खरीफ में अरहर की खेती से बढ़ाएं मुनाफा, ICAR की इन 3 किस्मों पर करें भरोसा; मिलेगी 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज
23 जून 2026, नई दिल्ली: खरीफ में अरहर की खेती से बढ़ाएं मुनाफा, ICAR की इन 3 किस्मों पर करें भरोसा; मिलेगी 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज – देशभर में खरीफ सीजन की बुवाई शुरू हो चुकी है और किसान ऐसी फसलों की तलाश में हैं, जो कम समय में बेहतर उत्पादन के साथ अधिक मुनाफा दे सकें। ऐसे में अरहर (तुअर) किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है। दालों की बढ़ती मांग और बाजार में अच्छे दाम के चलते अरहर की खेती किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा विकसित अरहर की कुछ उन्नत किस्में कम समय में तैयार होने, रोग प्रतिरोधी होने और अधिक उत्पादन देने के कारण किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं। इनमें पूसा अरहर-16, पूसा अरहर-151 (पूसा श्रीजीता) और पूसा अरहर-2017-1 प्रमुख हैं, जो किसानों को 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज देने में सक्षम हैं।
पूसा अरहर-16: कम अवधि में बेहतर उत्पादन
पूसा अरहर-16 अरहर की जल्दी तैयार होने वाली उन्नत किस्मों में शामिल है। यह किस्म लगभग 120 दिनों में पककर तैयार हो जाती है, जिससे किसानों को कम समय में उत्पादन प्राप्त हो जाता है। इसकी औसत उपज 19 से 21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक हो सकती है।
इस किस्म की एक खास विशेषता यह भी है कि इसकी कटाई के बाद किसान अपने खेत में गेहूं, सरसों या आलू जैसी दूसरी फसलों की खेती भी आसानी से कर सकते हैं। इस प्रकार एक ही खेत से सालभर में अधिक आय अर्जित करने का अवसर मिलता है।
पूसा अरहर-151 (पूसा श्रीजीता): अधिक पैदावार वाली किस्म
पूसा अरहर-151, जिसे पूसा श्रीजीता के नाम से भी जाना जाता है, ICAR द्वारा विकसित एक उच्च उत्पादक किस्म है। यह बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों की जलवायु के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
यह किस्म लगभग 241 दिनों में तैयार होती है और 20.8 से 27.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन देने की क्षमता रखती है। इसके दानों में करीब 23.6 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है, जिससे इसकी पोषण गुणवत्ता भी बेहतर होती है। साथ ही यह उकठा (विल्ट) रोग के प्रति प्रतिरोधी है, जिससे किसानों को फसल नुकसान का खतरा कम रहता है।
पूसा अरहर-2017-1: जल्दी पकने वाली उन्नत किस्म
पूसा अरहर-2017-1 भी जल्दी तैयार होने वाली किस्मों में शामिल है। यह किस्म विशेष रूप से कम समय में बेहतर उत्पादन देने के लिए जानी जाती है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के इलाकों के किसानों के लिए इसे उपयुक्त माना जाता है।
यह किस्म लगभग 122 दिनों में तैयार हो जाती है और 21.2 से 21.6 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज दे सकती है। कम अवधि में अच्छी पैदावार मिलने के कारण यह किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन रही है।
बुवाई का सही समय
विशेषज्ञों के अनुसार, अरहर की इन उन्नत किस्मों की बुवाई जून के दूसरे पखवाड़े यानी 15 जून के बाद से जुलाई के पहले सप्ताह तक करना सबसे उपयुक्त माना जाता है। यदि इस दौरान अच्छी मानसूनी वर्षा हो जाए तो पौधों का विकास बेहतर होता है और उत्पादन में भी वृद्धि होती है।
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