Ad DesktopAd TabletAd Mobile
फसल की खेती (Crop Cultivation)

पंतनगर के वैज्ञानिकों ने विकसित कीं मक्का की 3 नई संकर किस्में, जानें क्या हैं इनकी खासियतें

07 नवंबर 2026, नई दिल्ली: पंतनगर के वैज्ञानिकों ने विकसित कीं मक्का की 3 नई संकर किस्में, जानें क्या हैं इनकी खासियतें – पशुपालन करने वाले किसानों के लिए अच्छी खबर है। पशुओं के लिए पौष्टिक हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में गोविन्द बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के वैज्ञानिकों ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। वैज्ञानिकों ने जंगली मक्का और टियोसिंटे (Teosinte) के आनुवंशिक गुणों का इस्तेमाल करते हुए चारा मक्का की तीन उन्नत संकर प्रजातियां विकसित की हैं। इनमें पंत संकर चारा मक्का-1, पंत संकर चारा मक्का-2 और पंत संकर चारा मक्का-3 शामिल हैं। इन नई प्रजातियों से किसानों को चारा उत्पादन के बेहतर विकल्प मिल सकेंगे और पशुपालकों को पशुओं के लिए गुणवत्तायुक्त हरा चारा उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।

विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ऐसी चारा मक्का प्रजातियां तैयार करने पर ध्यान दिया है, जो अधिक मात्रा में चारा देने के साथ लंबे समय तक हरी बनी रहें। इससे पशुओं को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य और उत्पादन क्षमता के लिए हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता जरूरी होती है। ऐसे में चारा मक्का की इन नई संकर प्रजातियों को पशुपालन के लिहाज से उपयोगी माना जा रहा है।

चारा मक्का की 3 नई संकर किस्में कौन-सी हैं?

पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने चारा मक्का की तीन उन्नत संकर प्रजातियां विकसित की हैं। इनके नाम पंत संकर चारा मक्का-1, पंत संकर चारा मक्का-2 और पंत संकर चारा मक्का-3 रखे गए हैं। इनमें से पहली दो प्रजातियों को विमोचित किया जा चुका है। इसके अलावा पंत संकर चारा मक्का-1 और पंत संकर चारा मक्का-2 को भारत सरकार के राजपत्र में अधिसूचित भी किया गया है। वहीं, तीसरी प्रजाति पंत संकर चारा मक्का-3 को राजपत्र में अधिसूचित कराने की प्रक्रिया अभी जारी है। इस तरह तीनों प्रजातियों का विकास किया जा चुका है, जबकि दो को सरकारी स्तर पर अधिसूचना मिल चुकी है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

जंगली मक्का और टियोसिंटे के आनुवंशिक गुणों का किया उपयोग

इन उन्नत प्रजातियों को तैयार करने के लिए वैज्ञानिकों ने जंगली मक्का और टियोसिंटे के आनुवंशिक गुणों का उपयोग किया है। टियोसिंटे मक्का से संबंधित जंगली पौधा है। इसके आनुवंशिक गुण फसल सुधार से जुड़े अनुसंधान में उपयोगी होते हैं। वैज्ञानिकों ने इन गुणों के आधार पर ऐसी संकर प्रजातियां विकसित की हैं, जो चारा उत्पादन के लिए बेहतर विकल्प बन सकें। इन किस्मों से किसानों को गुणवत्तायुक्त पशुचारा तैयार करने के नए अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, खेतों में इनका प्रदर्शन स्थानीय जलवायु, मिट्टी और अपनाई जाने वाली कृषि तकनीकों पर भी निर्भर करेगा।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

संकर बीज उत्पादन की तकनीक विकसित करने पर काम

तीनों प्रजातियों के विकास के बाद विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक अब इनके संकर बीज उत्पादन की तकनीक तैयार करने पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही इन प्रजातियों से जुड़ी तकनीक को व्यावसायिक स्तर पर उपलब्ध कराने और किसानों तक पहुंचाने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। संकर बीज उत्पादन की तकनीक विकसित होने और इसके व्यावसायीकरण से किसानों को इन किस्मों के बीज उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। इससे विश्वविद्यालय में किए जा रहे अनुसंधान का लाभ खेती और पशुपालन से जुड़े किसानों तक पहुंच सकेगा। किसान अपने क्षेत्र की परिस्थितियों और जरूरत के अनुसार इन प्रजातियों को चारा उत्पादन के विकल्प के रूप में अपना सकेंगे।

कुलपति ने मक्का अनुसंधान प्रक्षेत्र का किया निरीक्षण

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. शिवेन्द्र कुमार कश्यप ने फसल अनुसंधान केन्द्र में स्थित मक्का प्रजनन एवं बीज उत्पादन प्रायोगिक प्रक्षेत्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने वैज्ञानिकों से चारा मक्का की विकसित प्रजातियों और उनसे संबंधित अनुसंधान की प्रगति की जानकारी ली। कुलपति ने संकर बीज उत्पादन की तकनीक विकसित करने और इन प्रजातियों से जुड़ी तकनीक के व्यावसायीकरण की संभावनाओं पर भी वैज्ञानिकों के साथ चर्चा की। उन्होंने शोध टीम के प्रयासों की सराहना की और अनुसंधान कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी मार्गदर्शन दिया। साथ ही, विकसित प्रजातियों और उनसे संबंधित तकनीकों को अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया।

चारा उत्पादन और पशुपालन के लिए खुलेंगे नए विकल्प

पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की यह उपलब्धि चारा उत्पादन को बेहतर बनाने और पशुपालकों को नए विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण है। चारा मक्का की उन्नत संकर प्रजातियों से पशुओं के लिए पौष्टिक हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे पशुपालकों को पशु आहार प्रबंधन में सुविधा मिलने के साथ चारे की व्यवस्था पर होने वाले खर्च को कम करने की संभावना भी है।

हालांकि, इन किस्मों का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचाने के लिए इनके बीजों की उपलब्धता, अलग-अलग क्षेत्रों के लिए उपयुक्तता और खेती की तकनीक की जानकारी जरूरी होगी। विश्वविद्यालय द्वारा संकर बीज उत्पादन और व्यवसायीकरण के लिए किए जा रहे प्रयास सफल होते हैं, तो आने वाले समय में इन तीनों प्रजातियों का लाभ अधिक किसानों और पशुपालकों तक पहुंच सकता है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture