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समस्या – समाधान (Farming Solution)

गेहूं में पीला, भूरा और काला रतुआ रोग: समय पर पहचान और रोकथाम से बचाएं उपज

05 मार्च 2026, नई दिल्ली: गेहूं में पीला, भूरा और काला रतुआ रोग: समय पर पहचान और रोकथाम से बचाएं उपज – रतुआ रोग गेहूं की फसल के लिए अत्यंत गंभीर माना जाता है। मार्च के महीने में तापमान और आर्द्रता की अनुकूल स्थिति होने पर पीला, भूरा और काला रतुआ तेजी से फैल सकता है। यह रोग पत्तियों और तनों पर छोटे-छोटे धब्बों के रूप में दिखाई देता है, जो आगे चलकर बड़े संक्रमण में बदल सकता है।

किसानों को सलाह दी जाती है कि वे नियमित रूप से अपनी फसल का निरीक्षण करें। यदि पत्तियों पर पीले या भूरे रंग की धारियां अथवा धब्बे दिखाई दें, तो तुरंत रोग की पुष्टि कराएं। रोग की पुष्टि होने पर प्रोपिकोनाजोल युक्त फफूंदनाशी का प्रयोग प्रभावी माना जाता है। लगभग 200 मिलीलीटर दवा को 200 लीटर पानी में घोलकर प्रति एकड़ छिड़काव किया जा सकता है।

छिड़काव साफ और शुष्क मौसम में करना चाहिए। कोहरा, वर्षा या अत्यधिक नमी की स्थिति में दवा का प्रभाव कम हो सकता है। रोग का समय पर नियंत्रण न करने पर दाना भरने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, जिससे दाने हल्के और सिकुड़े हुए रह जाते हैं। इससे उपज और गुणवत्ता दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

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रोग प्रबंधन के लिए संतुलित पोषण, उचित सिंचाई और समय पर फफूंदनाशी का प्रयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुसार उपाय अपनाकर किसान रतुआ रोग से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकते हैं।

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