ICAR की नई ‘कुफरी रूबी’ किस्म अपनाएं किसान, 90 दिन में तैयार होंगे बेबी पोटैटो; 25 टन प्रति हेक्टेयर तक मिलेगा उत्पादन
28 जुलाई 2026, नई दिल्ली: ICAR की नई ‘कुफरी रूबी’ किस्म अपनाएं किसान, 90 दिन में तैयार होंगे बेबी पोटैटो; 25 टन प्रति हेक्टेयर तक मिलेगा उत्पादन – आलू उत्पादक किसानों के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने एक नई और उन्नत आलू किस्म ‘कुफरी रूबी’ विकसित की है। यह विशेष किस्म कम अवधि में तैयार होने, अधिक उत्पादन देने और बेबी पोटैटो की बेहतर उपज के लिए जानी जाती है। ICAR के अनुसार, यह किस्म केवल 90 दिनों में तैयार हो जाती है और इससे 60 प्रतिशत तक बेबी पोटैटो प्राप्त किए जा सकते हैं। साथ ही इसकी उत्पादन क्षमता 23 से 25 टन प्रति हेक्टेयर तक है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
90 दिन में तैयार होगी फसल
कुफरी रूबी को विशेष रूप से तेजी से तैयार होने वाली आलू किस्म के रूप में विकसित किया गया है। कम अवधि में फसल तैयार होने से किसान समय पर कटाई कर अगली फसल की बुवाई भी आसानी से कर सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि कुल उत्पादन का बड़ा हिस्सा बेबी पोटैटो के रूप में मिलता है, जिसकी बाजार में अच्छी मांग रहती है।
लाल छिलका और बेहतर गुणवत्ता इसकी पहचान
इस किस्म के आलू का बाहरी छिलका आकर्षक लाल रंग का होता है, जबकि अंदर का गूदा मध्यम गहरे पीले रंग का होता है। इसमें 18 से 19 प्रतिशत ड्राई मैटर पाया जाता है, जिससे यह घरेलू उपयोग के साथ-साथ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के लिए भी उपयुक्त माना जाता है। बेहतर गुणवत्ता के कारण किसानों को बाजार में अच्छे दाम मिलने की संभावना रहती है।
उत्तर भारत के लिए उपयुक्त किस्म
आईसीएआर के अनुसार, कुफरी रूबी की खेती उत्तर भारत के मैदानी और पठारी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। यह किस्म विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में अच्छा प्रदर्शन करती है, जिससे अधिक क्षेत्रों के किसान इसका लाभ उठा सकते हैं।
बेबी पोटैटो की बढ़ती मांग से मिलेगा फायदा
हाल के वर्षों में होटल, रेस्तरां, फूड प्रोसेसिंग उद्योग और रिटेल बाजार में बेबी पोटैटो की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में कुफरी रूबी जैसी किस्म किसानों के लिए बेहतर व्यावसायिक विकल्प बन सकती है। अधिक बेबी पोटैटो उत्पादन के साथ किसानों को मूल्य संवर्धन और बेहतर आय का अवसर भी मिलेगा।
आलू वैल्यू चेन को मिलेगी मजबूती
आईसीएआर का मानना है कि कुफरी रूबी जैसी उन्नत किस्में न केवल किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में मदद करेंगी, बल्कि देश की आलू वैल्यू चेन को भी मजबूत करेंगी। बेहतर गुणवत्ता, अधिक उत्पादन और बाजार की मांग के अनुरूप यह किस्म भविष्य में आलू उत्पादकों के लिए लाभदायक साबित हो सकती है।
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