धान में खरपतवार प्रबंधन: निचली भूमि (लो-लैंड) की सीधी बुवाई वाली फसल के लिए ICAR-CRRI की सलाह
शुरुआती अवस्था में खरपतवार नियंत्रण जरूरी
01 अगस्त 2026, नई दिल्ली: धान में खरपतवार प्रबंधन: निचली भूमि (लो-लैंड) की सीधी बुवाई वाली फसल के लिए ICAR-CRRI की सलाह – निचली भूमि में सीधी बुवाई वाले धान में प्रारंभिक खरपतवार नियंत्रण फसल की अच्छी स्थापना के लिए आवश्यक है। खेत की नमी और जलभराव की स्थिति के अनुसार उचित खरपतवार प्रबंधन अपनाना चाहिए।
ICAR-CRRI ने इसके लिए विभिन्न परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग उपाय सुझाए हैं।
अनुशंसित शाकनाशी
संस्थान ने सलाह दी है कि किसान—
- बिसपायरीबैक सोडियम 10% एससी @120 मि.ली. प्रति एकड़ का छिड़काव खरपतवार की 2–3 पत्ती अवस्था में करें।
वैकल्पिक रूप से,
- फेनॉक्साप्रॉप-पी-एथिल + एथॉक्सीसल्फ्यूरॉन का टैंक मिक्स 15–20 दिन बाद नम मिट्टी में प्रयोग किया जा सकता है।
ब्यूशेनिंग की सलाह
जहां खरपतवारनाशी का उपयोग नहीं किया गया है तथा खेत में 7–10 सेमी पानी एकत्र हो गया हो, वहां ब्यूशेनिंग करने की सलाह दी गई है।
इसके बाद—
- अर्ध-गहरे एवं गहरे जल वाले क्षेत्रों में 18 किग्रा यूरिया प्रति एकड़
- वर्षा आधारित उथले क्षेत्रों में 36 किग्रा यूरिया प्रति एकड़
टॉप ड्रेसिंग के रूप में दें।
समन्वित खरपतवार प्रबंधन अपनाएं
समय पर निराई एवं संतुलित पोषण से फसल की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ती है और खरपतवारों का प्रभाव कम होता है।
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