फसल की खेती (Crop Cultivation)

सोयाबीन के साथ कौन-सी अंतरवर्ती फसल होगी फायदेमंद? ICAR ने किसानों को दी सलाह

29 जुलाई 2026, नई दिल्ली: सोयाबीन के साथ कौन-सी अंतरवर्ती फसल होगी फायदेमंद? ICAR ने किसानों को दी सलाह – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अधीन राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान (ICAR-NSRI), इंदौर ने 29 जून से 5 जुलाई 2026 के लिए जारी साप्ताहिक एडवाइजरी में किसानों को सोयाबीन के साथ अंतरवर्ती (इंटरक्रॉपिंग) खेती अपनाने की सलाह दी है। संस्थान के अनुसार, सही अंतरवर्ती फसलों का चयन करने से किसानों को मौसम संबंधी जोखिम कम करने, भूमि का बेहतर उपयोग करने और आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

असिंचित क्षेत्रों में अरहर के साथ करें खेती

आईसीएआर-एनएसआरआई के अनुसार, जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा नहीं है और रबी फसल लेना संभव नहीं होता, वहां किसान सोयाबीन के साथ 4:2 अनुपात में अरहर की अंतरवर्ती खेती कर सकते हैं। यह मॉडल वर्षा आधारित खेती वाले क्षेत्रों के लिए अधिक लाभकारी माना गया है और किसानों को बेहतर आर्थिक लाभ देने में सहायक हो सकता है।

सिंचित क्षेत्रों में इन फसलों के साथ करें इंटरक्रॉपिंग

संस्थान ने बताया कि जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वे सोयाबीन के साथ मक्का, ज्वार, कपास और बाजरा जैसी फसलों की अंतरवर्ती खेती कर सकते हैं। इन फसलों की कटाई समय पर होने से रबी फसलों की बुवाई पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता और खेत का बेहतर उपयोग हो जाता है।

फलदार बागों में भी कर सकते हैं सोयाबीन की खेती

आईसीएआर ने सलाह दी है कि जिन किसानों के पास आम, अमरूद, संतरा या अन्य फलदार बाग हैं, वे पेड़ों के बीच खाली पड़ी जगह में भी सोयाबीन की खेती कर सकते हैं। इससे खाली भूमि का उपयोग होगा और किसानों को अतिरिक्त आय प्राप्त हो सकती है।

एक साथ कई किस्में लगाने की सलाह

संस्थान ने किसानों को अपने जलवायु क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग अवधि में पकने वाली कम से कम दो से तीन अधिसूचित (नोटिफाइड) सोयाबीन किस्मों की खेती करने की सलाह दी है। इससे मौसम की अनिश्चितता का जोखिम कम होगा और किसी एक किस्म के प्रभावित होने पर दूसरी किस्म से उत्पादन मिलने की संभावना बनी रहेगी।

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