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फसल की खेती (Crop Cultivation)

सरसों की खेती: अच्छी पैदावार के लिए कब और कैसे करें बुवाई? जानें पूरी जानकारी

27 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: सरसों की खेती: अच्छी पैदावार के लिए कब और कैसे करें बुवाई? जानें पूरी जानकारी – रबी सीजन में सरसों की खेती किसानों के लिए आय का एक अच्छा विकल्प है। सरसों की पत्तियों का उपयोग हरे चारे के रूप में किया जाता है, जबकि इसके बीजों से तेल निकाला जाता है। सरसों की खली भी पशुओं के चारे में काम आती है। हालांकि, फसल से अच्छी पैदावार लेने के लिए सही समय पर बुवाई, खेत की तैयारी, बीज की मात्रा, खाद और सिंचाई का ध्यान रखना जरूरी है। आइए जानते हैं सरसों की खेती का सही तरीका और अच्छी उपज के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

सरसों की खेती के लिए कैसी होनी चाहिए जलवायु और मिट्टी?

सरसों रबी मौसम की फसल है। इसकी अच्छी बढ़वार के लिए 18 से 25 डिग्री सेल्सियस तापमान अनुकूल माना जाता है। बुवाई के समय मिट्टी का तापमान लगभग 25 से 26 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए। सरसों की खेती रेतीली मिट्टी से लेकर भारी चिकनी मिट्टी तक में की जा सकती है, लेकिन बलुई दोमट मिट्टी इसके लिए बेहतर मानी जाती है। हल्की क्षारीय मिट्टी में भी इसकी खेती की जा सकती है, जबकि अम्लीय मिट्टी फसल के लिए नुकसानदायक होती है। फसल में फूल आने के समय अधिक नमी, बारिश और बादल छाए रहने से माहू यानी चेपा कीट का प्रकोप बढ़ सकता है। इसलिए मौसम और फसल की स्थिति पर नजर रखना जरूरी है।

सरसों की बुवाई कब करें?

सरसों की बुवाई का समय सिंचाई की उपलब्धता और क्षेत्र की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक बुवाई करना उपयुक्त रहता है। सिंचित क्षेत्रों में अक्टूबर के अंत तक बुवाई की जा सकती है। हालांकि, 15 अक्टूबर से पहले बुवाई करने पर माहू के प्रकोप से बचाव में मदद मिल सकती है।

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बुवाई से पहले खेत की तैयारी कैसे करें?

खरीफ फसल की कटाई के बाद खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए। इसके बाद देशी हल से 3 से 4 बार जुताई करके खेत को समतल कर लें। वर्षा आधारित क्षेत्रों में खरीफ के दौरान खेत को खाली छोड़ने से मिट्टी में नमी संरक्षित रखने में मदद मिल सकती है। आखिरी जुताई के समय 2 से 3 किलोग्राम एजोटोबैक्टर और पीएसबी कल्चर को लगभग 50 किलोग्राम अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट में मिलाकर खेत में डालने की सलाह दी गई है।

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सरसों की बुवाई में बीज की मात्रा और दूरी का रखें ध्यान

सरसों की बुवाई करते समय बीज की मात्रा और पौधों के बीच उचित दूरी रखना जरूरी है। वर्षा आधारित क्षेत्रों में प्रति हेक्टेयर 4 से 5 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है, जबकि सिंचित क्षेत्रों में लगभग 2.5 किलोग्राम बीज पर्याप्त बताया गया है। बुवाई के दौरान कतारों के बीच 30 सेंटीमीटर की दूरी रखें। सिंचित क्षेत्रों में बीज को लगभग 5 सेंटीमीटर की गहराई पर बोया जा सकता है, जबकि वर्षा आधारित क्षेत्रों में मिट्टी की नमी के अनुसार गहराई तय करनी चाहिए। बीज बोने से पहले प्रति किलोग्राम बीज पर 2.5 ग्राम मैंकोजेब से उपचार करने की जानकारी भी दी गई है।

सरसों की फसल में खाद और उर्वरक कब डालें?

सिंचित क्षेत्रों में बुवाई से लगभग चार सप्ताह पहले प्रति हेक्टेयर 8 से 10 टन गोबर की अच्छी तरह सड़ी खाद डालनी चाहिए। वर्षा आधारित क्षेत्रों में बारिश शुरू होने से पहले 4 से 6 टन खाद प्रति हेक्टेयर डालने की सलाह दी गई है। सिंचित सरसों की फसल के लिए प्रति हेक्टेयर 80 किलोग्राम नाइट्रोजन और 30 से 40 किलोग्राम फॉस्फोरस की मात्रा बताई गई है। इसके अलावा, सल्फर की पूर्ति के लिए प्रति हेक्टेयर 60 किलोग्राम जिप्सम देने का उल्लेख है। नाइट्रोजन की आधी मात्रा और फॉस्फोरस की पूरी मात्रा बुवाई के समय डालें। नाइट्रोजन की शेष आधी मात्रा पहली सिंचाई के समय दी जा सकती है।

अच्छी पैदावार के लिए सरसों में सिंचाई कब करें?

सरसों की फसल में सिंचाई की जरूरत बारिश और मिट्टी में मौजूद नमी पर निर्भर करती है। यदि पर्याप्त बारिश नहीं हुई है, तो कम से कम दो सिंचाइयां करने की सलाह दी गई है। पहली सिंचाई बुवाई के 30 से 40 दिन बाद और दूसरी फलियों के बनने की अवस्था में, यानी लगभग 70 से 80 दिन बाद की जा सकती है। यदि पानी सीमित मात्रा में उपलब्ध है और केवल एक सिंचाई संभव है, तो फूल आने की अवस्था में लगभग 40 से 50 दिन बाद सिंचाई करना उपयोगी हो सकता है।

खरपतवार नियंत्रण और पौधों की उचित दूरी

सरसों की फसल में खरपतवारों को नियंत्रित करना भी जरूरी है। पहली निराई-गुड़ाई बुवाई के लगभग 20 से 25 दिन बाद करनी चाहिए। पौधों के बीच लगभग 8 से 10 सेंटीमीटर की दूरी बनाए रखने के लिए जरूरत के अनुसार छंटाई करें। सिंचाई के बाद गुड़ाई करने से भी खेत में खरपतवार नियंत्रण में मदद मिलती है। खेत में सत्यानाशी खरपतवार के बीजों को फसल के साथ आने से रोकना चाहिए, क्योंकि इसके बीजों से सरसों के तेल में मिलावट हो सकती है और तेल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

सरसों की कटाई कब करें?

सरसों की फसल सामान्यतः 120 से 150 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। जब पौधों की पत्तियां और फलियां पीली पड़ने लगें, तब कटाई की जा सकती है। कटाई में देरी होने पर फलियों से बीज झड़ने का खतरा रहता है, जिससे उपज में 5 से 10 प्रतिशत तक नुकसान हो सकता है।

सरसों की खेती से कितनी उपज मिल सकती है?

उन्नत कृषि पद्धतियों को अपनाने पर वर्षा आधारित क्षेत्रों में सरसों की औसत उपज लगभग 15 से 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और सिंचित क्षेत्रों में 20 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है। वास्तविक पैदावार मिट्टी, मौसम, किस्म और फसल प्रबंधन पर निर्भर करती है। सरसों के बीजों में लगभग 30 से 48 प्रतिशत तक तेल पाया जा सकता है। इसके तेल का उपयोग खाना पकाने, मालिश, साबुन और ग्रीस बनाने तथा फलों और सब्जियों के संरक्षण में किया जाता है। सरसों की खली में भी पोषक तत्व होते हैं और इसका उपयोग पशु आहार में किया जाता है।

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