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फसल की खेती (Crop Cultivation)

खेत में नमी कम, पानी सीमित: किसान कौन सी गेहूँ किस्म चुनें?

किसान का सवाल, कृषक जगत का जवाब: हर खेत की जरूरत अलग, तो किस्म भी अलग

30 अक्टूबर 2026, भोपाल: खेत में नमी कम, पानी सीमित: किसान कौन सी गेहूँ किस्म चुनें? – इस रबी सीजन में बुवाई से पहले कई किसानों के मन में एक जैसा सवाल है। सवाल: इस बार बारिश कम हुई, खेत में नमी बहुत कम है और ट्यूबवेल में भी इतना पानी नहीं कि पूरी सिंचाई हो सके। बजट भी सीमित है। ऐसे में कौन सी गेहूँ किस्म बोऊँ जो गर्मी में भी फसल निकाल दे?”

यह चिंता सही भी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार इस साल मानसून में सामान्य से लगभग 13 प्रतिशत कम बारिश हुई और जलाशयों में भी पिछले साल से कम पानी है। अल नीनो के कारण सर्दी के गर्म रहने की आशंका भी जताई गई है।

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ऐसे साल में सबसे समझदारी का कदम है कम अवधि वाली किस्म चुनना। जो फसल जल्दी बाली निकालती है, वह कम दिन खेत में रहती है, आम तौर पर कम पानी मांगती है और मार्च की तेज गर्मी आने से पहले दाना भर लेती है। बाजार में श्रीराम फार्म सॉल्यूशन्स (डीसीएम श्रीराम) की तीन ऐसी किस्में हैं, और किसान अपनी स्थिति के हिसाब से इनमें से चुनाव कर सकता है।

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अपनी स्थिति के हिसाब से किस्म चुनें

पानी कम है और पशुओं के लिए चारा भी चाहिए: श्रीराम सुपर 1-SR-15

श्रीराम सुपर 1-SR-15 गेहूँ की किस्म में बालियाँ 65 से 70 दिन में निकल आती हैं। कंपनी के अनुसार गर्मी का इसके दानों पर बुरा असर नहीं पड़ता, दाना न सिकुड़ता है और न उसका वजन घटता है।

यह मध्यम अवधि में अधिक उपज देती है और रोगों के प्रति सहनशील है। कल्ले अधिक निकलते हैं और चारा (भूसा) भी अधिक मिलता है, जो पशुपालक किसानों के लिए अतिरिक्त फायदा है।

थोड़ा पानी है, आंधी-बारिश और रोग का डर है: श्रीराम सुपर 303

इसमें बालियाँ 72 से 75 दिन में निकलती हैं। ठोस बालियाँ और मजबूत तने फसल को गिरने से बचाते हैं, और भूरा रतुआ व झुलसा के प्रति सहनशीलता से दवा का खर्च कम रहता है।

इसके दाने बड़े, वजनदार, कठोर और चमकदार होते हैं। जो किसान मंडी में अच्छे दाने का भाव चाहते हैं, उनके लिए यह अच्छा विकल्प है।

इलाके में गर्मी जल्दी बढ़ती है और बड़ी बाली चाहिए: श्रीराम सुपर 1-SR-14

कंपनी ने इसे गर्मी के वार से निपटने वाली किस्म के रूप में पेश किया है। बालियाँ 75 से 80 दिन में निकलती हैं, और ये बड़ी, आकर्षक व अधिक दानों वाली होती हैं।

यह फसल गिरने और भूरा रतुआ (ब्राउन रस्ट) के प्रति सहनशील है। अधिक कल्ले, अधिक उपज और अधिक चारा इसकी अन्य खूबियाँ हैं।

बजट का हिसाब: तीनों किस्मों में समय पर बुवाई के लिए 40 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ काफी है और देर से बुवाई में मात्रा 20 प्रतिशत बढ़ानी होती है। यानी बीज की मात्रा तीनों में बराबर है, और रोग सहनशील होने से दवाओं का खर्च भी काबू में रहता है।

कम पानी हो तो सिंचाई कब करें

किस्म के साथ सिंचाई का सही समय भी उतना ही जरूरी है। खेत में नमी कम हो तो पलेवा देकर ओट आने पर बुवाई करें और सीड ड्रिल से बोएं, ताकि बीज नमी वाली परत तक पहुँचे।

अगर सिर्फ एक सिंचाई का पानी है, तो उसे बुवाई के 20 से 21 दिन बाद मुख्य जड़ बनने (CRI अवस्था) पर दें। दो सिंचाई संभव हों तो दूसरी बाली निकलते समय करें, और तीसरी का पानी हो तो दाना भरते समय दें।

दाना भरते समय गर्म हवा चले तो हल्की सिंचाई फसल को राहत देती है। लेकिन तेज हवा के समय सिंचाई से बचें, वरना फसल गिर सकती है।

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