फसल की खेती (Crop Cultivation)राज्य कृषि समाचार (State News)

बैंगन की खेती से किसान हुआ मालामाल! 1.31 हेक्टेयर में कमाए 2.45 लाख रुपये, नई तकनीक बनी गेम चेंजर

26 मई 2026, रायपुर: बैंगन की खेती से किसान हुआ मालामाल! 1.31 हेक्टेयर में कमाए 2.45 लाख रुपये, नई तकनीक बनी गेम चेंजर – आधुनिक कृषि तकनीक और नवाचार के जरिए किसान अपनी आय में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। इसका जीवंत उदाहरण महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम बोहारपार के प्रगतिशील किसान नवीन साव ने पेश किया है। पारंपरिक धान खेती से सीमित आमदनी मिलने के बाद उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में ग्राफ्टेड बैंगन की उन्नत खेती अपनाई और आज लाखों रुपये का मुनाफा कमाकर क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

धान की खेती से नहीं हो रही थी ज्यादा आय

किसान नवीन साव ने बताया कि वे पहले अपने खेतों में पारंपरिक तरीके से धान की खेती करते थे। धान उत्पादन से उन्हें प्रति एकड़ लगभग 21 क्विंटल उपज मिलती थी, जिससे करीब 45 हजार 600 रुपये तक का लाभ हो पाता था। खेती से बढ़ती लागत और सीमित मुनाफे को देखते हुए उन्होंने नई तकनीक अपनाने का निर्णय लिया।

वर्ष 2025-26 में उन्होंने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत ग्राफ्टेड बैंगन की खेती शुरू की। उन्होंने अपनी 1.31 हेक्टेयर भूमि पर वैज्ञानिक पद्धति से खेती करते हुए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया।

ग्राफ्टेड बैंगन से मिली बंपर पैदावार

आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक तरीके से की गई खेती का परिणाम यह रहा कि किसान को प्रति एकड़ लगभग 155 क्विंटल बैंगन का उत्पादन प्राप्त हुआ। ग्राफ्टेड बैंगन की खासियत यह है कि इसमें दो अलग-अलग पौधों को जोड़कर एक नया पौधा तैयार किया जाता है, जिससे पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है और उत्पादन भी सामान्य खेती की तुलना में 20 से 30 प्रतिशत तक अधिक मिलता है।

इस फसल की रोपाई के करीब 45 से 50 दिनों बाद तुड़ाई शुरू हो जाती है और एक पौधे से लगभग 50 किलो तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

मंडियों में मिली अच्छी कीमत

नवीन साव ने अपने खेत में तैयार बैंगन को स्थानीय सरायपाली और पड़ोसी राज्य ओडिशा की मंडियों में बेचा। उन्हें बैंगन की थोक कीमत लगभग 30 रुपये प्रति किलोग्राम मिली। सभी खर्चों को निकालने के बाद उन्होंने करीब 2 लाख 45 हजार रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया, जो पारंपरिक धान खेती की तुलना में पांच गुना से भी अधिक है।

विभागीय मार्गदर्शन से मिली सफलता

किसान नवीन साव अपनी सफलता का श्रेय उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के तकनीकी मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं के सहयोग और आधुनिक कृषि पद्धतियों को सीखने की अपनी जिज्ञासा को देते हैं। वे लगातार नई कृषि तकनीकों और अनुसंधानों की जानकारी लेते रहते हैं और खेतों में नए प्रयोग करने को प्राथमिकता देते हैं।

दूसरे किसानों के लिए बने प्रेरणा

नवीन साव की सफलता को देखकर आसपास के गांवों के किसान भी अब पारंपरिक खेती छोड़कर उन्नत उद्यानिकी फसलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। कच्चापाल और बोहारपार क्षेत्र के कई किसान उनके फार्म का भ्रमण कर ग्राफ्टेड बैंगन की खेती और आधुनिक तकनीकों को समझ रहे हैं।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति, ड्रिप सिंचाई और आधुनिक फसल प्रबंधन तकनीकों को अपनाएं तो कम भूमि में भी अधिक उत्पादन और बेहतर मुनाफा प्राप्त किया जा सकता है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture