केवीके बड़वानी की किसानों को सलाह: गेहूं की 5 प्रमुख अवस्थाओं में सही सिंचाई से मिलेगा बेहतर उत्पादन
09 जनवरी 2026, भोपाल: केवीके बड़वानी की किसानों को सलाह: गेहूं की 5 प्रमुख अवस्थाओं में सही सिंचाई से मिलेगा बेहतर उत्पादन – कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) बड़वानी के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस. के. बड़ोदिया द्वारा बड़वानी, पाटी एवं निवाली विकासखंडों में गेहूं की फसल ले रहे किसानों के खेतों का भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान कई स्थानों पर गेहूं की फसल में सिंचाई एवं पोषक तत्व प्रबंधन की आवश्यकता देखी गई, जिस पर किसानों को वैज्ञानिक सलाह दी गई।
गेहूं में संतुलित पोषण प्रबंधन जरूरी
डॉ. बड़ोदिया ने बताया कि गेहूं फसल के लिए नत्रजन, फास्फोरस और पोटाश 120:60:40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की अनुशंसा की जाती है। इसमें से एक-तिहाई नत्रजन तथा पूरी मात्रा में फास्फोरस व पोटाश बुवाई के समय देना चाहिए, जिससे फसल की प्रारंभिक बढ़वार बेहतर होती है।
गेहूं की 5 प्रमुख क्रांतिक अवस्थाएं
प्रधान वैज्ञानिक ने किसानों को गेहूं फसल की पांच महत्वपूर्ण अवस्थाओं की जानकारी देते हुए सही समय पर सिंचाई और उर्वरक प्रबंधन पर विशेष जोर दिया।
1. जड़ प्रवर्तन अवस्था (20–25 दिन बाद)- यह सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है, जिसमें मुख्य जड़ों का विकास होता है। इस समय पानी की कमी होने पर जड़ों का विकास रुक जाता है, जिससे पैदावार पर सीधा असर पड़ता है। इस अवस्था में पहली सिंचाई के पहले या बाद में 40 किग्रा नत्रजन देना लाभकारी होता है।
2. कल्ले निकलने की अवस्था (40–45 दिन बाद) – इस अवस्था में पौधों से कल्ले निकलते हैं। पर्याप्त नमी रहने पर मजबूत और स्वस्थ कल्ले बनते हैं। इस समय शेष बची हुई 40 किग्रा नत्रजन सिंचाई के बाद नमी की स्थिति में देना चाहिए।
3. गांठ बनने की अवस्था (60–65 दिन बाद) – इस अवस्था में तनों में गांठ बनती है और पौधा तेजी से लंबा होता है। पानी की कमी से पौधे कमजोर हो सकते हैं। इस दौरान 00:52:34 उर्वरक 1 किग्रा प्रति एकड़ को 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई।
4. फूल आने से पहले की अवस्था (80–85 दिन बाद) – इस समय सिंचाई करने से फूल अच्छी तरह आते हैं और दानों का भराव बेहतर होता है। इस अवस्था में पानी की कमी से उपज घट सकती है।
5. दूध एवं दाना भरने की अवस्था (100–105 दिन बाद) – इस अवस्था में दानों में दूध आता है और दाना भरता है। पानी की कमी से दाने सिकुड़ सकते हैं। इस समय सिंचाई आवश्यक है। साथ ही 0:0:50 उर्वरक 1 किग्रा प्रति एकड़ को 200 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई।
कोहरा और पाले से बचाव के उपाय
डॉ. बड़ोदिया ने बताया कि कोहरे के मौसम में खेतों में हल्की सिंचाई करने से मिट्टी का तापमान संतुलित रहता है और फसलों को ठंड से सुरक्षा मिलती है। रात के समय खेत की मेड़ों पर सूखी घास, पराली या कचरा जलाकर धुआं करने से वातावरण में गर्मी बनी रहती है और पाले का प्रभाव कम होता है। इसके साथ ही 0.1 प्रतिशत गंधक घोल का छिड़काव करने से पाले से बचाव होता है और फसल की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।
मौसम साफ होने पर ही करें दवाओं का छिड़काव
केवीके वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि कीटनाशक एवं फफूंदनाशक दवाओं का प्रयोग केवल मौसम साफ होने पर ही करें, जिससे दवाओं का प्रभाव सही तरीके से फसल पर पड़ सके।
कृषि विज्ञान केन्द्र बड़वानी द्वारा दी गई यह वैज्ञानिक सलाह किसानों को गेहूं की उपज बढ़ाने, फसल को मौसम की मार से बचाने और उत्पादन लागत कम करने में सहायक सिद्ध होगी।
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