फसल की खेती (Crop Cultivation)

धान की ये है टॉप-3 किस्में: 110-120 दिन में फसल होगी तैयार, 4 टन तक मिलेगी उपज; जानें पूरी खासियत  

10 अगस्त 2026, नई दिल्ली: धान की ये है टॉप-3 किस्में: 110-120 दिन में फसल होगी तैयार, 4 टन तक मिलेगी उपज; जानें पूरी खासियत – धान की खेती में अच्छी पैदावार के लिए उन्नत किस्म का चुनाव बेहद महत्वपूर्ण है। अलग-अलग कृषि परिस्थितियों के लिए विकसित धान की किस्मों में उत्पादन क्षमता, फसल अवधि और रोग-कीट प्रतिरोध जैसी विशेषताएं किसानों के लिए अहम होती हैं। केंद्रीय चावल अनुसंधान संस्थान (NRRI) ने ऐसी कई उन्नत किस्में विकसित की हैं, जिनमें प्यारी (CR Dhan 200), CR Dhan 201 और CR Dhan 202 प्रमुख हैं। इन किस्मों की फसल करीब 110 से 120 दिन में तैयार हो जाती है और इनकी औसत उपज 3.7 से 4 टन प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है।

प्यारी (CR Dhan 200)

प्यारी (CR Dhan 200) मध्यम-शीघ्र अवधि वाली धान की किस्म है। इसे तैयार होने में करीब 115 से 120 दिन लगते हैं। इसे वर्ष 2011 में ओडिशा में खेती के लिए जारी किया गया था। इस किस्म के दाने छोटे और मोटे होते हैं। इसकी औसत उत्पादकता करीब 4 टन प्रति हेक्टेयर है। प्यारी किस्म लीफ ब्लास्ट, नेक ब्लास्ट, ब्राउन स्पॉट, येलो स्टेम बोरर और लीफ फोल्डर जैसे प्रमुख रोगों एवं कीटों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी बताई गई है।

CR Dhan 201

CR Dhan 201 (CR2721-81-3-IR83380-B-B-124-1) मध्यम-शीघ्र अवधि वाली किस्म है, जो करीब 110 से 115 दिन में तैयार होती है। इसे वर्ष 2012 में बिहार और छत्तीसगढ़ में खेती के लिए जारी किया गया था।

इस किस्म के दाने लंबे और पतले होते हैं तथा इसकी औसत उत्पादकता करीब 3.8 टन प्रति हेक्टेयर है। यह किस्म गिरने यानी लॉजिंग की समस्या के प्रति प्रतिरोधी है। इसमें प्रति वर्ग मीटर करीब 280 बालियां बनती हैं और इसकी बालियां लंबी तथा घनी होती हैं। CR Dhan 201 लीफ ब्लास्ट, शीथ रॉट, तना छेदक, लीफ फोल्डर, व्हॉर्ल मैगट और राइस थ्रिप्स जैसे प्रमुख रोगों एवं कीटों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है।

CR Dhan 202

CR Dhan 202 (CR2715-13-IR84899-B-154) भी मध्यम-शीघ्र अवधि वाली धान की किस्म है। यह करीब 110 दिन में तैयार हो जाती है। इसे वर्ष 2012 में झारखंड और ओडिशा में खेती के लिए जारी किया गया था। इसके दाने छोटे और मोटे होते हैं तथा औसत उत्पादकता करीब 3.7 टन प्रति हेक्टेयर है। इस किस्म में प्रति वर्ग मीटर करीब 285 बालियां बनती हैं और सामान्य तौर पर 7 से 10 कल्ले निकलते हैं। इसकी बालियां मध्यम आकार की और घनी होती हैं।

यह किस्म लीफ ब्लास्ट, ब्राउन स्पॉट, शीथ रॉट, तना छेदक, लीफ फोल्डर, व्हॉर्ल मैगट और राइस थ्रिप्स जैसे प्रमुख रोगों एवं कीटों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी है।’

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