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राज्य कृषि समाचार (State News)समस्या – समाधान (Farming Solution)

कद्दूवर्गीय सब्जियों में फल मक्खी और लीची में स्टिंक बग का प्रकोप, वैज्ञानिकों ने बताया उपाय

10 सितंबर 2026, समस्तीपुर: कद्दूवर्गीय सब्जियों में फल मक्खी और लीची में स्टिंक बग का प्रकोप, वैज्ञानिकों ने बताया उपाय – लौकी, करेला, कद्दू और खीरा जैसी कद्दूवर्गीय सब्जियों में फल मक्खी का प्रकोप किसानों के लिए बड़ी समस्या बनकर सामने आया है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा, समस्तीपुर के वैज्ञानिकों ने किसानों को इस कीट से बचाव के साथ-साथ लीची के बागों में सक्रिय स्टिंक बग को लेकर भी सतर्क रहने की सलाह दी है।

विश्वविद्यालय की एडवाइजरी के अनुसार फल मक्खी मादा कीट फलों के अंदर अंडे देती है, जिससे फल अंदर से सड़ने लगते हैं और बाजार में बिकने लायक नहीं रहते। इस कीट का प्रकोप बरसात के बाद नमी बढ़ने पर तेजी से फैलता है, इसलिए इसी समय ध्यान देना जरूरी है।

फल मक्खी और तना छेदक के लिए दवा की मात्रा

फल मक्खी के नियंत्रण के लिए वैज्ञानिकों ने इमिडाक्लोप्रिड 30.5 प्रतिशत एससी की 0.25 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से साफ मौसम में छिड़काव करने की सलाह दी है। साथ ही खेत में फल मक्खी ट्रैप लगाने और गिरे-सड़े फलों को खेत से बाहर निकालकर नष्ट करने पर भी जोर दिया गया है, ताकि कीट का जीवनचक्र टूट सके।

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इसी एडवाइजरी में मक्का व अन्य अनाज वाली फसलों में तना छेदक और पत्ती मोड़क कीट के लिए क्लोरएंट्रानिलिप्रोल 4 जी दानेदार दवा 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से दोपहर बाद खेत में डालने की सलाह दी गई है, क्योंकि इस समय दवा का असर सबसे ज्यादा रहता है।

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वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि सिर्फ रासायनिक दवा पर निर्भर रहने के बजाय खेत की साफ-सफाई, फेरोमोन ट्रैप और समय पर निगरानी को भी इलाके की सामान्य खेती प्रणाली का हिस्सा बनाना चाहिए। इससे कीटनाशकों पर होने वाला खर्च घटता है और फलों की गुणवत्ता भी बेहतर बनी रहती है, जो बाजार में अच्छा भाव दिलाने में मदद करती है।

लीची के बागों में स्टिंक बग पर नजर

लीची के बागों में इन दिनों स्टिंक बग कीट का प्रकोप भी देखा जा रहा है, जो फल और नई कोंपलों को नुकसान पहुंचाता है। वैज्ञानिकों ने पेड़ के निचले तने पर चिपचिपी पट्टी (ट्रंक बैंड) बांधने की सलाह दी है, ताकि कीट के शिशु पेड़ पर ऊपर न चढ़ सकें। साथ ही जमीन पर गिरे वयस्क कीटों को हाथ से इकट्ठा कर नष्ट करने की भी सलाह दी गई है।

विश्वविद्यालय के अनुसार ट्रंक बैंड और हाथ से कीट इकट्ठा करने जैसे भौतिक तरीके रासायनिक छिड़काव की तुलना में सस्ते भी हैं और फल की गुणवत्ता पर किसी तरह का असर भी नहीं डालते। समस्तीपुर और आसपास के जिलों में लीची एक महत्वपूर्ण बागवानी फसल है, इसलिए बागवानों को समय रहते इन उपायों को अपनाने की सलाह दी गई है।

समस्तीपुर के आसपास के इलाकों में किसान अक्सर एक ही खेत के पास सब्जी और बागवानी दोनों तरह की फसलें उगाते हैं, इसलिए विश्वविद्यालय ने दोनों तरह की सलाह एक साथ जारी की है ताकि किसान अपने पूरे खेत का प्रबंधन एक ही बार में समझ सकें। वैज्ञानिकों ने किसानों से कहा है कि किसी भी नए कीटनाशक का इस्तेमाल करने से पहले विश्वविद्यालय या नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह जरूर लें।

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