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फसल की खेती (Crop Cultivation)

अगर कटहल के फल गिर रहे हैं तो घबराएं नहीं, अपनाएं ये वैज्ञानिक उपाय  

23 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: अगर कटहल के फल गिर रहे हैं तो घबराएं नहीं, अपनाएं ये वैज्ञानिक उपाय – कटहल में छोटे-छोटे फलों का बार-बार गिरना एक सामान्य लेकिन नुकसानदायक समस्या है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या अक्सर फफूंद जनित संक्रमण के कारण होती है। फफूंदी हवा के माध्यम से कोमल फलों पर आक्रमण करती है, जिससे फल काले पड़कर गिरने लगते हैं। कई बार कीटों द्वारा फलों में छेद करने से दूध जैसा पदार्थ निकलता है, जिससे फफूंद का फैलाव और तेज हो जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कटहल का पेड़ बड़ा होने के कारण इसके फल केवल शाखाओं पर ही नहीं, बल्कि तनों पर भी लगते हैं। ऐसे में रोग नियंत्रण के लिए सही तकनीक से छिड़काव करना जरूरी होता है। लम्बी नली वाले स्प्रेयर का उपयोग कर फफूंदनाशी का छिड़काव अधिक प्रभावी रहता है।

फफूंद नियंत्रण के लिए जरूरी उपाय

कटहल में फलों के गिरने की समस्या से बचाव के लिए बोर्डो मिश्रण एक प्रभावी उपाय माना जाता है। यह पुरानी लेकिन आज भी कारगर दवा है, बशर्ते इसे सही तकनीक से तैयार और उपयोग किया जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, बोर्डो मिश्रण का छिड़काव करने के साथ-साथ इसे तनों पर लेप के रूप में भी लगाया जाना चाहिए, जिससे संक्रमण पर बेहतर नियंत्रण मिलता है।

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वैकल्पिक फफूंदनाशी का उपयोग

यदि बोर्डो मिश्रण तैयार करना संभव न हो, तो ताम्रयुक्त फफूंदनाशी का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए 2 ग्राम दवा को 1 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए। यह छिड़काव 15 दिनों के अंतराल पर कम से कम दो बार करने से अच्छा लाभ मिलता है।

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किसानों के लिए सलाह

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर रोग पहचान और सही उपचार से कटहल की फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है। नियमित निगरानी, सही छिड़काव तकनीक और संतुलित देखभाल से उत्पादन में सुधार संभव है और फल गिरने की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

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