कृषक जगत के 71 वर्ष पूरे
कृषक जगत के 71 वर्ष पूरे आज से 71 वर्ष पूर्व प्रारंभ हुआ आंदोलन ‘कृषक’ अब ‘कृषि विस्तार’ के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में 3 राज्यों से कृषक जगत के रूप में प्रकाशित हो रहा है। हमें गर्व है कि
कृषक जगत के 71 वर्ष पूरे आज से 71 वर्ष पूर्व प्रारंभ हुआ आंदोलन ‘कृषक’ अब ‘कृषि विस्तार’ के महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में 3 राज्यों से कृषक जगत के रूप में प्रकाशित हो रहा है। हमें गर्व है कि
( सुनील गंगराडे ) वर्ष 2022 तक किसानों की आमदनी दुगुनी करने के लिये दिल्ली से दलौदा तक सरकारें जुटी हुई हैं और कसमें खा रही हैं, पर हासिल कुछ अर्थपूर्ण नहीं हो रहा है। मध्यप्रदेश में भी हाल ही
भोपाल। राज्य बीज संघ का विस्तार किया जायेगा। बीज संघ 4520 प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से मार्केटिंग करेगा। बीज संघ का विस्तार करने के लिए एम.डी. बीज संघ, अपेक्स बैंक और कृषि विभाग के प्रतिनिधि को शामिल
मूँगफली, मक्का, सोयाबीन की फली बनने/दाना भरने की अवस्था में हैं। यह अवस्था पानी के लिए क्रांतिक अवस्था हैं अत: फसलों में निश्चित अंतराल में सिंचाई करें। अरहर में पत्ती लपेटक का प्रकोप अधिक है तो इंडाक्साकार्ब का 5 मिली/10
आज भी अनेकानेक कारणों से हमारे देश में कृषि को उद्योग के दर्जे से दूर ही रखा गया है। जाहिर है कि जो सरकारी सुविधाएँ उद्योग धंधों को दी जाती हैं कृषि उस सबसे वंचित है। हमारी सरकारें वर्षों से
समाधान- टमाटर एक महत्वपूर्ण उपयोगी सब्जी फसल है। प्राय: हर मौसम में हर घर की रसोई में इसकी आवश्यकता होती है। आप टमाटर लगायें निम्र तकनीक अपनाकर उचित जल निकास वाली अच्छी भूमि इसके लिये उपयुक्त है। किस्मों में पूसा
समाधान- प्रदेश में करीब 60-65 प्रतिशत क्षेत्र में वर्षा आधारित गेहूं की फसल ली जाती है कृषकों द्वारा छोटी-छोटी गलतियों के चलते उत्पादन कम होता है। आप गेहूं लगायें परंतु अभी इसके बोने के लिये उपयुक्त तापमान नहीं हो पाया
समाधान – कुल्थी आमतौर पर छत्तीसगढ़ क्षेत्र में खरीफ में लगाई जाती है। यह एक ऐसी फसल है तो प्रकृति के अतिरेक को सजह ही सह लेती है तथा कुछ ना कुछ उत्पादन देकर क्षति से बचाती है। इसकी खेती
दुग्ध व्यवसाय में ज्यादा दूध देने वाले पशुओं को रोगमुक्त रखने के लिये रक्तनलिका या थन-नाल द्वारा एंटीबायोटिक दवाओं को दिया जाता है। जब भी इन दवाओं का उपयोग दुधारू पशुओं में किया जाता है तो दूध में इन दवाओं
समाधान – वर्तमान में वर्षा की स्थिति को देखते हुए और भूमि में नमी के समाप्त होने के डर से कृषकों के मन मेें विचार आना स्वाभाविक ही है कि रबी की कुछ फसलें जल्दी ही लगा ली जायें परंतु