सोयाबीन में खरपतवार बन रहे हैं परेशानी? वैज्ञानिकों ने बताया कब और कैसे करें नियंत्रण
09 जुलाई 2026, नई दिल्ली: सोयाबीन में खरपतवार बन रहे हैं परेशानी? वैज्ञानिकों ने बताया कब और कैसे करें नियंत्रण – खरीफ सीजन में सोयाबीन की बुवाई के बाद खरपतवार किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हैं। यदि समय रहते इन पर नियंत्रण नहीं किया जाए, तो ये फसल के साथ पानी, पोषक तत्व और धूप के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसे देखते हुए भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICAR-IISR), इंदौर ने 6 से 12 जुलाई 2026 की साप्ताहिक एडवाइजरी में किसानों को खरपतवार नियंत्रण के सही समय और वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी दी है।
बुवाई के 10-15 दिन बाद करें खरपतवार नियंत्रण
वैज्ञानिकों के अनुसार, जिन खेतों में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है और फसल 10 से 15 दिन की हो गई है, वहां खरपतवार नियंत्रण तुरंत शुरू कर देना चाहिए। इस समय खरपतवार तेजी से बढ़ते हैं और यदि इन्हें शुरुआती अवस्था में नहीं रोका गया, तो फसल की बढ़वार और उत्पादन दोनों पर असर पड़ सकता है।
हाथ से निराई या डोरा-कुल्पा का करें इस्तेमाल
एडवाइजरी में किसानों को सलाह दी गई है कि जहां संभव हो, खेत में हाथ से निराई-गुड़ाई करें या डोरा और कुल्पा जैसे कृषि उपकरणों का उपयोग कर खरपतवार हटाएं। यह तरीका छोटे और मध्यम किसानों के लिए प्रभावी होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिहाज से भी सुरक्षित माना जाता है।
जरूरत पड़ने पर करें खरपतवारनाशी का छिड़काव
यदि खेत में खरपतवार अधिक हों, तो किसान सोयाबीन के लिए अनुशंसित पोस्ट-इमर्जेंस (खड़ी फसल में उपयोग होने वाले) खरपतवार नाशक का छिड़काव कर सकते हैं। वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि किसान केवल अनुशंसित खरपतवारनाशी का ही उपयोग करें और निर्धारित मात्रा का पालन करें।
छिड़काव में पानी और नोजल का रखें ध्यान
विशेषज्ञों के अनुसार, खरपतवार नाशक के बेहतर परिणाम के लिए पर्याप्त पानी का उपयोग करना जरूरी है। नेपसैक स्प्रेयर से छिड़काव करते समय 450 से 500 लीटर प्रति हेक्टेयर और पावर स्प्रेयर से 120 से 150 लीटर प्रति हेक्टेयर पानी का उपयोग करें। साथ ही, फ्लड जेट या फ्लैट फैन नोजल का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है, ताकि दवा का समान रूप से छिड़काव हो सके।
देर से बुवाई वाले किसान भी रखें सावधानी
वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन क्षेत्रों में अभी सोयाबीन की बुवाई होनी बाकी है, वहां किसान बुवाई से पहले कल्टीवेटर चलाकर खरपतवार नष्ट करें। इससे शुरुआती अवस्था में खरपतवार का दबाव कम रहेगा और बाद में खरपतवारनाशी पर होने वाला खर्च भी घटेगा।
इसके अलावा किसान अपनी सुविधा के अनुसार बुवाई से पहले या बुवाई के तुरंत बाद उपयोग किए जाने वाले अनुशंसित खरपतवारनाशी का भी प्रयोग कर सकते हैं।
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