सालों से बिना बीजोपचार के बो रहे हैं सोयाबीन? यही गलती घटा रही है अंकुरण और उत्पादन
29 मई 2026, नई दिल्ली: सालों से बिना बीजोपचार के बो रहे हैं सोयाबीन? यही गलती घटा रही है अंकुरण और उत्पादन – सोयाबीन की खेती में किसान अक्सर बड़ी-बड़ी चीजों पर ध्यान देते हैं — बारिश, खाद, दवा और बाजार भाव। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण काम, यानी बीजोपचार, आज भी बड़ी संख्या में किसान नजरअंदाज कर देते हैं। यही छोटी गलती बाद में कम पौध संख्या, कमजोर फसल और कम उत्पादन का कारण बनती है।
कई किसान मानते हैं कि यदि बीज साफ दिख रहा है तो उसे सीधे बो देना चाहिए। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि बीज के अंदर और ऊपर मौजूद फफूंद, बैक्टीरिया और कीट शुरुआती अवस्था में ही फसल को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देते हैं। किसान को इसका पता तब चलता है जब खेत में पौधे कम दिखाई देने लगते हैं।
राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने किसानों को सलाह दी है कि बोवनी से पहले बीजोपचार अनिवार्य रूप से करें। संस्थान ने एज़ोक्सीस्ट्रोबिन 2.5% + थायोफिनेट मिथाइल 11.25% + थायामेथोक्साम 25% FS को 10 मिली प्रति किलो बीज की दर से उपयोग करने की अनुशंसा की है।
विशेषज्ञों के अनुसार बिना बीजोपचार के बोए गए खेतों में तना मक्खी, जड़ सड़न, पिथियम ब्लाइट और चारकोल रॉट जैसी समस्याएँ तेजी से बढ़ती हैं। कई बार किसान बाद में स्प्रे पर हजारों रुपये खर्च करते हैं, जबकि बीजोपचार बेहद कम लागत में शुरुआती सुरक्षा दे सकता है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि बीजोपचार केवल रोग नियंत्रण नहीं, बल्कि बेहतर अंकुरण और मजबूत शुरुआती बढ़वार की भी गारंटी है। यदि बीज की शुरुआत मजबूत होगी, तभी पौधे बाद में अधिक फलियाँ बना पाएँगे।
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