तक्षेप की अपील की है। संगठन का कहना है कि ऐसी व्यवस्था से जेनेरिक (Generic) फसल सुरक्षा उत्पादों की बाजार में एंट्री में देरी हो सकती है और घरेलू बाजार में प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है।

प्रदीप दवे

यह रिप्रेजेंटेशन प्रदीप दवे, प्रेसिडेंट, पेस्टिसाइड्स मैन्युफैक्चरर्स एंड फॉर्म्युलेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (PMFAI) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजा है। इसकी प्रतियां डॉ. पी.के. मिश्रा, प्रिंसिपल सेक्रेटरी टू द प्राइम मिनिस्टर एवं चेयरमैन, नीति आयोग (NITI Aayog) तथा अनुराग जैन, सीईओ, नीति आयोग को भी भेजी गई हैं। 

एसोसिएशन ने कहा है कि एग्रोकेमिकल्स के लिए पांच साल की रेग्युलेटरी डेटा प्रोटेक्शन की मांग मल्टीनेशनल कंपनियों और इंपोर्टर्स (Importers) की ओर से उठाई जा रही है। एसोसिएशन ने इस मामले को प्रधानमंत्री कार्यालय, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय और अन्य संबंधित मंत्रालयों के समक्ष भी उठाया है। 

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16 वर्षों से विचाराधीन है मामला

एसोसिएशन के अनुसार, भारत में एग्रोकेमिकल्स के लिए रेग्युलेटरी डेटा प्रोटेक्शन का मुद्दा पिछले करीब 16 वर्षों के दौरान विभिन्न मंत्रालयों द्वारा जांचा गया है। एसोसिएशन का कहना है कि पूर्व में हुई इन समीक्षाओं में भारत में ऐसी व्यवस्था लागू करने के पक्ष में सिफारिश नहीं की गई थी।

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एसोसिएशन ने पार्लियामेंटरी स्टैंडिंग कमेटी ऑन एग्रीकल्चर, एनिमल हसबेंड्री एंड फूड प्रोसेसिंग का भी हवाला दिया है। PMFAI के अनुसार, दिसंबर 2021 में पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल पर 36वीं रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद कमेटी ने हितधारकों से मिले सुझावों की समीक्षा की थी।

एसोसिएशन ने कमेटी के निष्कर्ष का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा 20 साल की पेटेंट सुरक्षा (Patent Protection) नई अणुओं की खोज या उन्हें भारत में लाने से जुड़े निवेश पर इनोवेटर्स को लाभ प्राप्त करने के लिए पर्याप्त समय देती है। एसोसिएशन ने यह भी कहा कि कमेटी के अनुसार भारत का बड़ा और बढ़ता एग्रोकेमिकल बाजार विदेशी और घरेलू कंपनियों से नई अणुओं को आकर्षित करने में सक्षम है, इसलिए अलग से डेटा प्रोटेक्शन की आवश्यकता नहीं है। 

घरेलू एग्रोकेमिकल निर्माताओं पर असर की चिंता

एसोसिएशन ने अपने रिप्रेजेंटेशन में कहा कि भारत में बड़ी संख्या में किसान छोटे जोत वाले हैं और कृषि इनपुट की लागत उनके लिए महत्वपूर्ण है। एसोसिएशन ने आशंका जताई है कि अतिरिक्त डेटा प्रोटेक्शन से जेनेरिक एग्रोकेमिकल उत्पादों के बाजार में आने में देरी हो सकती है।

एसोसिएशन का तर्क है कि जिन अणुओं के लिए रेग्युलेटरी डेटा प्रोटेक्शन की मांग की जा रही है, उनमें से कई पहले ही वैश्विक स्तर पर विकसित और कमर्शियलाइज्ड हो चुके हैं। इसलिए एसोसिएशन का कहना है कि भारत में अतिरिक्त डेटा प्रोटेक्शन भविष्य के इनोवेशन को बढ़ावा देने के बजाय पहले से किए गए इनोवेशन को अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करेगा। 

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि भारत ने जनवरी 2005 से अंतरराष्ट्रीय पेटेंट व्यवस्था में भागीदारी की है और पेटेंट एक्ट के तहत 20 साल की पेटेंट सुरक्षा उपलब्ध है। PMFAI के अनुसार, इसके अतिरिक्त डेटा एक्सक्लूसिविटी लागू करने से जेनेरिक एग्रोकेमिकल्स की बाजार में एंट्री में देरी हो सकती है और प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। 

PMFAI ने यह दावा भी किया है कि कुछ मल्टीनेशनल कंपनियां, जो भारत में पेटेंटेड उत्पादों का कमर्शियलाइजेशन करने में सफल नहीं हुईं, अब डेटा प्रोटेक्शन या डेटा एक्सक्लूसिविटी के माध्यम से पुराने पेटेंटेड अणुओं को भारतीय बाजार में लाने के लिए अतिरिक्त पांच साल की बाजार सुरक्षा चाहती हैं। यह PMFAI द्वारा अपने रिप्रेजेंटेशन में किया गया दावा है। 

भारतीय निर्माताओं की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता

PMFAI ने भारत में घरेलू पेस्टिसाइड उद्योग की प्रोसेस केमिस्ट्री, मैन्युफैक्चरिंग इनोवेशन और कम लागत वाली उत्पादन तकनीकों में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया है।

एसोसिएशन के अनुसार, भारतीय कंपनियों ने उत्पाद पेटेंट की अवधि समाप्त होने के बाद वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग रूट्स और बेहतर उत्पादन प्रक्रियाओं में निवेश किया है। PMFAI का कहना है कि इससे भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फसल सुरक्षा उत्पादों के प्रतिस्पर्धी सप्लायर के रूप में विकसित होने में मदद मिली है। 

एसोसिएशन ने यह भी अनुमान लगाया है कि यदि डेटा एक्सक्लूसिविटी के कारण जेनेरिक उत्पादों की बाजार में एंट्री रुकती है, तो किसानों को फसल सुरक्षा उत्पादों के लिए 35% से 50% तक अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। यह आंकड़ा PMFAI द्वारा अपने रिप्रेजेंटेशन में दिया गया अनुमान है, न कि स्वतंत्र रूप से सत्यापित बाजार आकलन। 

पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल में RDP शामिल नहीं करने की मांग

PMFAI ने प्रधानमंत्री कार्यालय से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग को निर्देश देने का अनुरोध किया है कि भारत में एग्रोकेमिकल्स के लिए रेग्युलेटरी डेटा प्रोटेक्शन की मांग पर आगे कार्रवाई न की जाए।

एसोसिएशन ने यह भी अनुरोध किया है कि प्रस्तावित पेस्टिसाइड मैनेजमेंट बिल (PMB) में रेग्युलेटरी डेटा प्रोटेक्शन या डेटा एक्सक्लूसिविटी से संबंधित प्रावधान शामिल न किए जाएं। PMFAI ने कहा है कि उसका अनुरोध भारतीय कृषि, किसानों, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग, निष्पक्ष बाजार प्रतिस्पर्धा और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के हितों को ध्यान में रखते हुए किया गया है। 

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