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समस्या – समाधान (Farming Solution)

जैविक कीट प्रबंधन में उपयोगी: अँड परजीवी ट्राइकोग्रामा

लेखक- डॉ॰ आभिषेक शुक्ला, डॉ॰ डी.एम.ड़ामसीया तथा श्री हरेश काछेला, कीट विज्ञान विभाग, कृषि महाविधालय, नवसारी कृषि विश्वविधालय, वघई-394 730, गुजरात

13 जनवरी 2026, भोपाल: जैविक कीट प्रबंधन में उपयोगी: अँड परजीवी ट्राइकोग्रामा – आज सम्पूर्ण विश्व में जैविक खेती पर बहुत ही अधिक जोर दिया जा रहा है इस हेतु अँड परजीवी ट्राइकोग्रामा एक वरदान रूपी कीट है, क्योकि ये जैविक कीट प्रबंधन का सटीक साधन है। विश्व में इस अँड परजीवी (ट्राइकोग्रामा) की 18 प्रजातियों का नाशीजीव प्रबंधन में सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। इस मित्र कीट का प्रयोग रसायन-मुक्त कीट नियंत्रण का एक उपाय है, जिसमें शत्रु-कीटों का उनके अंडावस्था में ही सर्वनाश हो जाता है तथा फसल की सुरक्षा सुनिश्चित होती है, साथ ही कीटनाशक दवाओं पर होने वाला खर्च भी काफी हद तक बच जाता है और विष-मुक्त अनाज एवं सब्जियां आसानी से उगाई जा सकती है।

अँड परजीवी,ट्राईकोग्रामा एक अतिसूक्ष्म आकार का एक किसान मित्र कीट है, जिन्हें खेतो में आसानी से देख पाना बहुत ही कठिन है परन्तु प्रयोगशालाओं में इन्हें आसानी से सूक्ष्मदर्शी यंत्र में देखा जा सकता है। इसका बहुगुणन प्रयोगशालाओं में किया जाता है तथा बाद में इन्हें खेतो में छोड़ दिया जाता है। यह एक प्रकार का अंड-परजीवी किसान मित्र कीट है, जो शत्रु कीट के अण्डों में अपना अंडा देकर उन्हें अंडावस्था में ही नष्ट कर देते है और शत्रु कीट के अंडे से मित्र कीट ट्राइकोग्रामा का वयस्क कीट बाहर निकाल आता है, जो पुन: शत्रु कीट में अपना अंडा देता है। इनका जीवन चक्र बहुत छोटा होता है तथा एक फसल अवधि में इसकी अनेक पीढ़ियाँ पूरी हो जाती हैं। इस प्रकार इनकी संख्या शत्रु कीट की तुलना में कई गुना बढ़ जाती है, तथा ये शत्रु कीटों के अण्डों को खेतों में नष्ट करके उनकी संख्या को काबू में रखता है।

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हमारे देश में ट्राईकोग्रामा की प्रायः दो प्रजातियों का बहुतायात से प्रयोग होता हे:

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(1) ट्राइकोग्रामा केलोनिस: ट्राइकोग्रामा प्रजाति ट्राइकोग्रेमेटीड कुल में आता हैं। इस छोटे से मित्र कीट (वास्प)  का आकार 0.4  से 0.7 मि.मी. तक का होता है। इसका पूरा जीवन चक्र 8 से 10 दिनोंमें पूर्ण हो जाता है|यह अलग-अलग प्रकार के कीटों की 200 प्रजातियों को 80 से 90% तक खेत में ही नियंत्रित करता है। ट्राइकोग्रामा केलोनिस का प्रयोग धान सब्जियों एवं अन्य फसलो में अधिक प्रभावी है ।

(2) ट्राइकोग्रामा जापोनिकम: ट्राइकोग्रामा जापोनिकम का प्रयोग प्रायः गन्ने की फसल में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के बेधकों के विरुध होता हे। ये बेधकों के अंडे में अपना अंडा देकर अपना जैविक चक्र स्थापित करके छेदक का नाश करता  है, जिससे हानिकारक छेदक कीट की संख्या में भारी कमी आ जाती  है।

लक्ष्य कीटः- यह गन्ने के सभी प्रकार के बेधकों, चना, अरहर के सुंडी, गोभी की सुंडी तथा अनेक अन्य कीटों की प्रभावशाली तरीके से रोकथाम करता है।

लक्ष्य फसलः- यह सभी प्रकार के सब्जियों, गन्ना, अरहर, धान,मक्का, ज्वार आदि फसलों पर इस अँड परजीवी का प्रयोग किया जा सकता हैं।

कार्य पद्धति:- जैविक कारको में ट्राइकोग्रामा प्रजाति का फसलो के नाशीजीव प्रबंधन में अति महत्वपूर्ण योगदान है। ट्राईकोग्रामा एक अंड-परजीवी है, तथा शत्रु कीट के अण्डों में अपना अंडा देता है, जिससे शत्रु कीट उसकी अँड अवस्था में ही नष्ट हो जाते हैं। ट्राईकोग्रामा के लार्वा की अवधि इसी अंडे में पूरी होती है तथा यह बर्र (वास्प) के रूप में बाहर निकलता है और पुनः शत्रु कीटको ढूंढ करके उनमे अपना अंडा देता है। प्रयोगशाला में इसे चावल के कीट कोर्सेरा के अण्डों पर पाला जाता है। कोर्सेरा के अण्डों की एक महीन सतह 6’’x 2”के कार्ड पर चिपका कर बनाई जाती  है। इस कार्ड को प्रायः ट्राईको-कार्ड नाम से जाना जाता है। सामान्यतः एक कार्ड पर 20 हजार अंडे होते है। इसी कार्ड को फसल के ऊपर लगा दिया जाता है जिससे यह मित्र कीट निकलकर शत्रु कीट के अण्डों को परजीवीकृत करते है।

ट्राइकोग्रामा परजीवी प्रयोग मात्राः- बेधक नाशीजीवों से फसलकी सुरक्षा हेतु 50 हजार ट्राइकोग्रामा केलोनिस प्रजाति युक्त ट्राइको कार्ड को 10 दिन के अन्तराल पर छोड़ा जाता है या 2.5 कार्ड एक हेक्टेयर में लगाया जाता है। पूरी फसल अवधि में 4 से 6 बार ट्राइको कार्ड छोड़ने की जरुरत पड़ती है।इसके छोड़ने के पश्चात किसी भी तरह के रासायनिक कीटनाशक का उपयोग नहीं करना चाहिए।

लाभः –

  1. इसे प्रयोग करना बहुत ही सरल है और यह पर्यावरण के अनुकूल एवं सुरक्षित है।
  2. मित्र कीटों पर किसी भी प्रकार का प्रतिकूल असर नहीं होता है।
  3. यह अत्यधिक कम लागत में शत्रु कीटों का प्रभावी ढ़ंग से नियंत्रण करता है।

भण्डारणः- इसे 5  से 10० सेटीग्रेट तापमान पर 30  दिन तक रखा जा सकता है। 

ट्राइकोग्रामा परजीवी के प्रयोग में सावधानियाँ:-

1) इसे सुबह या शाम के समय पर ही खेतों में छोड़ना चाहिए।

2) इसको खेतों में छोड़ने के बाद किसी भी प्रकारके कीटनाशी रसायन का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

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