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फसल की खेती (Crop Cultivation)

तिल की फसल को इन कीटों से कैसे बचाएं? अपनाएं आसान जैविक उपाय

21 जून 2025, नई दिल्ली: तिल की फसल को इन कीटों से कैसे बचाएं? अपनाएं आसान जैविक उपाय –  तिल की खेती करते समय कीटों का प्रकोप किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है, खासकर पत्ती और फली की इल्ली, फली छेदक और गॉल मक्खी जैसे कीटों से। ये न केवल फसल की गुणवत्ता को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि उपज को भी काफी हद तक कम कर देते हैं। रासायनिक कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की सेहत और पर्यावरण पर भी असर पड़ता है। ऐसे में जैविक उपाय एक सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बनकर उभरते हैं। इस लेख में जानिए तिल की फसल को प्रमुख कीटों से बचाने के लिए आसान और टिकाऊ जैविक तकनीकें।

तिल की बुवाई से पहले बीज जनित रोगों की रोकथाम के लिए बीज को बाविस्टिन 2.0 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से उपचारित करना चाहिए। यदि जीवाणुजनित पत्ती धब्बा रोग की समस्या हो, तो बीज को बोने से पहले एग्रीमाइसिन-100 के 0.025% घोल में 30 मिनट तक भिगोना चाहिए।

खाद डालना

तिल की फसल के लिए बेसल ड्रेसिंग के रूप में मवेशी खाद या कम्पोस्ट को अंतिम जुताई के साथ मिट्टी में मिलाना चाहिए। जब मिट्टी में पर्याप्त नमी हो, तो उर्वरकों को बेसल खुराक के रूप में डालना चाहिए। अमोनियम सल्फेट की तुलना में यूरिया का उपयोग अधिक प्रभावी होता है। नाइट्रोजन को विभाजित खुराकों में डाला जा सकता है, जिसमें 75% बेसल के रूप में और शेष 25% को बुवाई के 20-35 दिन बाद पत्तियों पर 500 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।

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राज्य/स्थितिएन:पी:के की अनुशंसित खुराक (किग्रा/हेक्टेयर)विशिष्ट अनुशंसा
आंध्र प्रदेश – तटीय क्षेत्रतेलंगाना40-40-2030-30-20–
गुजरातखरीफअर्द्ध-रबी30-25-025-25-037.5-25-25सल्फर 20-40 किग्रा/हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें।आधा N + पूर्ण P 2 O 5 और K 2 O बेसल के रूप में, शेष आधा N 30-35 DAS पर।
मध्य प्रदेश/छत्तीसगढ़रेनफेडगर्मी40-30-2060-40-20जिंक की कमी वाली मिट्टी में तीन वर्ष में एक बार 25 किग्रा/हेक्टेयर जिंक सल्फेट डालें।
महाराष्ट्र50-0-0आधा नाइट्रोजन बुवाई के 3 सप्ताह बाद तथा शेष आधा नाइट्रोजन 6 सप्ताह बाद
ओडिशा30-20-30–
राजस्थानभारी मिट्टीहल्की मिट्टी20-20-040-25-0350 मिमी से कम वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए350 मिमी से अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों के लिए
तमिलनाडुसिंचितरेनफेड35-23-2325-15-15N, P2O5, K2O की पूरी खुराक को बेसल के रूप में लागू करें।बीज को एजोस्पिरिलम से उपचारित किया जा सकता है।
उत्तर प्रदेश/उत्तराखंड20-10-0–
पश्चिम बंगालसिंचितरेनफेड50-25-2525-13-13आलू के बाद बोने पर कोई उर्वरक नहीं।

प्लांट का संरक्षण

  • फिलोडी से प्रभावित पौधों को हटाकर नष्ट कर दें। प्रभावित पौधों के बीजों का उपयोग बुवाई के लिए न करें।
  • पत्ती और फली की इल्ली के नियंत्रण के लिए, प्रभावित पत्तियों और टहनियों को हटा दें और 10 प्रतिशत कार्बेरिल का छिड़काव करें।
  • एजाडिरेक्टिन 0.03 प्रतिशत की 5 मिली मात्रा प्रति लीटर की दर से 7वें और 20वें दिन छिड़काव करने तथा उसके बाद आवश्यकतानुसार छिड़काव करने से पत्ती और फली की इल्ली, फली छेदक कीट तथा फाइलोडी कीट के प्रकोप को नियंत्रित किया जा सकता है।
  • गॉल फ्लाई के नियंत्रण के लिए 0.2 प्रतिशत कार्बेरिल का निवारक छिड़काव करें।
  • पत्ती मरोड़ रोग के नियंत्रण के लिए रोग प्रभावित तिल के पौधों के साथ-साथ रोगग्रस्त सहवर्ती पौधों जैसे मिर्च, टमाटर और ज़िन्निया को हटाकर नष्ट कर दें।

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