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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

संरक्षित कृषि आधारित मक्का उत्पादन : कम लागत में अधिक उपज का बेहतर तरीका

17 जून 2026, नई दिल्ली: संरक्षित कृषि आधारित मक्का उत्पादन : कम लागत में अधिक उपज का बेहतर तरीका – मक्का भारत की प्रमुख खाद्यान्न फसलों में से एक है। वर्तमान समय में बढ़ती खेती लागत, मृदा क्षरण और जल की कमी जैसी समस्याओं को देखते हुए संरक्षित कृषि (Conservation Agriculture) मक्का उत्पादन की एक प्रभावी तकनीक बनकर उभरी है। इस पद्धति का उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, जल संरक्षण करना तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त करना है।

संरक्षित कृषि क्या है?

संरक्षित कृषि तीन मुख्य सिद्धांतों पर आधारित है—

  1. कम से कम जुताई (Zero/Minimum Tillage)
  2. फसल अवशेषों द्वारा भूमि का आच्छादन
  3. फसल विविधीकरण एवं फसल चक्र

इन सिद्धांतों को अपनाने से मिट्टी का कटाव कम होता है, नमी अधिक समय तक बनी रहती है, जैविक कार्बन बढ़ता है तथा खेती की लागत घटती है।

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मक्का की खेती के लिए प्रमुख सिफारिशें

  • बुवाई का उपयुक्त समय: जून-जुलाई
  • बीज दर:
    • संकर मक्का: 20-25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
    • संकुल मक्का: 18-20 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर
  • बीजोपचार:
    • कार्बेन्डाजिम 2-3 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज
    • क्लोरोपायरीफॉस 1-2 मिली प्रति किलोग्राम बीज
    • एजोबैक्टर 250 ग्राम प्रति 10 किलोग्राम बीज

मक्का के प्रमुख रोग एवं उनका नियंत्रण

1. पत्ती अंगमारी (Leaf Blight)

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यह रोग पत्तियों पर धब्बे बनाता है और प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करता है।

2. मृदुरोमिल आसिता (Downy Mildew)

इस रोग में पौधों की वृद्धि रुक जाती है तथा पत्तियों पर सफेद फफूंद जैसी परत दिखाई देती है।

3. टर्सिकम लीफ ब्लाइट (Turcicum Leaf Blight)

यह रोग पत्तियों पर लंबे भूरे धब्बे बनाता है, जिससे उत्पादन प्रभावित होता है।

रोग नियंत्रण

  • जिनेब (Zineb) 2.5–4 ग्राम प्रति लीटर पानी का छिड़काव करें।
  • डायथेन एम-45 (Dithane M-45) 2–2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
  • आवश्यकता होने पर 8–10 दिन के अंतराल पर पुनः छिड़काव करें।

मक्का के प्रमुख कीट एवं नियंत्रण

1. फॉल आर्मी वर्म (Fall Armyworm)

यह कीट पत्तियों को खाकर पौधों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।

2. तना छेदक (Stem Borer)

यह तने में सुरंग बनाकर पौधे की वृद्धि एवं उपज को प्रभावित करता है।

नियंत्रण उपाय

निम्न में से किसी एक कीटनाशी का प्रयोग करें—

  • इमामेक्टिन बेन्जोएट 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी
  • इमिडाक्लोप्रिड 0.5 मिली प्रति लीटर पानी
  • क्लोरोपायरीफॉस 1.5–2 मिली प्रति लीटर पानी

मक्का के प्रमुख खरपतवार

संरक्षित कृषि आधारित मक्का में निम्न खरपतवार अधिक पाए जाते हैं—

  • दूब/क्रैब ग्रास
  • डायनोबा/जंगली घास
  • आइसीमा/घास कुल के खरपतवार
  • सायपेरस इरिया
  • यूफोर्बिया प्रजातियां
  • पार्थेनियम
  • इल्यूसिन इंडिका
  • अल्टरनेन्थेरा सेसिलिस

खरपतवार नियंत्रण

  • बुवाई के 30 और 45 दिन बाद दो बार निराई-गुड़ाई करें।
  • आवश्यकता अनुसार अनुशंसित शाकनाशियों का प्रयोग करें।
  • फसल अवशेषों का आच्छादन खरपतवारों के अंकुरण को कम करता है।
  • फसल चक्र अपनाने से भी खरपतवारों का दबाव घटता है।

संरक्षित कृषि के प्रमुख लाभ

  • जुताई खर्च में कमी
  • ईंधन की बचत
  • मिट्टी की उर्वरता में वृद्धि
  • जल संरक्षण और 1–2 सिंचाई की बचत
  • खरपतवार एवं कीट-रोगों का कम प्रकोप
  • मिट्टी में जैविक कार्बन और सूक्ष्मजीवों की संख्या में वृद्धि
  • अधिक एवं स्थिर उत्पादन

संरक्षित कृषि आधारित मक्का उत्पादन प्रणाली किसानों के लिए लाभकारी, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ खेती का विकल्प है। कम जुताई, फसल अवशेषों का उपयोग तथा फसल विविधीकरण अपनाकर किसान उत्पादन लागत घटा सकते हैं और बेहतर उपज प्राप्त कर सकते हैं। रोग, कीट और खरपतवारों का समय पर प्रबंधन करने से मक्का की फसल अधिक स्वस्थ और लाभदायक बनती है।

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