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फसल की खेती (Crop Cultivation)

मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के लिए कुसुम की अधिक उपज देने वाली किस्मों की सूची

25 नवम्बर 2023, भोपाल: मध्यप्रदेश व छत्तीसगढ़ के लिए कुसुम की अधिक उपज देने वाली किस्मों की सूची – कुसुम की कम अवधि में अधिक उपज देने वाली किस्में छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे गैर-पारंपरिक कुसुम उत्पादक राज्यों के लिए उपयुक्त हैं। छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में चावल आधारित देर  से बोई जाने वाली स्थितियों के लिए निम्नलिखित कुसुम की तीन किस्में जारी की गई हैं। यह किस्में कृषि विभाग, नई दिल्ली और आईसीएआर के प्री-रबी इंटरफेस 2023 के दौरान प्रस्तावित की गई हैं।

छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ कुसुम-1 (आरएसएस 2012-11): 2020 में अधिसूचित इस किस्म को छत्तीसगढ़ में चावल आधारित देर से बोई जाने वाली स्थितियों के लिए जारी किया गया है। सिंचित स्थिति में यह 1677 किलोग्राम/हेक्टेयर बीज उपज और 33% तेल सामग्री के साथ 115-120 दिनों में पक जाती है। छत्तीसगढ़ में सभी अधिक उपज देने वाली किस्में 140-145 दिनों में पक जाती हैं, इसलिए यह किस्म 20-25 दिन पहले तैयार हो जाती है और राज्य के देर से बोए जाने वाले धान आधारित क्षेत्रों में खेती के लिए आदर्श है।

मध्य प्रदेश

राज विजय कुसुम 14-1 (आरवीएसएएफ 14-1): 2021 में अधिसूचित, इस किस्म को मध्य प्रदेश राज्य में खेती के लिए एआईसीआरपी (सैफ्लावर) केंद्र, इंदौर द्वारा विकसित किया गया था। 121-137 दिनों में पकने वाली कांटेदार किस्म की बीज उपज 1800-2200 किलोग्राम/हेक्टेयर और तेल सामग्री 29-30% दर्ज की गई हैं।

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राज विजय कुसुम 18-3 (आरवीएसएएफ 18-3): 2023 में अधिसूचित, इस किस्म को मध्य प्रदेश राज्य के लिए आरवीएसकेवीवी ग्वालियर के तहत एआईसीआरपी (सैफ्लॉवर) केंद्र, इंदौर में विकसित किया गया था। यह 127-132 दिनों में पक जाता है, औसत बीज उपज 1726 किलोग्राम/हेक्टेयर और तेल की मात्रा 33.3% होती है।

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