फसल की खेती (Crop Cultivation)

खरपतवारनाशी गलत समय पर डाल रहे हैं? सोयाबीन की आधी उपज यहीं चली जाती है

29 मई 2026, नई दिल्ली: खरपतवारनाशी गलत समय पर डाल रहे हैं? सोयाबीन की आधी उपज यहीं चली जाती है – सोयाबीन की खेती में किसान अक्सर खाद और बीज पर तो खर्च करते हैं, लेकिन खरपतवार प्रबंधन को हल्के में ले लेते हैं। यही कारण है कि शुरुआती 40 दिनों में खरपतवार खेत की नमी, पोषण और रोशनी छीन लेते हैं। कई बार किसान तब दवा डालते हैं जब खरपतवार काफी बड़े हो चुके होते हैं। उस समय तक नुकसान शुरू हो चुका होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार सोयाबीन की सफल खेती में खरपतवार नियंत्रण सबसे महत्वपूर्ण शुरुआती कामों में से एक है। यदि शुरुआती अवस्था में खेत साफ रखा जाए, तो उत्पादन में बड़ा अंतर दिखाई देता है।

राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने खरपतवार नियंत्रण के लिए प्री-प्लांट इन्कॉरपोरेशन (PPI), प्री-इमर्जेंस (PE) और पोस्ट-इमर्जेंस (PoE) आधारित वैज्ञानिक प्रबंधन की सलाह दी है। 

बोवनी से पहले उपयोग होने वाले खरपतवारनाशी (PPI)

बोवनी से पहले खेत में मिलाने वाले खरपतवारनाशी शुरुआती खरपतवारों को रोकने में मदद करते हैं।

राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने डायक्लोसुलम 0.9% + पेंडीमेथालीन 35% SE को 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करने की सलाह दी है। इसके अलावा फ्लूक्लोरालिन 45% EC को 2.22–3.33 लीटर प्रति हेक्टेयर तक उपयोग किया जा सकता है। 

विशेषज्ञों के अनुसार इन दवाओं को मिट्टी में अच्छी तरह मिलाना जरूरी है, अन्यथा प्रभाव कम हो सकता है।

बोवनी के तुरंत बाद उपयोग होने वाले खरपतवारनाशी (Pre-Emergence)

बोवनी के बाद लेकिन खरपतवार निकलने से पहले दवा डालना सबसे प्रभावी माना जाता है। राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने पायरोक्सासल्फोन 63.75% + डायक्लोसुलम 13% WG को 200 ग्राम प्रति हेक्टेयर उपयोग करने की सलाह दी है।

मेटोलाक्लोर 35.98% + सल्फेंट्राजोन 11.51% EC को 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर उपयोग किया जा सकता है। पेंडीमेथालीन 30 EC को 2.5–3.3 लीटर प्रति हेक्टेयर तथा क्लोमाजोन 50 EC को 1.5–2 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करने की अनुशंसा की गई है। 

विशेषज्ञ कहते हैं कि इन दवाओं के बाद हल्की नमी होना जरूरी है, तभी खरपतवार नियंत्रण बेहतर होता है।

बोवनी के 10–20 दिन बाद उपयोग होने वाले खरपतवारनाशी (Post-Emergence)

यदि खेत में बाद में खरपतवार दिखाई दें, तो पोस्ट-इमर्जेंस खरपतवारनाशी उपयोग किए जाते हैं। लेकिन यहाँ सबसे बड़ी गलती समय की होती है। बड़े खरपतवारों पर दवा का असर कम होता है।

राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने इमेजेथापायर 10 SL को 1 लीटर प्रति हेक्टेयर, क्विजालोफॉप एथाइल 5 EC को 0.75–1 लीटर प्रति हेक्टेयर तथा फोमेसाफेन + क्विजालोफॉप एथाइल मिश्रण को 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से उपयोग करने की सलाह दी है। 

इसके अलावा क्लेथोडिम 25 EC (0.5–0.7 लीटर/हेक्टेयर), प्रोपाक्विजाफॉप 10 EC (0.5–0.75 लीटर/हेक्टेयर) और फ्लूआजीफॉप-पी-ब्यूटाइल 13.4 EC (1–2 लीटर/हेक्टेयर) की भी अनुशंसा की गई है। 

विशेषज्ञों का कहना है कि हर खेत में एक जैसी दवा काम नहीं करती। खरपतवार की प्रजाति और खेत की स्थिति के अनुसार दवा चुनना जरूरी है। बार-बार एक ही खरपतवारनाशी उपयोग करने से प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ सकती है।

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