फसल की खेती (Crop Cultivation)राज्य कृषि समाचार (State News)

लौकी की खेती में गोबर खाद और वर्मी कम्पोस्ट का करें इस्तेमाल, कम लागत में मिलेगा बंपर उत्पादन

18 जून 2026, नई दिल्ली: लौकी की खेती में गोबर खाद और वर्मी कम्पोस्ट का करें इस्तेमाल, कम लागत में मिलेगा बंपर उत्पादन – रासायनिक उर्वरकों की बढ़ती कीमतों और मिट्टी की घटती उर्वरता के बीच किसान अब जैविक खेती को प्राथमिकता दे रहे हैं। खासकर लौकी जैसी नकदी फसलों में गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट, वर्मीवाश और गौमूत्र आधारित जैविक घोल का उपयोग उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ लागत कम करने में भी मददगार साबित हो रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जैविक पोषण प्रबंधन अपनाने से मिट्टी की सेहत बेहतर होती है, पौधों की वृद्धि तेज होती है और फलों की गुणवत्ता में भी सुधार आता है। ऐसे में खरीफ सीजन में लौकी की खेती करने वाले किसानों के लिए यह तकनीक अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफे का प्रभावी विकल्प बन सकती है।

जैविक खाद से बढ़ती है मिट्टी की उर्वरता

लौकी की खेती में अच्छी पैदावार के लिए खेत तैयार करते समय पर्याप्त मात्रा में जैविक खाद का उपयोग करना चाहिए। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सड़ी हुई गोबर खाद, नाडेप कम्पोस्ट और वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी में जैविक तत्वों की मात्रा बढ़ाकर पौधों को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराते हैं। इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता बढ़ती है और पौधों का विकास बेहतर होता है।

वर्मी कम्पोस्ट और गौमूत्र का करें उपयोग

फसल की बढ़वार के दौरान वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग पौधों की जड़ों को मजबूत बनाता है। वहीं गौमूत्र के घोल का छिड़काव पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार रोपाई के 20 से 25 दिन बाद और फिर 40 से 45 दिन बाद गौमूत्र आधारित घोल का छिड़काव करना लाभकारी होता है।

वर्मीवाश से मिलते हैं बेहतर परिणाम

लौकी की फसल में फूल आने से पहले, फल बनने के समय और फल विकास की अवस्था में वर्मीवाश के घोल का छिड़काव करने से फलों का आकार, चमक और गुणवत्ता बेहतर होती है। इससे बाजार में उत्पाद की मांग और कीमत दोनों बढ़ सकती हैं।

लागत कम, मुनाफा ज्यादा

विशेषज्ञों का कहना है कि जैविक खाद और प्राकृतिक उत्पादों के उपयोग से किसानों की रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है। इससे उत्पादन लागत घटती है और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलती है। लौकी की खेती में जैविक पोषण प्रबंधन अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन के साथ अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।

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