फसल की खेती (Crop Cultivation)

जून-जुलाई में करें लौकी की खेती, इन उन्नत किस्मों से मिलेगा बंपर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा

18 जून 2026, नई दिल्ली: जून-जुलाई में करें लौकी की खेती, इन उन्नत किस्मों से मिलेगा बंपर उत्पादन और ज्यादा मुनाफा – खरीफ सीजन में जून-जुलाई के दौरान लौकी की बुवाई किसानों के लिए अच्छा मुनाफा देने वाला विकल्प साबित हो सकती है। बाजार में इसकी लगातार मांग बनी रहती है और कम समय में तैयार होने के कारण यह नकदी फसल के रूप में भी लोकप्रिय है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सही किस्मों का चयन, उचित दूरी पर बुवाई और वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाकर किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।

इन उन्नत किस्मों का करें चयन

लौकी की अधिक पैदावार के लिए उन्नत किस्मों का चयन बेहद महत्वपूर्ण है। लंबी किस्मों में पूसा समर प्रोलिफिक लॉन्ग, पूसा मेघदूत, पंजाब लंबी, पंजाब कोमल, अर्का बहार, पंत संकर लौकी-1 और नरेंद्र संकर लौकी-4 प्रमुख हैं। वहीं गोल लौकी के लिए पूसा मंजरी, पूसा संदेश और हिसार सिलेक्शन गोल जैसी किस्में किसानों के बीच लोकप्रिय हैं। ये किस्में बेहतर उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं।

बुवाई का सही समय और बीज की मात्रा

ग्रीष्मकालीन फसल के लिए जनवरी से मार्च तथा खरीफ मौसम की फसल के लिए जून से जुलाई का समय उपयुक्त माना जाता है। वर्षाकालीन खेती के लिए 3 से 4 किलोग्राम तथा गर्मी की फसल के लिए 4 से 6 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त होता है। बुवाई के दौरान पौधों के बीच उचित दूरी बनाए रखने से फसल का विकास बेहतर होता है।

खेत की तैयारी और रोपाई

लौकी की खेती के लिए जीवांश युक्त हल्की दोमट भूमि सबसे उपयुक्त मानी जाती है। खेत में जल निकासी की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। बुवाई से पहले बीजों को ट्राइकोडर्मा से उपचारित करने पर फफूंद जनित रोगों का खतरा कम हो जाता है। अगेती फसल लेने के इच्छुक किसान पॉलीबैग में पौध तैयार कर रोपाई भी कर सकते हैं।

उत्पादन बढ़ाने के लिए जरूरी उपाय

विशेषज्ञों के अनुसार समय पर सिंचाई, निराई-गुड़ाई और खरपतवार नियंत्रण करने से फसल का विकास बेहतर होता है। पौधों को पर्याप्त पोषण मिलने पर फल बड़े, चमकदार और बाजार में अधिक मूल्य प्राप्त करने वाले बनते हैं। सही तकनीक अपनाकर किसान लौकी की खेती से कम समय में बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

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