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फसल की खेती (Crop Cultivation)

सरसों की टॉप- 5 हाई यील्ड किस्में: 28 क्विंटल तक देंगी उपज, जानिए खासियत

27 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: सरसों की टॉप- 5 हाई यील्ड किस्में: 28 क्विंटल तक देंगी उपज, जानिए खासियत – सरसों देश की प्रमुख तिलहनी फसलों में शामिल हैं। रबी सीजन में इनकी खेती किसानों के लिए अच्छी आमदनी का जरिया बन सकती है। खरीफ फसलों की कटाई के बाद अब रबी की बुवाई की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। ऐसे में अगर किसान सरसों की खेती करने जा रहे हैं, तो बुवाई से पहले सही किस्म का चुनाव करना जरूरी है। अलग-अलग किस्मों में पैदावार, तेल की मात्रा और फसल पकने की अवधि में अंतर होता है। कुछ उन्नत किस्मों की उपज क्षमता 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है। आइए जानते हैं सरसों की ऐसी ही 5 किस्मों की खासियत, ताकि किसान अपनी जरूरत और खेती की परिस्थितियों के अनुसार सही विकल्प चुन सकें।

1. टी-59 (वरुणा)

टी-59, जिसे वरुणा के नाम से भी जाना जाता है, सरसों की 8 प्राथमिक शाखाओं वाली किस्म है। यह देर से बुवाई के लिए उपयुक्त बताई गई है। इसमें फूल आने का समय 45 से 50 दिन और फसल के पकने की अवधि 130 से 135 दिन होती है। इसकी तेल की मात्रा लगभग 36 प्रतिशत है, जबकि असिंचित परिस्थितियों में प्रति हेक्टेयर 15 से 18 क्विंटल तक उपज मिल सकती है। इसके दाने मोटे और काले रंग के होते हैं। मोयले के प्रकोप से बचाव के लिए इसकी बुवाई 15 से 20 अक्टूबर तक करने की सलाह दी गई है।

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2. पूसा बोल्ड

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पूसा बोल्ड सरसों की एक प्रमुख किस्म है। इसके पौधों की ऊंचाई मध्यम होती है और फलियां मोटी होती हैं। इस किस्म को पकने में 130 से 140 दिन लगते हैं। इसमें तेल की मात्रा 37 से 38 प्रतिशत तक होती है। इसकी पैदावार क्षमता 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। बेहतर उत्पादन के लिए किसानों को अपने क्षेत्र की कृषि परिस्थितियों के अनुसार इसकी बुवाई और फसल प्रबंधन करना चाहिए।

3. बायो 902 (पूसा जयकिसान)

बायो 902, जिसे पूसा जयकिसान के नाम से भी जाना जाता है, रोग प्रतिरोधी विशेषताओं वाली सरसों की किस्म है। इसमें सफेद रोली और मुरझान रोगों का प्रकोप कम होता है। इसके पौधों की ऊंचाई 160 से 180 सेंटीमीटर तक होती है और फसल को पकने में 130 से 140 दिन लगते हैं। इसकी तेल की मात्रा 38 से 40 प्रतिशत तक होती है, जबकि प्रति हेक्टेयर 18 से 20 क्विंटल उपज मिल सकती है। इस किस्म का दाना कालापन लिए भूरे रंग का होता है और इसकी खासियत यह है कि दाना झड़ता नहीं है।

4. डीआरएमआर 150-35 (भारतीय सरसों)

डीआरएमआर 150-35 सरसों की एक किस्म है, जिसकी पैदावार क्षमता लगभग 18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। इसमें तेल की मात्रा 39.8 प्रतिशत तक होती है। इसके पौधों की ऊंचाई 164 से 186 सेंटीमीटर तक रहती है। इस किस्म की परिपक्वता अवधि 114 दिन है। कम अवधि में फसल तैयार होने की इसकी विशेषता किसानों के लिए उपयोगी हो सकती है, हालांकि किस्म का चयन स्थानीय कृषि परिस्थितियों को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

5. डीआरएमआरआईजे-31 (गिरिराज)

डीआरएमआरआईजे-31, जिसे गिरिराज के नाम से भी जाना जाता है, सरसों की उन्नत और प्रमाणित किस्म है। इसमें तेल की मात्रा 39 से 42.6 प्रतिशत तक होती है। इसकी पैदावार क्षमता 23 से 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई गई है। इसके पौधों की ऊंचाई 180 से 210 सेंटीमीटर तक होती है और फसल को पकने में 137 से 153 दिन लगते हैं। अधिक संभावित उपज और तेल की अच्छी मात्रा इस किस्म की प्रमुख विशेषताएं हैं। 

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